सीकर में ढाई सेंटीमीटर की राधा रानी: भक्तों के लिए खास दर्शन का मौका

The CSR Journal Magazine
सीकर जिले के खंडेला में एक अनोखी परंपरा है, जो आस्था और इतिहास से जुड़ी हुई है। यहां मौजूद बिहारीजी मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के समान है। इसके अलावा, यहां राधाजी का एक सूक्ष्म विग्रह है, जिसकी ऊंचाई सिर्फ 2.5 सेंटीमीटर है। ऐसी छोटी प्रतिमा के दर्शन करना आम भक्तों के लिए सामान्य आंखों से संभव नहीं है।

महज एक घंटे का अवसर

इस मंदिर में राधा जी के इस सूक्ष्म विग्रह के दर्शन साल में केवल एक बार होते हैं। वो भी महज एक घंटे के लिए। भक्तों को सूक्ष्मदर्शी यंत्रों के माध्यम से इस नन्हीं राधा के दर्शन कराए जाते हैं। राधा रानी के इस स्वरूप को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ हर साल उमड़ पड़ती है। इस बार राधा अष्टमी के अवसर पर हजारों भक्तों ने सुबह 10 बजे से 11 बजे तक इस दुर्लभ विग्रह के दर्शन किए।

विशेष आयोजन और भक्ति

मंदिर के पुजारी बिहारी लाल पारीक ने बताया कि राधा जी का जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी और राधा जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष अभिषेक और पूजन के साथ मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर जी का जड़ी बूटियों से स्नान कराया जाता है, जबकि राधा अष्टमी के मौके पर राधाजी के विग्रह के दर्शन करवाए जाते हैं।

करमैती बाई की भक्ति की अनोखी दास्तान

इस अद्भुत सूक्ष्म विगृह के पीछे छह शताब्दी पुरानी भक्ति की कहानी है। इसके पीछे का इतिहास कृष्ण भक्त करमैती बाई से जुड़ा है। उन्हें शेखावाटी की मीरा भी कहा जाता है। भक्तमाल ग्रंथ में करमैती बाई की कृष्ण भक्ति का उल्लेख है। कहा जाता है कि उन्होंने गौने की पहली रात ही सांसारिक जीवन छोड़कर वृंदावन का रास्ता अपनाया। वहां भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें संत के रूप में दर्शन दिए।

राजा भी हुए प्रभावित

करमैती बाई के पिता उस समय के शेखावत राजा के पुरोहित थे। करमैती बाई की भक्ति से प्रभावित होकर उनके पिता खुद भी कृष्ण भक्ति में लीन हो गए। जब इस पर राजा को पता चला, तो वे भाग्य से वृंदावन पहुंचे। वहां करमैती बाई की कृष्ण-वियोग में भक्ति देखकर राजा भी भावविभोर हो गए। राजा ने उनके लिए यमुना किनारे एक कुटिया बनवाने का आग्रह किया और वो भी कृष्ण भक्ति में रम गए।

साल में एक बार का अद्भुत दृश्य

आज भी उस परंपरा की एक अद्भुत निशानी खंडेला के बिहारीजी मंदिर में मौजूद है। ढाई सेंटीमीटर की राधा जी, 600 साल पुरानी आस्था और साल में सिर्फ एक घंटे दर्शन होना, राधाष्टमी पर यहां का दृश्य अनूठा बनाता है। भक्तों की आस्था और भक्ति इस मंदिर को एक विशेष स्थान देती है।

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