BAMS की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत की खबर है। कोर्ट ने उन छात्रों को तृतीय प्रोफेशनल परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश दिया है, जो द्वितीय प्रोफेशनल परीक्षा में एक या दो विषय में फेल हो गए थे। सप्लीमेंट्री परीक्षा में देरी के कारण इन छात्रों का एक साल बर्बाद होने का खतरा था। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि परीक्षा में देरी छात्रों की गलती नहीं है, इसलिए इसका खामियाजा भी उन्हें नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट के इस आदेश के बाद उन BAMS छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है, जो एक-दो विषय में पिछड़ गए थे।
क्या था पूरा मामला?
मामला BAMS के द्वितीय प्रोफेशनल परीक्षा में शामिल हुए छात्रों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा के ज्यादातर विषयों में सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन वे एक-एक विषय में पास नहीं हो सके थे। इसके बाद उन्होंने सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। इस सप्लीमेंट्री परीक्षा का परिणाम 20 अगस्त 2026 को जारी किया गया। परिणाम आने के बाद भी कुछ छात्र एक विषय में सफल नहीं हो पाए। इसी बीच विश्वविद्यालय ने दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा कराने से पहले ही तृतीय प्रोफेशनल परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया। इससे छात्रों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई। दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा दिए बिना वे तीसरे वर्ष की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते थे और इस वजह से उनका पूरा शैक्षणिक साल प्रभावित होने का खतरा था।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकलपीठ ने की। कोर्ट ने माना कि दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा कराने में हुई देरी छात्रों की वजह से नहीं हुई थी। ऐसे में केवल इस वजह से उन्हें तृतीय प्रोफेशनल परीक्षा से रोकना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि छात्रों को परीक्षा से रोकने पर उनकी पढ़ाई को गंभीर और अपूरणीय नुकसान हो सकता है। इससे उनका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष भी बर्बाद हो सकता है।
समान स्थिति वाले छात्रों को भी मिलेगी राहत
हाई कोर्ट ने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (AKU) और संबंधित कॉलेजों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के अलावा समान स्थिति वाले सभी BAMS छात्रों को भी चल रही तृतीय प्रोफेशनल परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। अगर किसी छात्र का कोई पेपर पहले ही छूट चुका है, तो उसके लिए अलग से परीक्षा कराने का निर्देश भी दिया गया है। इससे ऐसे छात्रों को एक साल पीछे होने से बचाया जा सकेगा।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
BAMS जैसी प्रोफेशनल मेडिकल पढ़ाई में किसी एक परीक्षा के कारण पूरा शैक्षणिक साल पीछे हो जाना छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। पटना हाई कोर्ट के इस आदेश से उन छात्रों को राहत मिली है, जिनकी पढ़ाई परीक्षा कार्यक्रम में हुई देरी के कारण प्रभावित हो रही थी। अब आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी और संबंधित कॉलेजों को कोर्ट के निर्देश के अनुसार पात्र छात्रों को तृतीय प्रोफेशनल परीक्षा में शामिल करना होगा। साथ ही छूटे हुए पेपर के लिए अलग परीक्षा की व्यवस्था करनी होगी।
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