Pakistan में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर पर बवाल, बारिश या तोड़फोड़? सरकार का बड़ा दावा

The CSR Journal Magazine
लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को गिराने की घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यह मामला खासकर अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं और सिखों के प्रति उत्पीड़न के एक नए पहलू को उजागर करता है। चौतरफा विरोध के बाद, पंजाब की मरियम नवाज सरकार ने मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने का वादा किया है। बावजूद इसके, सरकार ने मंदिर को फिर से तोड़े जाने से इनकार करते हुए नुकसान का कारण भारी बारिश को बताया है।

कट्टरपंथियों का हाथ?

इस घटना में इस्लामिक कट्टरपंथियों के हाथ होने की बात सामने आ रही है। पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित इस मंदिर को पिछले महीने तोड़ा गया था। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, इसकी जानकारी सबसे पहले अखबार डॉन ने दी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर को पास के एक मदरसे की जमीन में मिलाने के लिए तोड़ा गया था। रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथी समूह तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े व्यक्तियों ने इस तोड़फोड़ को अंजाम दिया।

सरकार का स्पष्टीकरण

पंजाब सरकार ने मंदिर तोड़ने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह घटना प्राकृतिक आपदा के कारण हुई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने मंदिर का दौरा किया और पाया कि केवल मंदिर का साइनबोर्ड बारिश के कारण गिरा था। उन्होंने वादा किया कि इसे जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा।

लेजर को लेकर विवाद

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो जमीन मदरसे को दी गई थी, वह मंदिर से सटी हुई थी, लेकिन मंदिर की अपनी जमीन कभी लीज पर नहीं दी गई। हालांकि, मीडिया की एक रिपोर्ट में विस्थापितों की संपत्ति के लिए बने ट्रस्ट बोर्ड (ETBP) ने मंदिर की जमीन मदरसे को दी जाने की बात कही थी। इस तरह के विवाद ने सरकार की स्थिति को और कमजोर कर दिया है।

मीडिया की भूमिका पर सवाल

मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर पंजाब सरकार ने अब गंभीर चिंता जताई है। इसका कहना है कि धार्मिक पूजा स्थलों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर हर दावे की पुष्टि करना आवश्यक है। इस प्रकार के मामलों में मीडिया की जिम्मेदारी को लेकर सरकार ने दिशा-निर्देश भी दिए। इस स्थिति ने एक बार फिर पत्रकारिता की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

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