Pakistan में 25 लाख के लिए 3 साल की बच्ची की 60 साल के जीजा से शादी, मचा बवाल

The CSR Journal Magazine
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ताजा मामला सामने आया है, जहां एक 3 साल की बच्ची की शादी उसके 60 साल के जीजा से रुपयों के बदले तय की गई है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है और इसकी कड़ी आलोचना हो रही है। पुश्तैनी परंपरा के तहत अब्दुल बाकी ने अपनी बेटी की शादी 25 लाख पाकिस्तानी रुपए में सलाहुद्दीन के साथ तय की थी। इस घटना ने बेहर अलाम में बवाल मचा दिया है।

पुलिस एक्शन में आई, पिता गिरफ्तार

स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्यवाही की और लड़की के पिता को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि उसने पूर्वी चमन इलाके में अब्दुल बाकी को पकड़ लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, शादी कागज़ों पर ही थी और अभी तक दूल्हे ने रकम अदा नहीं की थी। इस बीच, 60 साल का सलाहुद्दीन फरार चल रहा है। उसके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।

संविधान के खिलाफ बाल विवाह

बलूचिस्तान में बाल विवाह को कानून ने अवैध ठहराया है। ‘बलूचिस्तान बाल विवाह रोकथाम अधिनियम’ के मुताबिक, शादी के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल निर्धारित की गई है। यदि कोई व्यक्ति इस कानून का पालन नहीं करता है, तो उसे तीन साल की prisión और 100,000 से 200,000 पाकिस्तानी रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इस घटना से स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ता भी परेशान हैं।

जिला प्रशासन की पहल

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे औपचारिक शिकायत का इंतज़ार न कर के तुरंत कार्रवाई करें। बलूचिस्तान पुलिस में जेंडर मामलों के असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल इसरार अहमद ने कहा कि लड़की और उसकी मां को पुलिस की सुरक्षा में रखा गया है।

सलाहुद्दीन पर पहले से हैं आरोप

सलाहुद्दीन के खिलाफ एक और गंभीर आरोप भी है। बताया जा रहा है कि उसने अपनी पहली पत्नी की हत्या की थी। पीड़ित लड़की की बहन की शादी सलाहुद्दीन के बेटे से हुई थी, जिसके बाद इस हत्या का आरोप लगा। पुलिस अब सलाहुद्दीन की गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है, ताकि इस मामले में और भी गहराई से जांच की जा सके।

पश्तो समुदाय की पुरानी परंपरा

यह घटना पश्तो समुदाय की एक पुरानी परंपरा ‘वालवार’ के तहत हुई है, जिसमें दूल्हे के परिवार को दुल्हन के परिवार को पैसे देने होते हैं। इस तरह की परंपराएँ कानून के विरुद्ध हैं और इसकी कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक घिनौनी प्रथा बताया है, जिसे खत्म किया जाना चाहिए।

शादी की प्रक्रिया में रुकावट

इस मामले ने समाज में गहरी चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय लोग इसे पारिवारिक जिम्मेदारियों से जोड़ते हुए देखते हैं, लेकिन कानूनी पहलुओं पर ध्यान देते हुए कहा जा रहा है कि ऐसी प्रथाएँ जल्द समाप्त होनी चाहिए। बलूचिस्तान की युवा पीढ़ी इंगित कर रही है कि ऐसे मामलों में समाज को और सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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