भारत से सिंधु जल संधि बहाल करने की पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स की अपील, अमेरिका तक पहुंची आवाज

The CSR Journal Magazine
इस्लामाबाद: पाकिस्तानी विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने सिंधु जल संधि (IWT) को बहाल करने का जोर दिया है। वॉशिंगटन में हुए पॉलिसी डायलॉग में यह कहा गया कि पाकिस्तान को राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी विवादों को इस संधि से नहीं जोड़ना चाहिए। वक्ताओं ने भारत की आलोचना की कि उसने संधि को निलंबित किया है, जबकि पानी के बंटवारे की व्यवस्था को राजनीतिक विवादों से अलग रखना चाहिए। इस बातचीत का आयोजन पाकिस्तान दूतावास ने किया था और इसमें अमेरिकी नीति विशेषज्ञ, शिक्षाविद, कानूनी व जल विशेषज्ञों का समूह शामिल था।

भारत के फैसले पर चर्चा

भारत ने 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 1960 में हुई IWT को निलंबित कर दिया था। इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत मुनीर अकरम का कहना था कि मौजूदा तनाव के बावजूद पाकिस्तान को इस संधि का पालन करना चाहिए। भारत के इसे स्थगित करने से इसकी कानूनी स्थिति नहीं बदलती, इसलिए पाकिस्तान को संधि की शर्तों का पालन करते रहना चाहिए। अकरम ने कहा कि पाकिस्तान को चीन से भी सलाह लेनी चाहिए क्योंकि वह परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में है।

कूटनीतिक पहल की आवश्यकता

रिजवान सईद, अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत, ने कहा कि इस्लामाबाद हमेशा बातचीत की दिशा में आगे बढ़ा है। उन्होंने भारत से अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखे। बोस्टन यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर आदिल नजम ने कहा कि सिंधु संधि दक्षिण एशिया में पानी के सहयोग का भविष्य निर्धारित करती है। उन्होंने संकेत दिया कि जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी से देशों के बीच सहयोग बढ़ने की आवश्यकता है।

पानी का राजनीतिकरण एक समस्या

पीपीपी की वाइस प्रेसिडेंट और सीनेट में नेता शेरी रहमान ने भारत से अनुरोध करते हुए कहा कि उसे सिंधु जल संधि का पूर्ण पालन करना चाहिए। उनका मानना है कि पानी का राजनीतिकरण क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है और इससे द्विपक्षीय जल सहयोग को नुकसान पहुंच सकता है। रहमान ने कहा कि भारत के हालिया कदम पाकिस्तान के जल संसाधनों से जुड़े अधिकारों को कमजोर नहीं कर सकते। कानूनी विवादों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाना पाकिस्तान का अधिकार है।

साझा संसाधनों का महत्व

संयुक्त संवाद में विभिन्न वक्ताओं ने यह भी कहा कि पानी के संसाधनों का मिलकर प्रबंधन करना आवश्यक है। भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों को यह समझना होगा कि एक-दूसरे के साथ सहयोग करना बेहतर है। पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि दोनों देशों के बीच किसी तरह की समस्या न आए।

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