केंद्र सरकार लाने जा रही नया बीज अधिनियम, नकली बीज के कारोबार पर नकेल 60 साल पुराना कानून बदलेगी सरकार

The CSR Journal Magazine
केंद्र सरकार 60 साल पुराने कानून को बदलेगी और संसद में एक नया बीज अधिनियम लाने की योजना बना रही है। इसका मुख्य उद्देश्य नकली बीजों के कारोबार पर कड़ी नकेल कसना है। प्रस्तावित कानून में दोषियों के लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। इस अधिनियम में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा जिससे वे बेहतर उत्पादित कर सकें।

कठोर दंड का प्रस्ताव

नया बीज अधिनियम नकली बीजों के कारोबार को खत्म करने के लिए संरचना प्रदान करेगा। प्रस्तावित कानून में विभिन्न श्रेणियों के अपराधों को बांटा गया है। पहली श्रेणी में मामूली उल्लंघन वाले कारोबारियों को रखा गया है, जिसमें पहली बार उल्लंघन पर केवल चेतावनी मिलेगी। दूसरी बार उल्लंघन पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

QR कोड की अनिवार्यता, पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना

प्रस्तावित कानून के तहत हर बीज पैकेट पर QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। इससे किसान बीज की उत्पत्ति, निर्माता और आपूर्ति श्रृंखला की जानकारी आसानी से ट्रैक कर सकेंगे। यह कदम किसानों को यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि वे उच्च गुणवत्ता के बीज खरीद रहे हैं। कानून के तहत सभी बीजों और रोपण सामग्रियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जाएगा और उन्हें बाजार में नहीं बेचा जाएगा। इस नए कानून के माध्यम से किसानों के पारंपरिक बीजों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे, जिससे वे इन्हें उपयोग और आदान-प्रदान कर सकेंगे।

उच्च जुर्माना और सजा का प्रावधान

कानून की दूसरी श्रेणी में उन कारोबारियों को रखा जाएगा, जो जानबूझकर उल्लंघन करेंगे जैसे कि आवश्यक जानकारी नहीं देना या गलत ब्रांडिंग करना। पहली बार अपराध पर 1 लाख रुपये और दूसरी बार 2 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। वहीं गंभीर अपराधों के लिए 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है।

ट्रेसबिलिटी को बनाए रखना, सीड सिक्योरिटी फंड का गठन

सरकार का मानना है कि वर्तमान में उपलब्ध ट्रेसबिलिटी व्यवस्था की कमी के कारण बीज के फेल होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होता है। नए कानून में ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य बनाने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली स्थापित की जाएगी। प्रस्तावित कानून में प्रत्येक राज्य में सीड सिक्योरिटी फंड स्थापित करने का प्रावधान है। यह फंड किसानों की मांगों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा। इसमें जुर्माने की राशि भी जमा की जाएगी। यदि बीज फेल होने पर कोई किसान नुकसान उठाता है, तो उसे 15 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाएगा।

नए कानून की आवश्यकता पर जोर, संसद में विशेष सत्र बुलाने की संभावना

केंद्र सरकार का तर्क है कि मौजूदा अधिकतर बीज अधिनियम 1966 में बनाए गए थे और उनके प्रावधान अब उपयुक्त नहीं हैं। इसी कारण नए कानून की आवश्यकता महसूस की गई है। वर्तमान में हितधारकों और किसानों से सुझाव मांगे जा रहे हैं, और इस दिशा में प्रक्रिया जारी है। संसद का विशेष सत्र बुलाने का विकल्प भी खुला है, जिसमें केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किन मुद्दों पर चर्चा करनी है। यह निर्णय ब्रिक्स समिट के बाद लिया जाएगा।

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