Nepal की बाढ़ और चीन का बांध: क्या है ‘वाटर बम’ का खतरा?   

The CSR Journal Magazine
नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ ने पूरे देश में तबाही मचा दी है, जिसमें 162 लोगों की मौत और 750 से अधिक लोग लापता हैं। इस आपदा के कारण लाखों की संपत्ति नष्ट हो गई है, जिसमें घर, सड़कें और बिजली परियोजनाएं शामिल हैं। नेपाल की सरकार इस विनाश का जिम्मेदार चीन को ठहरा रही है।

चीन का मेडोग बांध और भारत की चिंता

नेपाल की बाढ़ ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, खासकर चीन के मेडोग बांध को लेकर, जो भारत की सीमा के करीब बनाया जा रहा है। नेपाल सरकार का कहना है कि चीन के केरुंग इलाके में झील फटने से यह बाढ़ आई है। अगर चीन समय पर जानकारी देता, तो नेपाल में ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।

भयानक बाढ़ का स्रोत और चीन का विशाल प्रोजेक्ट

भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और सिंधुपालचौक जैसे जिलों में गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इस नदी का जल स्रोत तिब्बत के शिशापांगमा पर्वत है। चीन का मेडोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, जो भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब है, अब एक ‘वाटर बम’ की तरह चिंता का कारण बन गया है।

चीन के बांध की क्षमता और खतरे

चीन का यह बांध 60 गीगावाट क्षमता का होगा और यह तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के मोड़ पर बन रहा है। इस परियोजना से अपेक्षित बिजली उत्पादन क्षमता थ्री गॉर्जेस डैम के उत्पादन से तीन गुना अधिक होगी। यहां बनने वाले बांधों की ऊंचाई लगभग 2000 मीटर होगी, जिससे अचानक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

भूकंप के खतरे और नेपाल की बाढ़

यह क्षेत्र भूकंप के लिए संवेदनशील है, जिससे यह चिंताजनक हो जाता है कि कोई बड़ा भूकंप आस-पास भूस्खलन और कीचड़ बहाने का कारण बन सकता है। इस स्थिति में, नेपाल की बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान और भी बढ़ सकता है। भारत ने ऐसी स्थितियों के पहले भी अनुभव किए हैं, जहां तिब्बत में बांध टूटने से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ आई थी।

भारत की तैयारी और स्थानीय प्रतिक्रिया

भारत ने नेपाल में बाढ़ के बाद अलर्ट जारी किया है। बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। गंडक बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं और एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने की भी योजना बनाई है।

समाज पर बाढ़ का असर

नेपाल में बाढ़ के चलते 341 विदेशी यात्री लापता हैं, जिनमें 100 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाढ़ ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि इसने स्थानिक समुदायों की सुरक्षा, भूजल प्रवाह, और स्थाई विकास पर भी संकट खड़ा किया है। इन स्थितियों में, दोनों देशों के बीच बेहतर संवाद और राहत प्रयासों की आवश्यकता बढ़ गई है।

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