4 महीनों में 22 मौत की सजा: कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर?

The CSR Journal Magazine
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी सख्त सजा देने के कारण जज रवि कुमार दिवाकर चर्चा में हैं। उन्होंने केवल चार महीनों में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। उनकी सजा सुनाने की क्रियाविधि ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ सिद्धांत पर सवाल उठाए हैं। दिवाकर का यह अनोखा रिकॉर्ड समाज में कई बहसों का कारण बन रहा है।

मौत की सजा के मामलों में तेजी

मुजफ्फरनगर जिले में कार्यरत जस्टिस दिवाकर ने अप्रैल से अब तक 10 जघन्य मामलों में 22 दोषियों को मृत्यु दंड सुनाया है। उनका यह रिकॉर्ड पिछले कई वर्षों में सबसे तेज है। बरेली में तैनाती के दौरान उन्होंने और भी मामलों में सख्त फैसले दिए हैं, जिससे उनकी कुल संख्या 35 पहुँच गयी है।

घटना का विवरण

उनकी सजा सुनाने के सिलसिले की शुरुआत 6 अप्रैल को हुई, जब उन्होंने तीन दोषियों को एक वकील की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई। इसके बाद, एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या में चार दोषियों को सजा दी गयी। हर महीने में विभिन्न मामलों में दिया गया यह दंड जज दिवाकर के कठोर फैसलों की गवाही देता है।

जज के पिछले निर्णय

जस्टिस रवि कुमार दिवाकर ने पहले भी कड़े निर्णय लिए हैं। बरेली में पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने 2014 में एक ट्रिपल मर्डर के मामले में गैंग के आठ सदस्यों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, हाईवे डकैती के दौरान हत्या के मामले में भी उन्होंने मौत की सजा दी है।

‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ सिद्धांत पर सवाल

बहुत सी मौत की सजाओं के कारण, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सभी मामलों में ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ सिद्धांत का सही ढंग से पालन किया जा रहा है। इस सिद्धांत के अनुसार, केवल अत्यंत गंभीर मामलों में ही मृत्यु दंड दिया जा सकता है।

ज्ञानवापी विवाद में विवादास्पद भूमिका

जस्टिस दिवाकर का नाम तब सुर्खियों में आया जब उन्होंने 2022 में वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया। यह मामला हिंदू महिलाओं की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने वहां पूजा की अनुमति मांगी थी। सर्वे के दौरान मिली आकृति ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम किया।

धमकियों का सामना

ज्ञानवापी मामले के बाद जस्टिस दिवाकर को धमकियों का सामना करना पड़ा था। उन्हें इस्लामिक आगाज मूवमेंट से धमकी भरा पत्र मिला, जिसके बाद उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया। इस तरह के गंभीर मामलों के बीच, जज दिवाकर ने हमेशा अपने अधिकारों का पालन किया है।

जज की सेवा की कहानी

जस्टिस दिवाकर ने आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और चित्रकूट जैसे शहरों में काम किया है। उन्होंने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में पदभार संभाला और तब से कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। उनका कड़ा रुख आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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