सोने का हॉलमार्किंग सेंटर खोलने पर सरकार देगी 75% मदद! जानें खर्च और कमाई

The CSR Journal Magazine
भारत सरकार ने ज्वैलरी की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए देशभर में सोने पर हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण सोने की खरीदारी में मदद करेगा। अब, हॉलमार्किंग सेंटर खोलने वालों को सरकार से वित्तीय सहायता मिलने जा रही है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने गोल्ड अस्सेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर (AHC) खोलने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) मांगा है। यह योजना 2026 से 2031 तक लागू रहेगी।

सरकार की सहायता की योजना

BIS के अनुसार, ऐसे जिलों में जहां पहले से कोई हॉलमार्किंग सेंटर नहीं है, वहां सेंटर खोलने पर सहायता दी जाएगी। सामान्य क्षेत्रों में निजी सेंटर खोलने पर मशीनरी लागत का 30% और PSU को 50% सहायता मिलेगी। वहीं, पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में निजी सेंटर को 50% और PSU को 75% सहायता मिलेगी। यह योजना उन लोगों के लिए है, जिनका ज्वेलरी कारोबार या मैन्युफैक्चरिंग से कोई संबंध नहीं है।

आवेदन प्रक्रिया और शुल्क

हॉलमार्किंग सेंटर खोलने के लिए आवेदन शुल्क 5,000 रुपये है। इसके साथ ही 5,000 रुपये प्रति मैन डे के हिसाब से आकलन शुल्क भी देना होगा। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में 3 साल के लिए मान्यता शुल्क 60 हजार रुपये है, जबकि छोटे शहरों में यह 40 हजार रुपये है। आवेदन करने के लिए 1,000 रुपये + GST प्रोसेसिंग फीस भी देनी होगी। EOI की अंतिम तारीख 18 नवंबर 2026 है।

सेंटर खोलने का खर्च

हॉलमार्किंग सेंटर खोलने के लिए कई प्रकार की मशीनों की आवश्यकता होती है। XRF गोल्ड टेस्टिंग मशीन की कीमत 15 से 30 लाख रुपये तक होती है। इसके अलावा, लेजर मार्किंग मशीन की कीमत 5 से 8 लाख रुपये, इलेक्ट्रॉनिक बैलेंस मशीन की कीमत 2 से 3 लाख रुपये, और लैब इंटीरियर्स, वेंटिलेशन और बिजली बैकअप पर 5 से 7 लाख रुपये खर्च होते हैं। सुरक्षा, कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर पर 2 से 3 लाख रुपये का खर्च आता है। कुल मिलाकर, सेंटर खोलने में लगभग 40 से 70 लाख रुपये का खर्च आएगा।

कमाई का अनुमान

BIS ने 14 सितंबर 2026 को हॉलमार्किंग सेंटर से जुड़े नियमों में बदलाव किया था। इसके तहत, सोने की एक ज्वैलरी पर हॉलमार्क लगाने के लिए ज्वैलर्स को 75 रुपये देने होते हैं, जबकि BIS इन सेंटरों से केवल 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल लेता है। अगर एक सेंटर पर प्रतिदिन 100 ज्वैलरी आती हैं, तो कुल कमाई लगभग 7,500 रुपये होगी। महीने में यह कमाई करीब 1.95 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। इस योजना के तहत, सरकार ने हॉलमार्किंग सेंटर खोलने के लिए एक नई दिशा दी है। इससे न केवल ज्वेलर्स को मदद मिलेगी, बल्कि ग्राहकों को भी गुणवत्तापूर्ण सोने की खरीदारी में सहायता मिलेगी। यह कदम भारतीय ज्वैलरी उद्योग को एक नई पहचान देने में सहायक साबित होगा।

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