कौशांबी में मतदान केंद्र पर BJP नेता और पुलिस के बीच हंगामा

The CSR Journal Magazine

बीजेपी जिलाध्यक्ष का आरोप, सपा के एजेंट की तरह काम कर रहे पुलिसकर्मी

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन के मतदान के दौरान एक विवाद ने तूल पकड़ लिया। नेवादा ब्लॉक स्थित मतदान केंद्र पर बीजेपी के जिला अध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) की गाड़ियों को देखकर विरोध जताया। उनका कहना था कि मतदान केंद्र के पास सपा का बस्ता लगा था, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। इस दौरान उनकी ड्यूटी पर तैनात एक दारोगा से उनकी तीखी नोकझोंक हुई।

गाड़ियों की मौजूदगी से बढ़ा विवाद

धर्मराज मौर्य ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के पास एक टवेरा गाड़ी, जिस पर एमएलसी प्रत्याशी मान सिंह यादव का पोस्टर लगा था, बिना किसी रोक-टोक के परिसर में प्रवेश कर गई। उन्होंने पुलिसकर्मियों से इस गाड़ी के प्रवेश का कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि संबंधित पुलिसकर्मी ड्यूटी पर हैं। इसके बाद मौर्य ने संबंधित अधिकारी को बुलाने की कोशिश की। इसी बीच, उन्होंने एक काली स्कॉर्पियो भी देखी, जिस पर सपा का झंडा लगा हुआ था।

पुलिस पर पक्षपात का आरोप

बीजेपी जिलाध्यक्ष ने कहा कि जब उनके कार्यकर्ता मतदान केंद्र से 200 मीटर दूर काम कर रहे थे, तो दूसरी पार्टी की गाड़ियों को कैसे अंदर आने दिया गया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (SP) को फोन कर दारोगा को वहां से हटाने और गाड़ी सीज करने की मांग की। मौर्य ने कहा कि ड्यूटी के दौरान किसी एक पार्टी के एजेंट की तरह व्यवहार नहीं होना चाहिए। इस दौरान उनके और पुलिसकर्मी के बीच तीखी बहस हुई।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवाद

इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे मामला और भी गर्मा गया है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। धर्मराज मौर्य ने कहा कि पुलिसकर्मी ने सपा के पक्ष में काम किया है, जो कि लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

जातिसूचक शब्दों का आरोप

विवाद में नया मोड़ तब आया जब समाजवादी पार्टी के एजेंट जितेंद्र सरोज ने धर्मराज मौर्य पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इस आरोप के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। मौर्य ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने जितेंद्र सरोज से कोई बातचीत नहीं की थी।

विवाद की गहराई और जांच की आवश्यकता

हालांकि, दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मतदान केंद्र पर गाड़ियों की मौजूदगी और पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। आरोपों की पुष्टि और विवाद के सभी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए पूरी घटना की जांच आवश्यक है।

मतदान प्रक्रिया पर असर

इस प्रकार के विवाद मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। लोकतंत्र में निष्पक्षता और पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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