मुंबई एयरपोर्ट टर्मिनल-1 के नॉर्थ सेक्शन से शुरू होगा पुनर्विकास; घरेलू उड़ानें T2 और अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा नवी मुंबई एयरपोर्ट की ओर किया जाएगा शिफ्ट
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) में अब एक बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) ने टर्मिनल-1 (T1) के पुनर्विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 15 जनवरी 2027 से टर्मिनल-1बी के नॉर्थ सेक्शन को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही मुंबई की हवाई यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि T1 से संचालित होने वाली कई उड़ानों को टर्मिनल-2 (T2) तथा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NMIA) की ओर स्थानांतरित किया जा रहा है। यह केवल किसी पुराने भवन को गिराने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मुंबई महानगर क्षेत्र की भविष्य की विमानन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही एक व्यापक एयरपोर्ट पुनर्विकास रणनीति का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में मुंबई के दो प्रमुख एयरपोर्ट—CSMIA और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा—मिलकर बढ़ते हवाई यातायात का बोझ संभालेंगे।
पहले चरण में T1-B का नॉर्थ सेक्शन हटेगा
ताजा योजना के अनुसार, पुनर्विकास के पहले चरण में पूरे T1 को एक साथ बंद करने के बजाय टर्मिनल-1बी के उत्तरी हिस्से पर काम शुरू किया जाएगा। MIAL ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को बताया है कि चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाने का उद्देश्य एयरलाइंस के संचालन और यात्रियों की सुविधा पर न्यूनतम प्रभाव डालना है। पहले चरण में जिस हिस्से का पुनर्विकास किया जाएगा, वह लगभग 50 लाख यात्रियों प्रति वर्ष (5 MPPA) के ट्रैफिक से संबंधित है। एयरपोर्ट प्रबंधन की रणनीति यह है कि उड़ानों और यात्रियों को एक ही समय में पूरी तरह प्रभावित करने के बजाय धीरे-धीरे एयर ट्रैफिक को दूसरे टर्मिनलों और नवी मुंबई एयरपोर्ट की ओर स्थानांतरित किया जाए।
अक्टूबर 2026 से शुरू होगा उड़ानों का बड़ा बदलाव
T1 के ध्वस्तीकरण से पहले ही मुंबई की हवाई उड़ान व्यवस्था में चरणबद्ध बदलाव शुरू किया जा रहा है। योजना के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात का कम से कम एक-तिहाई हिस्सा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जानी है। इसके बाद 25 अक्टूबर 2026 से T1 के कम से कम एक-तिहाई एयर ट्रैफिक मूवमेंट को T2 में स्थानांतरित करने की योजना है। इस तरह जनवरी 2027 में ध्वस्तीकरण शुरू होने से पहले एयरलाइंस और यात्रियों को नई व्यवस्था के अनुरूप ढलने का समय दिया जाएगा। यह बदलाव मुंबई की विमानन व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि T1 के पुनर्विकास के दौरान भी शहर की हवाई कनेक्टिविटी को बनाए रखना जरूरी होगा।
अकासा एयर ने पहले ही बदला अपना टर्मिनल
पुनर्विकास योजना के तहत एयरलाइंस का परिचालन धीरे-धीरे बदला जा रहा है। इस प्रक्रिया में अकासा एयर अपनी घरेलू उड़ानों का संचालन 1 अगस्त 2026 से T1 से T2 में स्थानांतरित कर चुकी है। MIAL अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के साथ भी समन्वय कर रहा है, ताकि कुछ उड़ानों को T1 से T2 और T2 से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर स्थानांतरित किया जा सके। यात्रियों के लिए इसका सीधा अर्थ यह है कि आने वाले महीनों में केवल एयरलाइन का नाम देखकर एयरपोर्ट पहुंचना पर्याप्त नहीं होगा। यात्रा से पहले यह जांचना जरूरी होगा कि उड़ान किस एयरपोर्ट और किस टर्मिनल से संचालित हो रही है।
करीब 80 साल पुराना है T1
मुंबई एयरपोर्ट का टर्मिनल-1 शहर के विमानन इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। T1 परिसर के कुछ हिस्से काफी पुराने हैं और पूरे टर्मिनल ढांचे के विभिन्न भागों की उम्र अलग-अलग है। आधिकारिक और नियामकीय दस्तावेजों में पुराने ढांचे की संरचनात्मक स्थिति, क्षमता सीमाओं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। एयरपोर्ट के मौजूदा ढांचे को आधुनिक विमानन जरूरतों के अनुसार अपग्रेड करने में कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आई हैं। नियामकीय दस्तावेजों के अनुसार, T1 के कुछ पुराने हिस्सों में संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता बताई गई थी, जबकि मौजूदा डिजाइन में यात्री प्रवाह और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी चुनौतियां मौजूद थीं। इन्हीं कारणों से व्यापक पुनर्निर्माण की योजना तैयार की गई।
मुंबई का बढ़ता एयर ट्रैफिक बना बड़ी चुनौती
मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता 5 करोड़ से अधिक यात्रियों की है और यहां प्रतिदिन 950 से अधिक उड़ान गतिविधियां दर्ज की जाती हैं। वर्तमान में T1 और T2 मिलकर मुंबई के विशाल एयर ट्रैफिक को संभालते हैं। T1 की क्षमता लगभग 1.5 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष और T2 की क्षमता करीब 4 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष बताई गई है। ऐसे में T1 के पुनर्विकास के दौरान उसकी क्षमता में आने वाली कमी को संभालना एयरपोर्ट प्रशासन के लिए एक बड़ी परिचालन चुनौती होगी। यही कारण है कि नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को मुंबई की भविष्य की एयर कनेक्टिविटी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है।
नवी मुंबई एयरपोर्ट बनेगा राहत का बड़ा केंद्र
T1 के पुनर्विकास के दौरान नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मुंबई महानगर क्षेत्र की विमानन व्यवस्था का एक प्रमुख सहारा बनने जा रहा है। एयर ट्रैफिक का एक हिस्सा नवी मुंबई की ओर भेजकर मुंबई के मुख्य एयरपोर्ट पर दबाव कम करने की योजना है। इस नई व्यवस्था के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र में यात्रियों को यात्रा से पहले यह विशेष रूप से देखना होगा कि उनकी फ्लाइट:
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मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से है,
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T1 से है या T2 से,
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अथवा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संचालित हो रही है।
एयरपोर्ट बदलने की स्थिति में यात्रियों को शहर के ट्रैफिक, यात्रा समय और एयरपोर्ट तक पहुंचने की योजना भी पहले से बनानी पड़ सकती है।
नया T1 होगा ज्यादा आधुनिक और बड़ी क्षमता वाला
पहले घोषित पुनर्विकास विजन के अनुसार, नया टर्मिनल-1 आधुनिक तकनीक, बेहतर यात्री सुविधाओं, डिजिटल सेवाओं और टिकाऊ बुनियादी ढांचे पर केंद्रित होगा। प्रस्तावित आधुनिक T1 की क्षमता करीब 2 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा क्षमता की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एयरपोर्ट ऑपरेटर के अनुसार, नए टर्मिनल का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि विमानन संचालन पूरी तरह बाधित न हो। प्रस्तावित टर्मिनल में आधुनिक डिजाइन, डिजिटल सुविधाएं और बेहतर यात्री अनुभव पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
क्यों जरूरी है चरणबद्ध ध्वस्तीकरण?
मुंबई जैसे अत्यधिक व्यस्त एयरपोर्ट पर किसी टर्मिनल को पूरी तरह बंद करके निर्माण कार्य करना आसान नहीं है। हर दिन सैकड़ों उड़ानें और हजारों यात्री एयरपोर्ट से गुजरते हैं। इसलिए पूरे T1 को एक साथ बंद करने के बजाय चरणबद्ध रणनीति अपनाई गई है। इस व्यवस्था के तहत:
पहला, एयरलाइंस को अपनी उड़ानों का नया शेड्यूल और टर्मिनल तय करने का समय मिलेगा।
दूसरा, यात्रियों को नई व्यवस्था की जानकारी दी जा सकेगी।
तीसरा, T2 और नवी मुंबई एयरपोर्ट के बीच यातायात का संतुलन बनाया जा सकेगा।
चौथा, ध्वस्तीकरण और निर्माण के दौरान मुंबई की हवाई कनेक्टिविटी को जारी रखा जा सकेगा।
MIAL ने इस संक्रमण प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से प्रमुख हितधारकों के समन्वय हेतु जॉइंट ट्रांजिशन ग्रुप (JTG) बनाने पर भी विचार करने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव के अनुसार, इस समूह का नेतृत्व नागरिक उड्डयन सचिव के स्तर पर किया जा सकता है, ताकि एयरलाइंस, एयरपोर्ट ऑपरेटर और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो।
यात्रियों के लिए क्या बदलने वाला है?
मुंबई और आसपास के यात्रियों के लिए आने वाले महीनों में सबसे बड़ा बदलाव फ्लाइट के प्रस्थान स्थान को लेकर होगा। पहले जहां अधिकांश यात्री अपनी एयरलाइन के आधार पर T1 या T2 की जानकारी रखते थे, अब उन्हें यह भी जांचना होगा कि उनकी फ्लाइट कहीं नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से तो नहीं संचालित हो रही। यात्रियों को सलाह दी जाएगी कि वे यात्रा से पहले:
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एयरलाइन से अपना टर्मिनल कन्फर्म करें,
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एयरपोर्ट का नाम ध्यान से जांचें,
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फ्लाइट टिकट और एयरलाइन के नवीनतम अपडेट देखें,
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एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय रखें,
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टर्मिनल या एयरपोर्ट परिवर्तन की स्थिति में यात्रा योजना पहले से तैयार करें।
विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा जो मुंबई एयरपोर्ट के पुराने परिचालन पैटर्न के आदी हैं।
मुंबई की ‘वन एयरपोर्ट सिटी’ व्यवस्था से आगे का नया दौर
T1 पुनर्विकास और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बढ़ती भूमिका मुंबई महानगर क्षेत्र के विमानन ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। लंबे समय तक छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मुंबई के हवाई यातायात का मुख्य केंद्र रहा है, लेकिन भविष्य में मुंबई क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए दो बड़े एयरपोर्ट मिलकर काम करेंगे। एक ओर CSMIA का T1 आधुनिक रूप में विकसित किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र के बढ़ते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
15 जनवरी 2027 से शुरू होगा नया अध्याय
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 जनवरी 2027 से T1-B के नॉर्थ सेक्शन के ध्वस्तीकरण की शुरुआत करने की योजना है। इसे पूरे T1 के एक साथ ध्वस्तीकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि वर्तमान योजना के अनुसार काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।अक्टूबर 2026 से उड़ानों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जनवरी 2027 में वास्तविक ध्वस्तीकरण चरण शुरू होगा। एयरलाइंस को संक्रमण के लिए लगभग साढ़े तीन महीने की सहायता और समन्वय अवधि देने की योजना बताई गई है।
मुंबई महानगर का भविष्य
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का पुनर्विकास केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि मुंबई महानगर की भविष्य की हवाई यात्रा व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया है। पुराने T1 को आधुनिक और अधिक क्षमता वाले टर्मिनल में बदलने के साथ-साथ नवी मुंबई एयरपोर्ट को सक्रिय रूप से विमानन नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है। आने वाले महीनों में मुंबई के यात्रियों को टर्मिनल और एयरपोर्ट परिवर्तन के कारण नई व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाना होगा। लेकिन लंबे समय में इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ते यात्री दबाव को कम करना, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और मुंबई महानगर क्षेत्र को अधिक मजबूत विमानन ढांचा देना है। 15 जनवरी 2027 मुंबई एयरपोर्ट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख हो सकती है—जब टर्मिनल-1 के पुराने ढांचे के एक हिस्से को हटाकर एक नए, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में अगला कदम बढ़ाया जाएगा।
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