PM Modi युग में भाजपा: 12 साल में कितनी बदली पार्टी? कैसे चुनाव-दर-चुनाव बढ़ता रहा ग्राफ

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन के 75 साल की यात्रा पूरी की है। गुजरात के साधारण परिवार में जन्मे मोदी ने केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार पदभार संभाला है। 1987 में अहमदाबाद नगर निगम के चुनाव में जीत के साथ शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर आज ‘मोदी युग’ का प्रतीक बन चुका है। मोदी ने राजनीतिक अनुभव से सियासत के पूरे रंग-ढंग को बदलकर रख दिया है।

जातीय पैटर्न को तोड़ने वाली सियासत

मोदी की सियासी रणनीति में पारंपरिक राजनीति से हटकर एक अलग लकीर खींचने पर जोर है। उन्होंने बूथ कार्यकर्ता से लेकर प्रधानमंत्री तक की अपनी यात्रा में जो अनुभव लिया, वह भाजपा के लिए एक ट्रंप कार्ड साबित हुआ। गुजरात के सीएम रहते हुए मोदी ने अपनी मजबूत राजनीतिक जड़ों को इस कदर जमाया कि कांग्रेस के लिए फिर से खड़ा होना मुश्किल हो गया।

विकास और जनकल्याण का आक्रामक एजेंडा

नरेंद्र मोदी ने विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को अपनी सियासत का मुख्य केंद्र बनाया। इसके माध्यम से उन्होंने कास्ट पॉलिटिक्स का सामना किया और दलित, ओबीसी समुदायों को अपने साथ जोड़ा। यह सब करते हुए भाजपा ने जातीय राजनीति के पुराने ढर्रे को ध्वस्त किया। मोदी के नेतृत्व में भाजपा अब सिर्फ सवर्णों की पार्टी नहीं रह गई, बल्कि ओबीसी और दलितों में भी गहरी पैठ बना ली है।

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का नया दृष्टिकोण

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे को और भी मजबूती मिली। अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन और अनुच्छेद 370 का हटना जैसे फैसले इस नए दृष्टिकोण के उदाहरण रहे हैं। मोदी सरकार ने राष्ट्रवादी सोच को केवल राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश की सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा।

भाजपा का भौगोलिक और संगठनात्मक विस्तार

पिछले 12 वर्षों में भाजपा ने अपना भौगोलिक विस्तार तेजी से किया है। 2014 में जब भाजपा सत्ता में आई, तब उसके पास केवल कुछ राज्यों में ही सरकारें थीं। लेकिन अब पार्टी ने देश के कई हिस्सों में अपनी मजबूत उपस्थिति स्थापित कर ली है। उत्तर और पश्चिम भारत से शुरू होकर, अब पार्टी दक्षिण और पूर्वोत्तर में भी अपनी सरकारें बना चुकी है।

नई चुनावी रणनीतियों का प्रभाव

मोदी ने चुनाव प्रचार में हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया। 3D होलोग्राम कैंपेन ने नई पहचान बनाई। इससे न सिर्फ राजनीतिक आमदनी में वृद्धि हुई, बल्कि इससे पार्टी की पहुंच भी विकसित हुई। नरेंद्र मोदी ने जातीय आधार पर पार्टी के फैक्टर को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के दृष्टिकोण से एकजुट कर दिया।

विपक्ष की रणनीति में बदलाव

मोदी के सियासी ढर्रे ने विपक्ष को भी अपनी रणनीतियों में फेरबदल करने के लिए मजबूर किया है। हार के बाद राहुल गांधी ने जनता के बीच जाकर अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश की है, जिससे राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे जा रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों को भी अपनी राजनीतिक शैली में बदलाव करना पड़ा।

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