विकसित भारत संकल्प सभा: PM मोदी का उत्साहजनक संबोधन, विरोधियों से मिली सीख
देश की राजधानी में आयोजित ऐतिहासिक ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के एक बेहद महत्वपूर्ण मील के पत्थर को छूते हुए देशवासियों को संबोधित किया। शासन प्रमुख (गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री) के रूप में 25 वर्ष के निरंतर सेवा काल को पूरा करने के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम (सेवा ज्योति अभियान) में पीएम मोदी भावुक भी हुए और बेहद मुखर भी। उन्होंने अपने विरोधियों और आलोचकों पर खुलकर बात करते हुए एक ऐसा बयान दिया, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़ी मिसाल बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरे आलोचकों से लेकर मेरा विरोध करने वालों तक… सबने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। जिन लोगों ने सार्वजनिक जीवन में मेरा सबसे तीखा विरोध किया, उन्होंने ही मुझे वास्तव में लोकतंत्र की असली ताकत और उसकी गहराइयों को समझने में मदद की है।” इस भव्य समारोह में केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों और देश के कोने-कोने से आए हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया।
विरोधियों ने सिखाया लोकतंत्र का पाठ: पीएम मोदी
अपने 25 वर्षों के सार्वजनिक सेवा काल के अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उनके मन में केवल और केवल कृतज्ञता (आभार) का भाव उभरता है। उन्होंने कहा, “मैं हर उस व्यक्ति और हर उस घटना का आभारी हूँ जिसने मुझे जीवन में कुछ न कुछ सिखाया है। अक्सर लोग आलोचकों से दूर भागते हैं, लेकिन मेरी यात्रा में आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों का एक बड़ा योगदान रहा है।” पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र केवल सहमति का नाम नहीं है, बल्कि इसमें असहमति और विरोध का भी उतना ही सम्मान होना चाहिए। विरोध करने वालों ने उनके भीतर की कार्यक्षमता और संकल्प को और मजबूत किया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन की जो भी पूंजी या अनुभव है, वह उनका व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि वह पूरी तरह से इस राष्ट्र और यहाँ की 140 करोड़ जनता की अमानत है।
‘आज भी खुद को एक विद्यार्थी मानता हूँ’
राजनीति और शासन के शीर्ष शिखर पर 25 साल से अधिक का समय बिताने के बाद भी प्रधानमंत्री ने अपनी सादगी का परिचय दिया। उन्होंने सभा में मौजूद जनसमूह से कहा, “इतने वर्षों तक सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने के बाद भी, आज भी मैं खुद को एक विद्यार्थी ही मानता हूँ।” उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में हर दिन, हर गाँव और हर नागरिक से कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है। यही निरंतर सीखने की ललक उन्हें देश के गरीब, वंचित और शोषित वर्गों के लिए बिना थके काम करने की ऊर्जा देती है।
विकसित भारत @2047: ‘हम यह करके रहेंगे’
इस संकल्प सभा का मुख्य केंद्र बिंदु वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना था। प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत संकल्प’ को दोहराते हुए मंच से हुंकार भरी और कहा, “हम यह करके रहेंगे, हम यह करके रहेंगे” (We will do it, we will do it)।
उन्होंने देश के नीति निर्माताओं, युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकार की योजनाओं से नहीं, बल्कि ‘सबके प्रयास’ से ही संभव होगा।
• युवाओं की भूमिका: पीएम मोदी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी विकसित भारत की निर्माता भी है और इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी भी होने वाली है। इसलिए युवाओं को देश की बारीकियों को समझना होगा और विकास की इस यात्रा की पूरी ओनरशिप (स्वामित्व) अपने हाथों में लेनी होगी।
• दीर्घकालिक दृष्टिकोण: रिपब्लिक समिट और इस संकल्प सभा के साझा संदर्भों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार केवल अगले चुनाव या कुछ वर्षों को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनाती। आज भारत जो बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और नीतियां तैयार कर रहा है, वे आने वाले 1000 वर्षों के भारत की मजबूत नींव रख रही हैं।
सुशासन और अंत्योदय के सफल वर्ष
इस सम्मेलन के दौरान उपस्थित वक्ताओं और भाजपा पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार के सफल वर्षों की उपलब्धियों का भी ब्योरा दिया। नेताओं ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत ने अपनी विदेश नीति और आंतरिक नीतियों में केवल ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है।
‘लाचारी से आत्मनिर्भरता तक का सफर’
संकल्प सभा में प्रधानमंत्री ने अतीत की राजनीतिक व्यवस्थाओं पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश को ‘चलता है’ वाली लाचारी और हीन भावना के गर्त में धकेल दिया गया था, जहां यह मान लिया गया था कि भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है। लेकिन आज देश का मिजाज बदल चुका है। अब भारत ‘बदल सकता है’ और ‘हम करके रहेंगे’ के आत्मविश्वास से लबरेज है। कोरोना महामारी के संकटकाल से लेकर वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों (जैसे मध्य पूर्व संकट) के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस तेजी से वापसी की है, उसने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों को चौंकाया है। भारत अब किसी बाहरी दबाव या दूसरे देशों के विचारों के आधार पर नहीं, बल्कि अपने स्वयं के ‘आत्मनिर्भर संकल्प’ के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
पीएम मोदी के 25 वर्षों के सफर की मुख्य घटनाएं (2001 – 2026)
प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकारी प्रमुख (Executive Head) के रूप में यह सफर 7 अक्टूबर 2001 को शुरू हुआ था, जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस यात्रा के मुख्य मील के पत्थर निम्नलिखित हैं:
गुजरात का कार्यकाल (2001 – 2014) — मुख्यमंत्री के रूप में 3 कार्यकाल
• 2001 (संकट में कमान): विनाशकारी भुज भूकंप और सूखे की मार झेल रहे गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला। पुनर्निर्माण, जल प्रबंधन और ‘सुजलाम सुफलाम’ जैसी सिंचाई योजनाओं से राज्य को उबारा।
• 2003 (वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत): गुजरात को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने के लिए ‘Vibrant Gujarat Summit’ की शुरुआत की, जिसने आगे चलकर देश में औद्योगिक क्रांति का ‘गुजरात मॉडल’ स्थापित किया।
• 2006 (ज्योतिग्राम योजना): ग्रामीण गुजरात में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने वाली ऐतिहासिक ‘ज्योतिग्राम योजना’ लागू की, जो बाद में राष्ट्रीय बिजली सुधारों का आधार बनी।
• 2010 (डिजिटल शिकायत निवारण – SWAGAT): नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए ऑनलाइन ‘स्वागत’ (SWAGAT) पोर्टल बनाया, जिसे संयुक्त राष्ट्र (UN) लोक सेवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
• 2012 (लगातार तीसरी जीत): गुजरात विधानसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार भारी बहुमत से जीत दर्ज कर अपनी सुशासन नीति (Politics of Performance) पर जनता की मुहर लगवाई।
दिल्ली का सफर (2014 – 2026+) — प्रधानमंत्री के रूप में 3 ऐतिहासिक कार्यकाल
• 2014 (ऐतिहासिक जनादेश): भाजपा के पीएम उम्मीदवार के रूप में पूरे देश में प्रचंड लहर का नेतृत्व किया और 30 साल बाद केंद्र में पूर्ण बहुमत की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।
• 2014-2016 (अंत्योदय और बड़े आर्थिक सुधार): देश के हर गरीब को बैंकिंग से जोड़ने के लिए ‘जन धन योजना’ और वित्तीय पारदर्शिता के लिए ‘विमुद्रीकरण’ (Demonetisation) जैसे कड़े कदम उठाए।
• 2017-2019 (वन नेशन, वन टैक्स और आंतरिक सुरक्षा): दशकों से लंबित GST (वस्तु एवं सेवा कर) को लागू किया। साथ ही, उरी और पुलवामा हमलों के बाद सर्जिकल व एयर स्ट्राइक कर भारत की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया।
• 2019 (दूसरी बार प्रचंड बहुमत): पहले से भी बड़ी जीत (303 सीटें) के साथ दोबारा प्रधानमंत्री बने। इसके तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का खात्मा और अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
• 2020-2022 (कोरोना संकट व आत्मनिर्भर भारत): महामारी के दौर में देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और भारत में निर्मित ‘मेड इन इंडिया’ टीकों (Vaccines) के माध्यम से देश को सुरक्षित निकाला। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की घोषणा की।
• 2023 (वैश्विक पटल पर भारत): भारत की अध्यक्षता में G20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ, जिसने वैश्विक कूटनीति में भारत को ‘विश्वमित्र’ के रूप में स्थापित किया। इसी वर्ष चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग हुई।
• 2024 (लगातार तीसरा कार्यकाल): देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन राष्ट्रीय चुनाव जीतने वाले देश के दूसरे नेता बने।
• 2026 (25 वर्षों का अटूट कीर्तिमान): 7 अक्टूबर 2026 को लोकतांत्रिक इतिहास में बिना रुके, बिना थके देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले गैर-कांग्रेसी निर्वाचित प्रमुख के रूप में 25 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।
सेवा और संकल्प का नया अध्याय
नई दिल्ली में संपन्न हुई यह ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ केवल प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक सेवा काल का जश्न नहीं थी, बल्कि यह आगामी दो दशकों के लिए देश का रोडमैप तैयार करने वाली हुंकार थी। प्रधानमंत्री मोदी का अपने आलोचकों और विरोधियों के प्रति यह सम्मानजनक और सकारात्मक दृष्टिकोण यह दिखाता है कि एक मजबूत नेता लोकतांत्रिक आलोचनाओं को अपनी ताकत में कैसे बदल सकता है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के इसी मूल मंत्र के साथ देश अब वर्ष 2047 के स्वर्णिम लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा चुका है।
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