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March 12, 2026

खामेनेई की मौत के बाद दिल्ली में ईरानी दूतावास बना कश्मीरी सियासत का केंद्र

The CSR Journal Magazine
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद जम्मू कश्मीर के लोग गम में डूब गए हैं। घाटी में कई स्थानों पर शोक सभा और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। कश्मीर के कई प्रमुख नेता, जैसे पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती, दिल्ली में ईरान दूतावास पहुंचकर शोक व्यक्त करने लगे हैं। इस तरह के घटनाक्रम को देख कर कहा जा सकता है कि ईरानी दूतावास अब कश्मीरी सियासत का नया केंद्र बन गया है। खामेनेई के निधन पर गहरा दुख प्रकट करने के लिए कश्मीरी लोग एकजुट हो रहे हैं।

राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र

पिछले कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई प्रमुख नेताओं ने दिल्ली में ईरानी मिशन से मुलाकात की है। इन नेताओं ने शोक पुस्तिका पर साइन किए और अपने इलाकों की ओर से खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। ईरानी डिप्लोमैट्स के साथ उनकी बातचीत में उन क्षेत्रों में ईरान के प्रति भावनात्मक और राजनीतिक संबंधों की झलक मिली। इन नेताओं ने ईरान के लोगों के प्रति एकजुटता दिखाई और आगे की रणनीतियों पर चर्चा की।

फारूक अब्दुल्ला की संवेदनाएं

सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने ईरानी एम्बेसी विजिट किया। उन्होंने शोक पुस्तिका पर साइन करते हुए जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाएं व्यक्त कीं। इस मौके पर उनके साथ अन्य नेता भी थे। उन्होंने भारत में ईरान के उप राजदूत से मुलाकात भी की, जिससे यह सिद्ध होता है कि वास्तव में कश्मीरी नेता ईरानी लोगों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करना चाहते हैं।

महबूबा मुफ्ती ने उठाया मुद्दा

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी इस मौके का लाभ उठाते हुए ईरानी दूतावास का दौरा किया। उन्होंने खामेनेई के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कश्मीरी छात्रों का मुद्दा उठाया, जो ईरान में फंसे हुए हैं। महबूबा ने राजदूत से मदद मांगी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी पार्टी भी इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

कश्मीर में विरोध प्रदर्शन

ईरानी नेता की हत्या के खिलाफ जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। श्रीनगर, बडगाम और बांदीपोरा जैसे कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई की तस्वीरें लेकर नारे लगाए। सुरक्षाबलों ने कुछ जगहों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। राजनीतिक नेताओं ने संयम बरतने की अपील की और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की।

कश्मीर का ईरान से गहरा संबंध

ईरान पिछले कुछ सालों में जम्मू और कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल बन गया है, खासकर मेडिकल और धार्मिक पढ़ाई के लिए। कई परिवार उस चिंता में हैं जिनके बच्चे ईरान में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, खामेनेई का कश्मीर दौरा भी धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कश्मीरी नेताओं का यह सक्रियता आगे किस दिशा में जाती है।
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