Kanpur: पहले बड़ा बेटा चला गया, फिर छोटा, अब तीसरा भी नहीं रहा: पिता पर ऐसे टूटा दुख का पहाड़

The CSR Journal Magazine
कानपुर के राज बहादुर सिंह की जिंदगी में जैसे दुख ने दरवाजा खोला हो। उम्र करीब 70 साल है और इस समय पिता को अपने बेटों से सहारे की उम्मीद होती है। लेकिन उनके चार बेटों में से एक एक करके चले गए हैं। संदीप सिंह की मौत ने इस बुजुर्ग पिता को अंदर से तोड़ दिया है। अब परिवार में सिर्फ एक बेटा विक्रम सिंह रह गया है। संदीप सरकारी डॉक्टर थे और अपने इलाज के लिए परिवार में एक उम्मीद बनकर जी रहे थे।
रविवार की रात संदीप और उनकी पत्नी कंचन सिंह के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इस विवाद के बाद संदीप ने अपने जीवन को समाप्त कर लिया। यह घटना कानपुर के साकेत नगर में हुई, जहां वह अपनी पत्नी के साथ रहते थे। कंचन भी एक सरकारी डॉक्टर हैं और इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। संदीप की माँ और पिता ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपने बेटे को इस तरह खोना पड़ेगा।

पिता के लिए बेटे की अहमियत

पिता राज बहादुर सिंह के लिए संदीप एक उम्मीद की किरण थे। इसके पहले वह दो बेटों को खो चुके हैं। विशाल सिंह की बीमारी के चलते निधन और राहुल सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत ने पहले ही परिवार को दागदार कर दिया था। अब संदीप की मौत ने पुराने जख्मों को और गहरा कर दिया। यह सोचकर ही दिल दहल जाता है कि एक पिता ने अपने बेटों को खोया है।

परिवार की चिकित्सा सेवा में पहचान

संदीप ने सरकारी सेवा में डॉक्टर के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उनका आरंभिक पोस्टिंग मेडिकल कॉलेज कानपुर में हुई थी। इसके बाद उन्होंने कानपुर देहात में भी सेवाएं दीं। परिवार में संदीप की कमी से सिर्फ विक्रम बच गए हैं, जो अपनी उम्र का बड़ा हिस्सा अपने पिता के साथ बिताते हैं। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो समय के साथ खत्म होते जा रहा है।
संदीप और कंचन के बीच अक्सर विवाद होता था। रविवार रात को भी कुछ इसी तरह की स्थिति थी, लेकिन विवाद की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। उनके चचेरे भाई सत्येंद्र सिंह का कहना है कि परिवार को घटना के बारे में अचानक पता चला। यह सुनकर सभी लोग सदमे में थे। संदीप की पत्नी ने जब उन्हें अस्पताल पहुंचाया, तो हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टर भी कुछ नहीं कर सके।

पुलिस जांच का मामला

डीसीपी दीपेन नाथ चौधरी के अनुसार, यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। संदीप ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिवार की ओर से कोई शिकायत न होने के कारण जांच अभी भी जारी है। इस घटना के पीछे क्या कारण थे, यह भी जांच का विषय है।

परिवार की तस्वीर में आएगा बड़ा बदलाव

संदीप की मौत ने न केवल परिवार का एक सदस्य छीन लिया, बल्कि उनके पीछे छोटे बच्चे और बुजुर्ग पिता का दुख भी बढ़ा दिया है। राज बहादुर सिंह के लिए यह समय सबसे कठिन है, क्योंकि उन्होंने पहले ही दो बेटों को खोया है और अब संदीप के रूप में तीसरी बार ऐसा दाग उनके दिल पर लगा है। यह एक दुखभरा अध्याय है जो किसी भी परिवार के लिए असहनीय है।

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