40 दिन में डील, 1 साल में डिलीवरी: इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट से बदल रही है भारतीय वायु सेना की ताकत

The CSR Journal Magazine
10 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। 16 मई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने तीनों सेनाओं को 40,000 करोड़ रुपये के इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (EP-6) की मंजूरी दी। यह एक साधारण रक्षा सौदा नहीं है, बल्कि भारतीय सेनाओं को बिना किसी देरी के जरूरी तकनीक मुहैया कराने का एक तेज रास्ता है।

इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट EP-6 की विशेषताएँ

आमतौर पर सेनाओं के लिए हथियार और उपकरण खरीदने में लंबी प्रक्रियाएँ होती हैं। लेकिन जब सीमा पर तनाव या सैन्य अभियानों में कमियाँ सामने आती हैं, तब इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट लागू किया जाता है। EP-6 के तहत कोई भी सिंगल कॉन्ट्रैक्ट 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का नहीं हो सकता। इस प्रक्रिया में हर सौदे पर 40 दिनों के भीतर हस्ताक्षर होना अनिवार्य है और 1 साल के भीतर उपकरण की डिलीवरी सुनिश्चित करनी होती है।

एयरबेस की सुरक्षा पर ध्यान, फायर फाइटिंग रोबोट की भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को भारतीय एयर डिफेंस ने नाकाम कर दिया, लेकिन यह सवाल उठता है कि यदि किसी एयरबेस या एम्यूनिशन डिपो पर हमला हो जाए तो क्या होगा? विमानों के हैंगर, ईंधन डिपो और गोला-बारूद के भंडारों में लगी एक छोटी सी आग पूरे एयरबेस को घंटों के लिए पंगु बना सकती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय वायुसेना ने अहमदाबाद स्थित स्टार्टअप एम्प्रेसा प्राइवेट लिमिटेड के फायर फाइटिंग रोबोट (FF Bot) को चुना है। यह रोबोट रक्षा मंत्रालय की iDEX योजना के तहत विकसित किया गया है।

FF Bot की खासियतें

यह रिमोट-कंट्रोल्ड मानवरहित वाहन (UGV) है, जो ऑपरेटर को सुरक्षित दूरी पर रहते हुए भीषण आग पर पानी या फोम की बौछार करने की अनुमति देता है। इसके थर्मल कैमरे घने धुएं और अंधेरे में भी आग के मुख्य केंद्र को तुरंत खोज लेते हैं। यह तकनीक एयरबेस और ईंधन भंडारों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

तीनों सेनाओं में तैनाती

इन अधिकारों का सीधा इस्तेमाल तीनों सेनाओं के वाइस चीफ करते हैं, जिससे रक्षा मंत्रालय में फाइलों का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं रहती। यह प्रणाली भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाने में मदद कर रही है। आईएनएस विक्रांत पर पहले ही 50 रोबोट्स तैनात किए जा चुके हैं। इसके अलावा, वायुसेना ने विभिन्न एयरबेस के लिए जनवरी 2026 तक 80 यूनिट्स का ऑर्डर दिया है। थल सेना ने भी गोला-बारूद डिपो के लिए 62 करोड़ रुपये में 18 रोबोट्स का अनुबंध किया है।

आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

CAG की हालिया रिपोर्ट्स में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के पुराने दौर में विदेशी वेंडर्स की ओर से देरी की बात सामने आई थी। लेकिन अब iDEX और स्वदेशी स्टार्टअप्स के जरिए खरीद प्रक्रिया को न केवल तेज किया जा रहा है, बल्कि सप्लाई चैन को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा रहा है।

युद्धक्षेत्र में नई सोच

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद की यह आपातकालीन खरीद दर्शाती है कि भारत अब सिर्फ हमले और बचाव के हथियारों पर ही नहीं, बल्कि युद्धक्षेत्र में अपने ठिकानों की तत्काल रिकवरी और सुरक्षा प्रणाली को भी ‘आत्मनिर्भर’ बना रहा है। यह भारतीय वायुसेना की ताकत को एक नई दिशा में ले जाने का प्रयास है।

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