चक्रवात अर्नब ने मचाई भारी तबाही, तटीय आंध्र में ब्लैकआउट, युद्ध स्तर पर बचाव कार्य जारी

The CSR Journal Magazine

चक्रवात ‘अर्नब’ का आंध्र प्रदेश में हाहाकार: 6,000 बिजली के खंभे उखड़े, राहत शिविरों में पहुँचे सैकड़ों लोग

बंगाल की खाड़ी से उठे अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब‘ ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चली विनाशकारी हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण राज्य का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, तटीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है, जिसमें अकेले 6,000 से अधिक बिजली के खंभे जमींदोज हो गए हैं। सरकार और जिला प्रशासनों द्वारा समय रहते की गई व्यापक तैयारियों के कारण एक बड़ी जनहानि को टाल दिया गया है, लेकिन तटीय गांवों और शहरों में बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान मिट गया है।

मौसम विभाग की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के यनम तट के बीच से गुजरा। लैंडफॉल (तट से टकराने) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह प्रणाली थोड़ी कमजोर होकर ‘भीषण चक्रवाती तूफान’ में तब्दील हो गई है। विशाखापत्तनम मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशकों ने बताया कि तूफान के बाहरी बैंड्स ने मंगलवार देर रात से ही काकीनाडा, विशाखापत्तनम और कोनासीमा जिलों में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। समुद्र में उठी कई मीटर ऊंची लहरों और तेज हवाओं ने तटीय सुरक्षा दीवारों को क्षतिग्रस्त कर दिया और पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया।

बिजली ढांचा पूरी तरह ध्वस्त, 6,000 खंभे गिरे

चक्रवात के दौरान चलीं वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी तेज हवाओं के झोंकों ने सबसे ज्यादा नुकसान राज्य के ऊर्जा विभाग को पहुँचाया है। प्रारंभिक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, तूफान प्रभावित क्षेत्रों में 6,000 से अधिक बिजली के खंभे उखड़ गए या टूट गए हैं। इसके अतिरिक्त सैकड़ों भारी-भरकम ट्रांसफार्मर, हाई-टेंशन तार और सब-स्टेशन मलबे में तब्दील हो गए हैं। इस तबाही के कारण काकीनाडा, विशाखापत्तनम और गोदावरी जिलों के सैकड़ों गांवों में ब्लैकआउट (अंधेरा) छा गया है। आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजली कंपनियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

युद्ध स्तर पर बहाली कार्य शुरू करने के लिए 6,000 से अधिक तकनीकी कर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें से 4,000 कर्मचारी पूर्वी विद्युत वितरण कंपनी (EPDCL) के हैं, जबकि 1,000-1,000 कर्मियों को दक्षिणी (SPDCL) और मध्य विद्युत वितरण कंपनियों (CPDCL) से आपातकालीन मदद के लिए बुलाया गया है। सरकार ने किसी भी बड़े हादसे को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से काट दी है और लोगों को टूटे हुए तारों को न छूने की सख्त हिदायत दी है। आपातकालीन शिकायतों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर ‘1912’ को 24 घंटे सक्रिय कर दिया गया है, जो एक साथ 30,000 कॉल्स संभालने में सक्षम है।

राहत शिविरों में उमड़ी भीड़, बड़े पैमाने पर विस्थापन

तबाही के इस मंजर के बीच प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए निचले इलाकों, फूस की झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। काकीनाडा के वकलापुडी गांव और कोनासीमा जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों से आपदा प्रबंधन टीमों ने 89,000 से अधिक नागरिकों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है। राज्य भर के विभिन्न जिलों में बनाए गए राहत शिविरों में वर्तमान में 854 से अधिक परिवारों व प्रभावित लोगों को शरण दी गई है, जहां उनके लिए भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशाखापत्तनम और काकीनाडा जिलों में कुल 2,000 से अधिक चक्रवात आश्रय स्थल (शेल्टर होम) तैयार रखे गए हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने अभी भी कुछ इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताई है।

यातायात थमा, जनजीवन पूरी तरह ठप

चक्रवात ‘अर्नब’ के आगमन से पहले ही प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए काकीनाडा और कोनासीमा जिलों में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों, बाजारों, सिनेमा हॉल और स्कूलों को पूरी तरह बंद करवा दिया था। सुरक्षा के लिहाज से दक्षिण मध्य रेलवे ने तटीय आंध्र से गुजरने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक की विशेष निगरानी की जा रही है। विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर उड़ानों के संचालन को भी रोक दिया गया है। तटीय सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ और होर्डिंग्स गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। मछुआरों को पहले ही समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गई थी और तट रेखा पर 30,000 से अधिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं को सुरक्षित रूप से बांध कर रखा गया है ताकि उन्हें बहने से बचाया जा सके।

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के प्रमुख प्रकाश जैन ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय स्थिति पर सीधे नजर रख रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की दर्जनों टीमें सड़कों को साफ करने के लिए आधुनिक कटर मशीनों के साथ तैनात हैं। प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए 1,100 से अधिक मेडिकल टीमें काम कर रही हैं ताकि जलभराव के बाद किसी महामारी को फैलने से रोका जा सके।

अन्य राज्यों में भी मौसम का रेड अलर्ट

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि चक्रवात अर्नब का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से पड़ोसी राज्य ओडिशा के गंजाम और गोपालपुर जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। इसके अलावा, मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी भारी से बहुत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में इस बेमौसम बारिश से किसानों की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। आंध्र प्रदेश सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि जब तक तूफान पूरी तरह शांत नहीं हो जाता और जलभराव की स्थिति ठीक नहीं हो जाती, तब तक वे अपने घरों या राहत शिविरों में ही सुरक्षित रहें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।

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