आंगन से बैंक खाते तक: पोषण वाटिका से महिलाओं की सेहत के साथ बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

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आंगन से बैंक खाते तक: पोषण वाटिका महिलाओं के लिए बन रही पोषण और आय का आधार, आंगन की हरियाली से आत्मनिर्भरता की राह

रसोई के आंगन में उगाई गई हरी सब्जियां केवल परिवार की थाली को पौष्टिक बनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सही योजना और बाजार से जुड़ाव के साथ ये महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बन सकती हैं। इसी विचार को राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के दौरान बढ़ावा दिया जा रहा है। सितंबर में मनाए जा रहे 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य पोषण को केवल भोजन तक सीमित रखने के बजाय परिवार, समुदाय और स्थानीय स्तर पर साझा जिम्मेदारी के रूप में मजबूत करना है। इस वर्ष पोषण माह की मुख्य थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” रखी गई है। पोषण माह 2026 का जोर विविध आहार, पर्याप्त प्रोटीन, स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों, ताजा पके भोजन तथा समुदाय की भागीदारी पर है। ऐसे में पोषण वाटिका, यानी घर या आंगनवाड़ी केंद्र के आसपास तैयार की गई छोटी रसोई बगिया, इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, पोषण वाटिकाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर महिलाओं और बच्चों को ताजी सब्जियां, फल तथा औषधीय पौधे उपलब्ध कराना और भोजन में विविधता बढ़ाना है।

घर की जरूरत से शुरू होकर आय तक पहुंच सकती है पहल

कई ग्रामीण और अर्धशहरी परिवारों में घर के आसपास उपलब्ध छोटी-सी जगह में पालक, मेथी, धनिया, टमाटर, मिर्च, लौकी, भिंडी, बैंगन और दूसरी मौसमी सब्जियां उगाई जा सकती हैं। इससे परिवार को रोजमर्रा के भोजन के लिए कुछ ताजा खाद्य सामग्री घर के आसपास ही मिल सकती है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फल, सब्जियां और कुछ औषधीय पौधे भी पोषण वाटिका का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इसका दूसरा पहलू महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़ा है। यदि घर की जरूरत से अधिक उत्पादन होता है तो अतिरिक्त सब्जियों, पौधों या अन्य उत्पादों को स्थानीय बाजार, स्वयं सहायता समूहों या सामुदायिक स्तर पर बिक्री के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह एक छोटी घरेलू बगिया पहले परिवार की खाद्य जरूरत पूरी करती है और आगे चलकर छोटी आय गतिविधि का आधार बन सकती है। हालांकि केवल सब्जियां उगाने से अपने आप बैंक खाते में आय पहुंचने की गारंटी नहीं होती। इसके लिए उत्पादन की नियमितता, गुणवत्ता, बाजार तक पहुंच, स्थानीय मांग, भंडारण और बिक्री की व्यवस्था जरूरी होती है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक उत्पादन और बिक्री होने पर महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार संपर्क बनाने का अवसर मिल सकता है।

पोषण वाटिका से बढ़ती है भोजन में विविधता

पोषण विशेषज्ञों और सरकारी पोषण कार्यक्रमों में लंबे समय से भोजन में विविधता पर जोर दिया जाता रहा है। केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है। राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में भी अनाज और मोटे अनाज के साथ दालें, फल-सब्जियां, मेवे और बीज, दूध एवं दुग्ध उत्पाद तथा अंडे जैसे खाद्य समूहों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। घर में उगाई जाने वाली मौसमी सब्जियां परिवार के भोजन में स्थानीय और ताजा खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ा सकती हैं। खासतौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के भोजन में विविधता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पोषण माह के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय सामग्री से पौष्टिक व्यंजन बनाने, पोषण मेलों और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूकता जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।

आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ रहा पोषण का अभियान

9वें राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत 9 सितंबर 2026 को वाराणसी में की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के तहत देशभर में आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के लिए सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है। देश में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों तथा करीब 1.10 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल से जुड़ी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने पोषण वाटिकाओं को भी स्थानीय स्तर पर पोषण सुधार की रणनीति से जोड़ा है। आंगनवाड़ी केंद्रों के आसपास या नजदीक विकसित की जाने वाली ऐसी बगिया से स्थानीय फल, सब्जियां और औषधीय पौधों की उपलब्धता बढ़ाने का उद्देश्य है। इससे बच्चों और महिलाओं के भोजन में स्थानीय खाद्य पदार्थों को शामिल करने के साथ पोषण संबंधी जागरूकता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

महिलाओं की भूमिका केवल लाभार्थी की नहीं

राष्ट्रीय पोषण माह का संदेश महिलाओं को केवल पोषण संबंधी योजनाओं की लाभार्थी के रूप में देखने तक सीमित नहीं है। घर में भोजन की योजना बनाने, सब्जियों और अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने, बच्चों के खानपान पर ध्यान देने और जरूरत पड़ने पर घरेलू स्तर पर उत्पादन करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि रसोई बगिया जैसी छोटी पहल को महिलाओं की भागीदारी और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा जा सकता है। महिला यदि घर में सब्जियां उगाती है, अतिरिक्त उत्पादन को स्थानीय स्तर पर बेचती है और उससे प्राप्त राशि को परिवार की जरूरतों या अपनी बचत में लगाती है, तो पोषण से जुड़ी गतिविधि आर्थिक भागीदारी का रास्ता भी खोल सकती है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका भी व्यापक है। केंद्र सरकार के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में काम करती हैं तथा उनकी भागीदारी उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन तक फैली हुई है। ऐसे में घरेलू और सामुदायिक बागवानी को महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाएं भी मौजूद हैं।

स्वयं सहायता समूह बन सकते हैं अहम कड़ी

यदि कई महिलाएं मिलकर पोषण वाटिका या छोटी बागवानी गतिविधि चलाती हैं तो स्वयं सहायता समूह इस काम को आगे बढ़ाने में उपयोगी मंच बन सकते हैं। समूह स्तर पर बीज, पौधे और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था, उत्पादन का साझा प्रबंधन तथा अतिरिक्त उपज की बिक्री की कोशिश की जा सकती है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर पोषण मेलों, आंगनवाड़ी कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों के दौरान महिलाओं द्वारा तैयार किए गए पौष्टिक खाद्य पदार्थों तथा स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिल सकता है। इससे पोषण संबंधी जागरूकता और महिला उद्यमिता दोनों को एक साथ बढ़ावा देने की संभावना बनती है।

पोषण से जुड़ी जिम्मेदारी पूरे समुदाय की

9वें राष्ट्रीय पोषण माह का केंद्रीय संदेश यही है कि पोषण केवल किसी एक विभाग या परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। इस वर्ष समुदाय की भागीदारी और जवाबदेही को प्रमुख विषय बनाया गया है। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों को मजबूत करने, पोषण संबंधी सेवाओं की निगरानी बढ़ाने और आंगनवाड़ी केंद्रों पर पूरक पोषण कार्यक्रम के मेन्यू को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने जैसे कदम भी इसी दिशा में हैं। मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और पात्र किशोरियों के लिए पूरक पोषण की व्यवस्था की गई है। इसमें घर ले जाने वाला राशन, सुबह का नाश्ता और गर्म पका भोजन शामिल हैं।

पोषण और परिवार

इस पूरी पहल में पोषण वाटिका का विचार खास इसलिए है क्योंकि यह पोषण को परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ता है। एक छोटी-सी जगह में उगाई गई सब्जियां भोजन की थाली में विविधता ला सकती हैं, बच्चों को स्थानीय खाद्य पदार्थों से परिचित करा सकती हैं और महिलाओं को उत्पादन से लेकर बिक्री तक की गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दे सकती हैं। इस तरह “आंगन से बैंक खाते तक” का विचार केवल एक नारा नहीं, बल्कि पोषण, स्थानीय उत्पादन और महिला आर्थिक भागीदारी को एक-दूसरे से जोड़ने की संभावित दिशा है। यदि घरेलू उत्पादन को प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय बाजार और उचित वित्तीय अवसरों से जोड़ा जाए, तो छोटी पोषण वाटिकाएं परिवार की खाद्य जरूरतों के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का आधार भी बन सकती हैं।

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