यूपी के रेस्तरां में एक्सपायर्ड खाना, रसोई में चूहे-कॉकरोच; 24 प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस कार्रवाई की तैयारी

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यूपी के रेस्तरां में परोसा जा रहा था एक्सपायर्ड खाना, रसोई में मिले चूहे-कॉकरोच; 24 पर लाइसेंस कार्रवाई की तैयारी

उत्तर प्रदेश में होटल, रेस्तरां और खाद्य प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत प्रदेश के छह जिलों में शुक्रवार को चलाए गए विशेष जांच अभियान में कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा के गंभीर मानकों की अनदेखी सामने आई। कहीं उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी खाद्य सामग्री मिली, तो कहीं रसोई में कॉकरोच और चूहों की मौजूदगी पाई गई। कई जगह कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों के भंडारण, रसोई की सफाई, जल निकासी और कीट नियंत्रण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। SFDA की टीमों ने कानपुर नगर, प्रयागराज, अयोध्या, बरेली, गोरखपुर और मुरादाबाद में होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। छह जिलों में कुल 317 प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच के बाद 24 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई, जबकि 174 प्रतिष्ठान संचालकों को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य केवल दोषी प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारियों को निर्धारित स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन कराने पर भी केंद्रित है।

अयोध्या में सबसे ज्यादा 97 प्रतिष्ठानों की जांच

अभियान के दौरान अयोध्या में सबसे अधिक 97 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इसके बाद कानपुर नगर में 52, मुरादाबाद में 60, प्रयागराज में 40, बरेली में 34 और गोरखपुर में 34 प्रतिष्ठानों की जांच हुई। टीमों ने प्रतिष्ठानों में सिर्फ तैयार भोजन की गुणवत्ता नहीं देखी, बल्कि भोजन तैयार होने से लेकर ग्राहकों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच की। निरीक्षण के दौरान कच्चे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री के भंडारण, रसोई और प्रसंस्करण क्षेत्र की स्वच्छता, जल निकासी, सफाई व्यवस्था, खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, कीड़े-मकौड़ों और चूहों की मौजूदगी तथा अन्य खाद्य सुरक्षा मानकों को देखा गया। इसके अलावा यह भी जांचा गया कि शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से अलग रखा जा रहा है या नहीं।

कानपुर में एक्सपायर्ड सामग्री और खुले में मांस

कानपुर नगर में कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आईं। माल रोड स्थित एक रेस्तरां में उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी खाद्य सामग्री मिलने के साथ साफ-सफाई की स्थिति खराब पाई गई। जांच के दौरान कीटों की मौजूदगी और गंदे पानी के जमाव जैसी समस्याएं भी सामने आईं। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को एक ही फ्रीजर में रखे जाने की स्थिति भी पाई गई। हर्ष नगर स्थित एक होटल में भी एक्सपायर्ड शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य सामग्री के भंडारण की जानकारी सामने आई। सर्विंग क्षेत्र की स्वच्छता भी संतोषजनक नहीं थी। अन्य प्रतिष्ठानों में फ्रीजर की सफाई और खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था में खामियां मिलीं। जाजमऊ क्षेत्र के एक खाद्य प्रतिष्ठान में कच्चा मांस खुले में रखा मिला। यहां भी शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक ही फ्रीजर में रखे गए थे। जल निकासी व्यवस्था खराब होने के कारण स्वच्छता को लेकर भी सवाल उठे। ऐसे मामलों में खाद्य पदार्थों के एक-दूसरे से दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है।

अयोध्या में चूहों का प्रकोप, कई जगह एक्सपायर्ड सामग्री

अयोध्या में हुई जांच ने भी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। कई होटल और रेस्तरां में खाद्य सामग्री के रखरखाव में खामियां मिलीं। कुछ प्रतिष्ठानों में उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी खाद्य सामग्री मिलने के साथ चूहों की मौजूदगी की बात सामने आई। रसोई में चूहों या कॉकरोच की मौजूदगी केवल सफाई की कमी नहीं है। ये कीट खाद्य पदार्थों, बर्तनों और रसोई की सतहों को दूषित कर सकते हैं। यदि ऐसे स्थानों पर खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावी नहीं होती, तो दूषित भोजन ग्राहकों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। अयोध्या में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों की जांच किए जाने का कारण भी यही व्यापक निरीक्षण रहा, जिसमें रसोई से लेकर खाद्य भंडारण तक अलग-अलग बिंदुओं को जांचा गया।

बरेली में रसोई में मिले कॉकरोच

बरेली में 34 प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान भी गंभीर कमियां सामने आईं। कुछ प्रतिष्ठानों की रसोई में कॉकरोच पाए गए। इसके अलावा एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ मिलने की भी जानकारी सामने आई। खाद्य प्रतिष्ठानों की रसोई में कीट नियंत्रण की उचित व्यवस्था नहीं होने से तैयार भोजन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। SFDA की टीमों ने ऐसी कमियों को निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज किया और संबंधित संचालकों के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की। विभाग का कहना है कि खाद्य कारोबारियों को रसोई की नियमित सफाई, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

प्रयागराज में जल निकासी और रसोई की सफाई पर सवाल

प्रयागराज में 40 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। यहां कुछ होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों में रसोई तथा जल निकासी से संबंधित कमियां मिलीं। खाद्य प्रतिष्ठान में गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से रसोई क्षेत्र में गंदगी और नमी बढ़ सकती है। इससे कीड़े-मकौड़ों के पनपने की आशंका भी बढ़ जाती है। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से रसोई का साफ होना ही पर्याप्त नहीं है। खाद्य सामग्री रखने की जगह, फ्रीजर, काम करने की सतह, बर्तन धोने का क्षेत्र और कचरे के निपटान की व्यवस्था भी साफ और व्यवस्थित होनी चाहिए। निरीक्षण में इन्हीं पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

गोरखपुर और मुरादाबाद में भी मिलीं खामियां

गोरखपुर में 34 प्रतिष्ठानों की जांच की गई। कई स्थानों पर खाद्य पदार्थों के भंडारण और साफ-सफाई से जुड़ी कमियां सामने आईं। कुछ होटल और रेस्तरां विभागीय जांच के दायरे में आए और गंभीर कमियां मिलने पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। मुरादाबाद में 60 प्रतिष्ठानों की जांच हुई। यहां भी खाद्य पदार्थों के भंडारण और रसोई की स्वच्छता से जुड़ी कमियां सामने आईं। कुछ प्रतिष्ठानों में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। कीट और चूहों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि कच्चे मांस, मछली या अन्य खाद्य पदार्थों से तैयार भोजन में दूषण पहुंचने का खतरा हो सकता है। इसके लिए अलग भंडारण, साफ बर्तन और उचित तापमान पर खाद्य पदार्थों को रखने की व्यवस्था जरूरी है।

एक्सपायर्ड खाना क्यों बन सकता है खतरा?

खाद्य पदार्थ की उपयोग अवधि समाप्त होने के बाद उसका इस्तेमाल करना उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है। खासकर दूध और उससे बने उत्पाद, मांस, मछली, अंडे तथा तैयार भोजन जैसी जल्दी खराब होने वाली सामग्री को निर्धारित तापमान और उचित परिस्थितियों में रखना जरूरी होता है। सिर्फ यह देख लेना पर्याप्त नहीं कि भोजन देखने या सूंघने में खराब लग रहा है या नहीं। कई बार हानिकारक सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी का पता केवल देखकर नहीं लगाया जा सकता। गलत तापमान पर लंबे समय तक रखा गया भोजन भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यही वजह है कि खाद्य प्रतिष्ठानों में सामग्री की खरीद, भंडारण, उपयोग अवधि की निगरानी और रसोई तक उसके सुरक्षित पहुंचने की पूरी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

174 को सुधार नोटिस, 24 पर लाइसेंस कार्रवाई

छह जिलों में हुई कार्रवाई में 174 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किया गया है। इन प्रतिष्ठानों को निरीक्षण के दौरान मिली कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर 24 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई है। यहां यह समझना जरूरी है कि लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति और अंतिम रूप से लाइसेंस निलंबित होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। संस्तुति के बाद संबंधित विभागीय प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर अंतिम कार्रवाई होती है। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

ग्राहक भी रख सकते हैं स्वच्छता पर नजर

एफएसडीए की कार्रवाई के बीच ग्राहकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। होटल या रेस्तरां में भोजन करते समय केवल स्वाद और सजावट पर ध्यान देने के बजाय रसोई और आसपास की स्वच्छता पर भी नजर रखी जा सकती है। यदि भोजन में असामान्य गंध, स्वाद या गुणवत्ता महसूस हो तो उसे खाने से बचना चाहिए। खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों के लिए भी यह अभियान एक स्पष्ट संदेश है कि ग्राहक को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना केवल औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि खाद्य कारोबार का मूल हिस्सा है। साफ रसोई, सुरक्षित भंडारण, सही तापमान, कच्चे और तैयार भोजन को अलग रखना, नियमित कीट नियंत्रण और उचित कचरा एवं जल निकासी व्यवस्था इसके प्रमुख आधार हैं।

नियमित निरीक्षण और मानकों का पालन जरूरी

‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान के तहत छह जिलों में हुई 317 प्रतिष्ठानों की जांच ने यह भी दिखाया कि खाद्य सुरक्षा की निगरानी केवल बाजार में बिकने वाली पैकबंद सामग्री तक सीमित नहीं है। होटल और रेस्तरां की रसोई में तैयार होने वाला भोजन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एक्सपायर्ड सामग्री, गंदगी, चूहे और कॉकरोच जैसी कमियां सीधे उपभोक्ता की थाली तक पहुंच सकती हैं। ऐसे में नियमित निरीक्षण और मानकों का पालन दोनों जरूरी हैं, ताकि बाहर खाना खाने वाले लोगों को स्वाद के साथ सुरक्षित और स्वच्छ भोजन भी मिल सके।

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