3 साल बाद बदली रैंकिंग, Angel One से पिछड़ी Zerodha, देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म Groww का दबदबा कायम

The CSR Journal Magazine
जीरोधा, जो लंबे समय से भारतीय स्टॉक मार्केट की बादशाहत में थी, अब तीसरे स्थान पर खिसक गई है। अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, एंजेल वन ने एक्टिव इंवेस्टर्स की संख्या में जीरोधा को पीछे छोड़कर देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टॉकब्रोकर बन गया है। वहीं, ग्रोव अपनी स्थिति को मजबूत बनाए हुए है। एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के अंत में एंजेल वन के पास 69.98 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स थे। इस महीने में कंपनी ने 2.43 लाख नए एक्टिव इंवेस्टर्स जोड़े। दूसरी ओर, जीरोधा के पास 67.60 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स रह गए।

ग्रोव का दबदबा कायम

ग्रोव, जो 1.37 करोड़ एक्टिव निवेशकों के साथ पहले स्थान पर है, एनएसई के कुल एक्टिव इंवेस्टर्स का लगभग 29% है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ग्रोव ने अपने निवेशकों की संख्या में लगातार वृद्धि की है। एनएसई के अनुसार, एक्टिव इंवेस्टर वह होता है जिसने पिछले 12 महीनों में कम से कम एक ट्रेड किया हो। इस प्रकार, ग्रोव की स्थिति काफी मजबूत है।

तीन साल बाद बदली रैंकिंग

एंजेल वन के आगे निकलने की एक खास बात यह है कि यह तीन साल में पहली बार है जब देश के तीन सबसे बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स की रैंकिंग में बदलाव आया है। जीरोधा तीसरे स्थान पर खिसक गई है, जबकि ग्रोव टॉप पर बनी हुई है और एंजेल वन अब दूसरे स्थान पर है। पिछले बार रैंकिंग अक्टूबर 2023 में बदली थी, जब ग्रोव ने एक्टिव इंवेस्टर्स की संख्या के हिसाब से जीरोधा को पछाड़ा था।

ब्रोकर्स पर दबाव का असर

ग्रोव का निवेशक आधार मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच इसकी मजबूत स्थिति के कारण बढ़ा है, जबकि जीरोधा और एंजेल वन का फोकस मुख्य रूप से ट्रेडर्स पर रहा है। हालाँकि, ग्रोव इस गैप को कम कर रही है। इस बीच, जीरोधा और एंजेल वन के बीच दूसरे स्थान के लिए कड़ी टक्कर चल रही है। सितंबर के अंत तक, जीरोधा के पास 67.92 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स थे, जबकि एंजेल वन के पास 67.56 लाख थे। दोनों के बीच केवल 36,000 निवेशकों का अंतर रह गया है।

निवेशकों की संख्या में गिरावट, सेबी के फैसलों का असर

नए आंकड़े एंजेल वन के लिए एक बड़ा बदलाव का संकेत हैं। साल 2025 के दौरान इसके एक्टिव इंवेस्टर बेस में लगभग 10 लाख की गिरावट आई थी, जबकि जीरोधा ने भी लगभग 11 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स खो दिए थे। पिछले दो वर्षों में रिटर्न स्थिर रहने के कारण अधिकतर ब्रोकर्स को निवेशकों के जाने का सामना करना पड़ा है। सेबी के कई फैसलों के बाद फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में रिटेलर्स की हिस्सेदारी कम हुई है। इसका असर उन कई डिस्काउंट ब्रोकर्स पर पड़ा है, जिनका पूरा बिजनेस एक्टिव रिटेल ट्रेडर्स पर टिका था। सेबी ने वीकली एक्सपायरी की संख्या को कम करने, मार्जिन की जरूरतें बढ़ाने और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर STT (सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स) में बढ़ोतरी जैसे फैसले लिए थे। हालाँकि, इस साल एक्टिव इंवेस्टर्स की संख्या में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है।

नए उत्पादों की ओर बढ़ते ब्रोकिंग फर्म्स

ब्रोकिंग फर्म्स अब कॉर्पोरेट बॉंड्स और गिफ्ट सिटी के जरिए ग्लोबल या अमेरिकी मार्केट में निवेश जैसे अन्य उत्पादों की तरफ भी अपना विस्तार कर रही हैं। यह बदलाव निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

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