खाद्य सुरक्षा पर सरकार का बड़ा फैसला; FCI चावल से एथनॉल बनाने पर कड़ा प्रतिबंध लागू, एथनॉल नीति में बड़ा फेरबदल

The CSR Journal Magazine

एथनॉल उत्पादन पर नई पाबंदी: चीनी के बाद अब चावल के इस्तेमाल पर रोक, नई दिल्ली में एथनॉल पर बड़ा फैसला

देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक अनाजों की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एथनॉल उत्पादन नीति में एक और बड़ा और कड़ा बदलाव किया है। चीनी, गन्ने के रस और ‘बी-हैवी शीरे’ (B-Heavy Molasses) से एथनॉल बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के ठीक दो सप्ताह बाद, सरकार ने अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल से बनने वाले एथनॉल पर भी सख्त पाबंदी लागू कर दी है। सरकार के इस अप्रत्याशित कदम से देश का एथनॉल उद्योग पूरी तरह से मक्के (Maize) और खराब खाद्यान्न पर निर्भर होने की ओर बढ़ गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा जारी संशोधित निविदा शर्तों के अनुसार, नए एथनॉल आपूर्ति सत्र (ESY 2026-27) के लिए FCI के अतिरिक्त चावल से उत्पादित होने वाले एथनॉल की अधिकतम सीमा मात्र 324 करोड़ लीटर तय कर दी गई है। इसके साथ ही, अलग-अलग डिस्टिलरीज के लिए कुल बोलियों में एफसीआई चावल के इस्तेमाल की एक और 30 प्रतिशत की सीमा (Cap) लगा दी गई है, यानी कोई भी कंपनी अपनी कुल आपूर्ति का 30 फीसदी से अधिक एथनॉल इस चावल से नहीं बना सकेगी।

नीतिगत बदलाव के मुख्य बिंदु और नए कड़े नियम

सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद अब देश में एथनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
गन्ने और चीनी पर पूर्ण रोक: 1 नवंबर 2026 से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2027 तक चलने वाले इस आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से एथनॉल बनाने की अनुमति शून्य (0) रहेगी।
अतिरिक्त चावल पर सीमा: खाद्य निगम के गोदामों में रखे 72 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर ही एथनॉल बनाया जा सकेगा।
खराब खाद्यान्न की कोटा लिमिट: खराब हो चुके अनाज (Damaged Foodgrains) से एथनॉल बनाने की सालाना सीमा भी 160 करोड़ लीटर पर सीमित कर दी गई है।
टेंडर का कुल आकार: तेल कंपनियों ने देश भर में पेट्रोल में मिक्सिंग के लिए कुल 1100 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद का टेंडर निकाला है, लेकिन चीनी और चावल दोनों के प्रतिबंधों के चलते अब वैकल्पिक स्रोतों से कुल 484 करोड़ लीटर एथनॉल मिलने की ही उम्मीद बची है।

क्यों उठाना पड़ा सरकार को यह सख्त कदम?

नई दिल्ली के गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में खाद्य महंगाई (Food Inflation) को रोकने की एक बड़ी कवायद है। त्योहारों के सीजन से ही चीनी और आवश्यक अनाजों की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही थी। इसके अलावा, देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक में असंतुलित मॉनसून के कारण इस साल गन्ने और चीनी के उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। सरकार किसी भी कीमत पर देश की विशाल आबादी के लिए भोजन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को खतरे में नहीं डालना चाहती, यही वजह है कि एथनॉल ब्लेन्डिंग प्रोग्राम (EBP) से ज्यादा प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा को दी गई है।

मक्के की मांग में रिकॉर्ड उछाल, अन्य उद्योगों की बढ़ी चिंता

इस नई पाबंदी के बाद एथनॉल बनाने वाली डिस्टिलरीज के पास अब मक्का (Corn) और सी-हैवी शीरा (C-Heavy Molasses) ही प्रमुख विकल्प के रूप में बचे हैं। उद्योग जगत के विश्लेषकों का अनुमान है कि सत्र 2026-27 में एथनॉल बनाने के लिए मक्के की मांग बढ़कर रिकॉर्ड 1.6 करोड़ टन तक पहुंच सकती है, जो पिछले सत्र में लगभग 1.3 करोड़ टन थी। मक्के की इस अप्रत्याशित मांग के चलते बाजार में इसके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। मक्के की बढ़ती कीमतों ने पोल्ट्री (मुर्गी पालन), डेयरी, और स्टार्च बनाने वाले उद्योगों की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि मक्का इन उद्योगों के लिए पशु आहार और कच्चे माल का मुख्य जरिया है। यदि मक्के के भाव इसी तरह चढ़ते रहे, तो आने वाले दिनों में दूध, चिकन और अंडों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

डिस्टिलरीज और तेल कंपनियों को बड़ा झटका

सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों और अनाज आधारित एथनॉल प्लांट लगाने वाली कंपनियों को भारी वित्तीय झटका लगा है। कंपनियों ने बी-हैवी शीरे और एफसीआई चावल के भरोसे भारी निवेश करके नई डिस्टिलरीज खड़ी की थीं। अब अचानक कच्चे माल की कमी होने से कई प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएंगे। दूसरी तरफ, सरकार ने मक्के से बनने वाले एथनॉल पर मिलने वाले प्रोत्साहन (Incentive) को भी ₹5.79 प्रति लीटर से घटाकर ₹2.79 प्रति लीटर कर दिया है, जिससे कंपनियों का मुनाफा और ज्यादा घट जाएगा। इसके अलावा मक्के से बनने वाले एथनॉल का आधार मूल्य भी ₹71.86 से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर कर दिया गया है।

एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की रफ्तार पर संशय

भारत ने साल 2025 में ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने (E20 Target) का अपना लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था। लेकिन चीनी के बाद चावल पर लगी इस नई पाबंदी से ब्लेंडिंग प्रोग्राम की रफ्तार धीमी होने की पूरी आशंका है। तेल विपणन कंपनियों को डर है कि कच्चे माल के संकट के कारण एथनॉल उत्पादक समय पर 1,100 करोड़ लीटर की आपूर्ति का टेंडर पूरा नहीं कर पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार आने वाले हफ्तों में मक्के की कीमतों को काबू में रखने के लिए मक्के से एथनॉल बनाने की भी कोई ऊपरी सीमा तय कर सकती है, जिससे स्थिति और पेचीदा हो सकती है।

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