Turkey का ऐलान: UNSC वीटो खत्म करने का नया उपाय, भारत की दावेदारी पर क्या होगा असर?

The CSR Journal Magazine
न्यूयॉर्क/अंकारा: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पाँच स्थायी सदस्यों से वीटो पावर वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वीटो प्रणाली ‘अन्यायपूर्ण’ है और यह ‘वैश्विक स्थिरता और शांति’ में बाधा डालती है। एर्दोगन की इस मांग ने उस समय जोर पकड़ा है जब दुनिया के कई मध्यम स्तर के देश UNSC में सुधार की आवाज उठा रहे हैं।

क्या है UNSC का वीटो सिस्टम?

यूएनएससी का वीटो सिस्टम उन पाँच स्थायी सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन को किसी भी अहम प्रस्ताव को रोकने की शक्ति देता है। इसका मतलब है कि यदि 15 में से 14 सदस्य किसी प्रस्ताव का समर्थन करें, तो भी कोई एक स्थायी सदस्य उसे नकार सकता है। ये शक्ति वैश्विक राजनीति में असंतुलन पैदा करती है और इससे सुधार की जरूरत बढ़ी है।

तुर्की की मांग की वैधता

एर्दोगन ने कहा, “वीटो सिस्टम को खत्म कर दिया जाए… आइए हम एक ऐसे सिस्टम की तरफ बढ़ें जो सभी देशों को शामिल करे।” भारत के पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहर के मुताबिक, यह स्पष्ट है कि UNSC के पांचों देश अपनी वीटो पावर नहीं छोड़ना चाहते। सुधार की बातें सिर्फ दिखावा हैं और जब तक कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं होता, यह स्थिति नहीं बदलेगी।

क्या खत्म हो सकता है UNSC का वीटो?

पिछले कुछ वर्षों में हुए गाजा युद्ध, ईरान युद्ध और यूक्रेन युद्ध ने UNSC के सदस्यों के बीच गंभीर मतभेद पैदा किए हैं। एर्दोगन की मांग उस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि यूएन में किसी प्रकार का सुधार किया जाता है, तो नया सदस्य कभी भी वीटो पावर नहीं पाएगा।

UNSC वीटो को खत्म करने के लिए क्या करना होगा?

वीटो को आधिकारिक तौर पर खत्म करने के लिए UN चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होगी। इसके लिए UNGA के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति और सभी पाँच स्थायी सदस्यों की अवश्यम्भावी पुष्टि जरूरी है। यह कार्य अत्यंत कठिन है क्योंकि P5 देशों को अपनी शक्ति साझा करने पर सहमत करना एक चुनौती है।

फ्रांस-मेक्सिको का प्रस्ताव

2015 में फ्रांस और मेक्सिको ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें P5 देशों से अनुरोध किया गया कि वे मानवीय संकटों से जुड़े प्रस्तावों पर अपने वीटो का उपयोग न करें। इस पहल को हाल ही में समर्थन मिला है, जबकि 21 देशों ने इसे अपना समर्थन दिया है। यह संख्या UNGA में प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यक संख्या से बस एक कम है।

भारत की दावेदारी पर प्रभाव

भारत ने यूएनएससी में स्थायी सदस्यता की मांग लगातार की है। तुर्की की नई पहल का असर भारत की दावेदारी पर बड़ा हो सकता है। हालांकि, UNSC के विस्तार के लिए अब भी P5 देशों की सहमति की आवश्यकता होगी। चीन कभी भी नहीं चाहेगा कि भारत के पास वीटो पावर आए। ऐसे में सुधार की संभावना बहुत कम नजर आती है।

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नए बदलाव

तुर्की की इस नई पहल का वास्तविक प्रभाव भविष्य में देखने को मिल सकता है। रूस, अमेरिका और चीन ने पहले भी वीटो पावर को लेकर अपने तर्क दिए हैं, और ये देश प्रणाली में किसी भी प्रकार के विस्तार को लेकर सावधानी बरत रहे हैं। UNSC के सुधार की प्रक्रिया एक जटिल और चुनौतीपूर्ण मुद्दा बन चुकी है, जिसमें सभी P5 देशों की सहमति होना आवश्यक है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos