ई-फाइलिंग से बदलेगी न्याय प्रक्रिया की तस्वीर, घर बैठे ऑनलाइन दाखिल होंगे मुकदमे

The CSR Journal Magazine

ई-फाइलिंग से आसान होगी न्याय की राह, घर बैठे ऑनलाइन दाखिल करें केस; समय और खर्च की बचत के साथ न्याय तक पहुंच आसान बनाने की पहल

अदालतों में मुकदमा दाखिल करने के लिए बार-बार कोर्ट परिसर के चक्कर लगाने, कागजी दस्तावेजों का ढेर संभालने और फाइलिंग प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने की दिशा में ई-फाइलिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ई-कोर्ट्स परियोजना के तहत विकसित यह व्यवस्था वकीलों और पक्षकारों को घर या कार्यालय से ही कानूनी दस्तावेज ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा देती है। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी, किफायती और तकनीक आधारित बनाना है।

क्या है ई-फाइलिंग व्यवस्था?

ई-फाइलिंग यानी इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसके माध्यम से मुकदमे से जुड़े प्लेंट, लिखित बयान, जवाब, आवेदन और अन्य कानूनी दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप से अदालत में दाखिल किए जा सकते हैं। ई-कोर्ट्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह व्यवस्था उन हाईकोर्ट, जिला और अन्य संबंधित अदालतों में उपलब्ध है, जिन्होंने ई-फाइलिंग प्रणाली को अपनाया है। सिविल और आपराधिक मामलों से जुड़े दस्तावेज भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन दाखिल किए जा सकते हैं। ई-फाइलिंग प्रणाली को ई-कमेटी, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की तकनीकी पहल के रूप में विकसित किया गया है। इसका व्यापक लक्ष्य कागज पर निर्भरता घटाना और न्यायिक सेवाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाना है।

वकील ही नहीं, पक्षकार भी उठा सकते हैं लाभ

ई-फाइलिंग व्यवस्था केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है। पात्र मामलों और संबंधित अदालतों में लिटिगेंट यानी पक्षकार भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आधिकारिक पंजीकरण व्यवस्था में Advocate, Litigant और Clerk के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं। पक्षकार के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर का केस से जुड़े रिकॉर्ड के अनुरूप होना भी महत्वपूर्ण है। इससे उन लोगों के लिए सुविधा बढ़ती है जिन्हें किसी मुकदमे की शुरुआती फाइलिंग या दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए दूर-दराज से अदालत तक पहुंचना पड़ता है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कौन-सी प्रक्रिया लागू होगी और व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति आवश्यक है या नहीं, यह संबंधित अदालत और मामले की प्रकृति पर निर्भर करता है।

घर या कार्यालय से हो सकती है फाइलिंग

ई-फाइलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मुकदमे से जुड़े कई काम ऑनलाइन किए जा सकते हैं। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, पक्षकार और अधिवक्ता अपने कार्यालय या घर से केस और आवेदन दाखिल कर सकते हैं। इससे अदालत परिसर तक अनावश्यक यात्राओं में कमी आती है और समय की बचत होती है। विशेष रूप से ऐसे अधिवक्ताओं और पक्षकारों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है जिनके मामले अलग-अलग शहरों या जिलों की अदालतों में चल रहे हों। ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ऐसी स्थिति में भौगोलिक दूरी से पैदा होने वाली दिक्कतों को कम करना भी है।

PDF में दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा

ई-फाइलिंग प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी दस्तावेजों को निर्धारित डिजिटल प्रारूप में तैयार कर पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। आधिकारिक पोर्टल पर pleadings और अन्य दस्तावेजों को PDF के रूप में अपलोड कर e-Sign करने की सुविधा उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि पारंपरिक कागजी फाइल तैयार करने और उसकी कई प्रतियां जमा करने की आवश्यकता कई मामलों में कम हो सकती है। पुराने या कागजी दस्तावेजों को जरूरत के अनुसार स्कैन करके डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

ऑनलाइन ई-साइन से दस्तावेज पर हस्ताक्षर

ई-फाइलिंग की महत्वपूर्ण सुविधाओं में e-Signing भी शामिल है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों पर पक्षकार अपने घर या कार्यालय से ई-साइन कर सकता है। एक ही दस्तावेज पर जरूरत के अनुसार कई संबंधित पक्ष डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस सुविधा से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए पक्षकार और वकील के बीच अनावश्यक भौतिक आवाजाही कम करने में मदद मिलती है।

ऑनलाइन वकालतनामा भी संभव

ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म में ऑनलाइन वकालतनामा तैयार करने और जमा करने की सुविधा भी दी गई है। इससे अधिवक्ता और पक्षकार के बीच दस्तावेजों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जा सकती है। यह सुविधा खासतौर पर उन मामलों में उपयोगी है जहां पक्षकार और अधिवक्ता अलग-अलग स्थानों पर हों।

कोर्ट फीस का ऑनलाइन भुगतान

ई-फाइलिंग को केवल दस्तावेज अपलोड करने तक सीमित नहीं रखा गया है। संबंधित सेवाओं के माध्यम से कोर्ट फीस और अन्य निर्धारित न्यायिक भुगतानों के ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है। आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक, राज्य की संबंधित ट्रेजरी भुगतान प्रणाली के साथ एकीकरण के जरिए कोर्ट फीस, न्यायिक जमा, जुर्माना आदि के भुगतान की सुविधा दी जाती है। इससे भुगतान के लिए अलग से कार्यालयों या काउंटरों पर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

शपथ की ऑनलाइन वीडियो रिकॉर्डिंग

ई-फाइलिंग प्रणाली में ऑनलाइन Oath Recording की सुविधा भी शामिल है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद शपथ की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। इसका उद्देश्य ऐसी प्रक्रियाओं के लिए अदालत में अनावश्यक भौतिक उपस्थिति की जरूरत को कम करना है।

एक साथ कई आवेदन दाखिल करने की सुविधा

अधिवक्ताओं के लिए ई-फाइलिंग में एक और उपयोगी सुविधा कई मामलों से जुड़े आवेदन दाखिल करने की है। आधिकारिक प्लेटफॉर्म के अनुसार, अधिवक्ता अलग-अलग कोर्ट कॉम्प्लेक्स से संबंधित कई मामलों में आवेदन ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं। इससे खासतौर पर ऐसे अधिवक्ताओं को लाभ मिल सकता है जिनके पास एक ही समय में बड़ी संख्या में मामले होते हैं।

तैयार टेम्पलेट से ड्राफ्टिंग आसान

ई-फाइलिंग प्रणाली में विभिन्न प्रकार के कानूनी दस्तावेजों के लिए तैयार editable templates उपलब्ध कराए गए हैं। अधिवक्ता इन टेम्पलेट का इस्तेमाल अपने दस्तावेज तैयार करने में कर सकते हैं। इससे प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया व्यवस्थित हो सकती है और सामान्य प्रकार के दस्तावेजों के लिए समय बच सकता है।

केस पोर्टफोलियो और डैशबोर्ड की सुविधा

ई-फाइलिंग में Portfolio Management और डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं भी हैं। इनके जरिए अधिवक्ता और पक्षकार अपने नए तथा पुराने मामलों को व्यवस्थित तरीके से देख और प्रबंधित कर सकते हैं। पोर्टफोलियो में मामलों को जोड़ने, केस से जुड़े कार्यक्रमों को देखने और संबंधित गतिविधियों की स्थिति समझने जैसी सुविधाएं दी गई हैं। डैशबोर्ड के माध्यम से लंबित और पूर्ण हो चुकी गतिविधियों की स्थिति एक नजर में देखी जा सकती है। इससे बड़ी संख्या में मामलों का प्रबंधन करने वाले अधिवक्ताओं के लिए काम अधिक व्यवस्थित हो सकता है।

पंजीकरण कैसे होगा?

ई-फाइलिंग सेवा का इस्तेमाल करने के लिए संबंधित उपयोगकर्ता को पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। आधिकारिक पंजीकरण पेज पर Advocate, Litigant और Clerk के विकल्प उपलब्ध हैं। पंजीकरण के दौरान राज्य, व्यक्तिगत विवरण, मोबाइल नंबर, ईमेल और अन्य आवश्यक जानकारी मांगी जाती है। अधिवक्ताओं के लिए Bar Registration Number का सत्यापन भी प्रक्रिया का हिस्सा है। मोबाइल नंबर पर OTP सत्यापन की सुविधा भी उपलब्ध है। इसलिए पंजीकरण करते समय सही और सक्रिय मोबाइल नंबर तथा ईमेल का इस्तेमाल करना जरूरी है।

ई-फाइलिंग से क्या-क्या फायदे?

ई-फाइलिंग व्यवस्था के पीछे सबसे प्रमुख उद्देश्य समय, धन और यात्रा की बचत है। इसके अलावा इसके कई अन्य फायदे भी हैं—
  • अदालत में फाइलिंग के लिए अनावश्यक भौतिक यात्राएं कम होती हैं।
  • कागजी दस्तावेजों की जरूरत घटती है।
  • डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है।
  • ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिलती है।
  • e-Sign के जरिए दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
  • वकालतनामा ऑनलाइन जमा किया जा सकता है।
  • केस पोर्टफोलियो को डिजिटल तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है।
  • अधिवक्ताओं को कई मामलों और आवेदनों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलती है।
  • कागज की खपत कम होने से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

क्या हर मामला ऑनलाइन दाखिल किया जा सकता है?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ई-फाइलिंग की सुविधा उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि देश की प्रत्येक अदालत में हर प्रकार का मामला अनिवार्य रूप से ऑनलाइन ही दाखिल किया जा सकता है। सुविधा संबंधित अदालत द्वारा ई-फाइलिंग प्रणाली अपनाए जाने और उस अदालत में उपलब्ध सेवाओं पर निर्भर करती है। आधिकारिक प्लेटफॉर्म भी स्पष्ट करता है कि ई-फाइलिंग उन अदालतों में इस्तेमाल की जा सकती है जिन्होंने यह व्यवस्था अपनाई है। इसलिए मुकदमा दाखिल करने से पहले संबंधित हाईकोर्ट या जिला अदालत की वर्तमान प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है।

ई-फाइलिंग और eCourts में अंतर

ई-फाइलिंग को व्यापक eCourts डिजिटल न्याय व्यवस्था का एक हिस्सा समझा जा सकता है। eCourts प्लेटफॉर्म पर केस स्टेटस, cause list, आदेश और फैसले जैसी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि e-Filing मुख्य रूप से कानूनी दस्तावेज और मामले ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा से जुड़ा है। eCourts में ePay, Virtual Court, Judgment Search और अन्य डिजिटल सेवाएं भी शामिल हैं। मसलन, किसी मौजूदा केस का स्टेटस जानने के लिए eCourts Services पर CNR नंबर से खोज की जा सकती है। पोर्टल के अनुसार, 16 अंकों के अल्फान्यूमेरिक CNR नंबर के जरिए केस की वर्तमान स्थिति और इतिहास देखा जा सकता है।

न्याय तक पहुंच को बना रहा है आसान

डिजिटल न्याय व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल तकनीक का इस्तेमाल नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंच को आसान बनाना है। अदालत की प्रक्रिया में समय और दूरी अक्सर पक्षकारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में ऑनलाइन फाइलिंग, डिजिटल हस्ताक्षर, ऑनलाइन भुगतान और केस पोर्टफोलियो जैसी सुविधाएं न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरण को अधिक सुविधाजनक बना सकती हैं। ई-कोर्ट्स की व्यापक अवधारणा भी न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, किफायती, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।

डिजिटल न्याय के साथ सावधानी भी जरूरी

ई-फाइलिंग सुविधा आसान जरूर है, लेकिन कानूनी दस्तावेज दाखिल करते समय लापरवाही की गुंजाइश कम होती है। दस्तावेजों का सही प्रारूप, आवश्यक संलग्नक, सही अदालत का चयन, फीस, हस्ताक्षर और अन्य तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान से पूरा करना जरूरी है। गलत दस्तावेज, अधूरी जानकारी या तकनीकी त्रुटि के कारण फाइलिंग में आपत्ति आ सकती है। इसलिए गंभीर कानूनी मामलों में अधिवक्ता की सलाह लेना उपयोगी रहता है।

आने वाले समय में डिजिटल न्याय की बड़ी भूमिका

भारत की न्यायिक व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। e-Filing, ePay, Virtual Courts, डिजिटल केस स्टेटस और ऑनलाइन दस्तावेज जैसी सेवाएं न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग हिस्सों को डिजिटल बना रही हैं। eCourts पोर्टल पर इन सेवाओं को एक व्यापक डिजिटल न्याय ढांचे के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ई-फाइलिंग की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक के साथ-साथ अदालतों की डिजिटल क्षमता, इंटरनेट पहुंच, उपयोगकर्ताओं की डिजिटल समझ और सहायता व्यवस्था कितनी मजबूत होती है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना भी इस बदलाव का अहम हिस्सा होगा।

डिजिटल ई फाइलिंग- कागज से बाहर निकली न्याय प्रक्रिया

ई-फाइलिंग न्यायिक प्रक्रिया को कागजी फाइलों और अनावश्यक यात्राओं से आगे ले जाने वाली महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है। वकील और पात्र पक्षकार घर या कार्यालय से केस और आवेदन दाखिल कर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड और e-Sign कर सकते हैं, वकालतनामा जमा कर सकते हैं तथा निर्धारित कोर्ट फीस और अन्य भुगतान ऑनलाइन कर सकते हैं। केस पोर्टफोलियो और डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं मुकदमों के प्रबंधन को भी आसान बनाती हैं। इस व्यवस्था का व्यापक उद्देश्य साफ है- न्याय पाने के लिए कम यात्रा, कम कागज, कम खर्च और अधिक डिजिटल सुविधा। हालांकि, ई-फाइलिंग की उपलब्धता और प्रक्रिया अदालत तथा मामले के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए वास्तविक फाइलिंग से पहले संबंधित न्यायालय के आधिकारिक निर्देशों की जांच करना जरूरी है।
आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल: e-Filing Services — eCourts
eCourts Services: eCourts India Services

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