गुजरात शराबकांड: 9 मौतें, 1 युवक ब्रेन डेड, मास्टरमाइंड रईस समेत 15 गिरफ्तार, 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड

The CSR Journal Magazine

गुजरात में जहरीली शराब से बढ़ी आफत: एक युवक ब्रेन डेड, 9 की मौत

गुजरात के भावनगर जिले में नकली और जहरीली शराब के सेवन से 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सूरत का एक युवक पूरी तरह ब्रेन डेड हो गया है। पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य में इस बड़ी त्रासदी के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार (21 अगस्त 2026) को आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 61 लोग इस जहरीले रसायन युक्त पेय से प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में 25 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें से 5 की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य सरगना सहित 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लापरवाही बरतने के आरोप में स्थानीय थाना प्रभारी (पीआई) समेत 4 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

घोघा तालुका के खरकड़ी गांव से शुरू हुई मौत की पार्टी

यह दर्दनाक घटना भावनगर जिले के घोघा तालुका के अंतर्गत आने वाले खरकड़ी गांव से शुरू हुई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 16 अगस्त की रात को गांव के ही एक स्थानीय युवक ने सरकारी नौकरी/पुलिस में भर्ती होने की खुशी में अपने दोस्तों और ग्रामीणों के लिए एक शराब पार्टी का आयोजन किया था। पार्टी में परोसी गई शराब स्थानीय बूटलेगर (शराब तस्कर) घनश्याम से खरीदी गई थी। तस्करों ने इस जहरीले मिश्रण को एक बेहद लोकप्रिय ‘इंडियन मेड फॉरेन लिकर’ (IMFL) ब्रांड की हूबहू नकली बोतलों में पैक करके दिया था, ताकि पीने वालों को किसी भी तरह का संदेह न हो। पार्टी के कुछ ही घंटों बाद, यानी 17 अगस्त की सुबह से ही लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पीड़ितों ने आंखों के आगे अंधेरा छाने, तेज सिरदर्द, पेट में मरोड़ और लगातार उल्टियां होने की शिकायत की। कुछ लोगों की हालत इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल ले जाने का मौका भी नहीं मिला। भावनगर के तीन युवकों ने अपने घरों में ही दम तोड़ दिया।

जहरीली शराब का मेडिकल बुलेटिन: 61 प्रभावित, सूरत का युवक ब्रेन डेड

भावनगर के जिला प्रशासन और सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) अक्षर व्यास ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि सरकारी रिकॉर्ड में अब तक कुल 61 प्रभावित लोगों की पहचान की जा चुकी है। इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू सूरत के रहने वाले एक पीड़ित संजयसिंह के साथ सामने आया। जहरीली शराब का सेवन करने के बाद उनकी तबीयत इस कदर बिगड़ी कि उन्हें वराछा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ा। डॉक्टरों ने CPR देकर उनकी धड़कनें तो वापस ला दीं, लेकिन वे होश में नहीं आए। टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट और न्यूरोलॉजिकल जांच में खुलासा हुआ कि मेथनॉल के घातक असर के कारण उनके मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें न्यूरो-स्पेशलिस्ट अस्पताल शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें आधिकारिक रूप से ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया। वर्तमान में उनके अन्य अंगों को जीवित रखने के लिए उन्हें वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है।

25 मरीज ICU में

भावनगर सिटी तहसीलदार और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट किशन बी. चांडालिया ने बताया कि भावनगर के सर टी. अस्पताल (Sir T. Hospital) और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में फिलहाल 25 मरीजों का सघन उपचार किया जा रहा है, जिनमें से 5 वेंटिलेटर सपोर्ट पर या गंभीर स्थिति में हैं। राहत की बात यह है कि 10 मरीजों की स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट में भयानक सच: 38.59% अत्यंत विषैला ‘मेथनॉल’

प्रशासन ने प्रभावित और मृत व्यक्तियों के खून के नमूनों को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेजा था। FSL की शुरुआती रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट ने चिकित्सा अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। जांच में पाया गया कि नकली शराब के रूप में बेचे गए इस तरल पदार्थ में 38.59% तक मेथनॉल (Industrial Methyl Alcohol) मौजूद था। मेथनॉल एक अत्यधिक विषैला और औद्योगिक रसायन है, जिसका इस्तेमाल पेंट, थिनर और रासायनिक फैक्ट्रियों में होता है। मानव शरीर के लिए इसकी कुछ मिलीलीटर मात्रा भी जानलेवा होती है। शरीर में जाते ही यह सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) और आंखों की रोशनी से जुड़ी ऑप्टिक नर्व को नष्ट कर देता है, जिससे व्यक्ति अंधा हो जाता है या उसके अंगों के काम बंद करने (Multi-organ failure) से मौत हो जाती है।

मध्य प्रदेश से जुड़े तार: ‘डॉक्टर’ ने बनाई थी शराब, खुद पीकर मरा

गुजरात पुलिस के महानिदेशक (DGP) के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच तत्काल स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) को सौंप दी गई है। एसएमसी की तफ्तीश में इस पूरे काले कारोबार का अंतरराज्यीय नेटवर्क और मध्य प्रदेश (MP) कनेक्शन उजागर हुआ है।पुलिस के मुताबिक, इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना मध्य प्रदेश के उज्जैन का रहने वाला रईस है, जिसे पुलिस ने उज्जैन के पास से दबोच लिया है। रईस ने भावनगर के स्थानीय तस्कर गौतम सोलंकी (उम्र 24 वर्ष) के साथ मिलकर गुजरात में नकली विदेशी शराब खपाने की साजिश रची थी। शराब बनाने के लिए रईस ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले नरेंद्र यादव उर्फ ‘डॉक्टर’ को विशेष रूप से भावनगर बुलाया था, जो अवैध और नकली शराब रसायन तैयार करने का विशेषज्ञ माना जाता था। शराबकांड के महज तीन दिन पहले ही इन लोगों ने गौतम सोलंकी के भावनगर स्थित घर पर कच्चे माल (इथेनॉल, मेथनॉल और एसेंस) को मिलाकर जहरीली शराब की करीब 25 से 28 पेटियां तैयार की थीं। इस मामले में सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि शराब तैयार करने के बाद, उसकी तीव्रता जांचने के लिए खुद ‘डॉक्टर’ नरेंद्र यादव ने भी उसका सेवन किया था। अत्यधिक जहरीले केमिकल के असर के कारण गुजरात के अन्य पीड़ितों के साथ-साथ खुद आरोपी नरेंद्र यादव की भी मौत हो गई।

13 पेटियां अब भी गायब, 1000 गांवों में हाई-अलर्ट

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती शराब की वो खेप है जो बाजार में बिकने के लिए निकल चुकी थी। जांच में सामने आया है कि कुल निर्मित खेप में से पुलिस ने अब तक केवल 15 पेटियां ही बरामद की हैं, जबकि 13 पेटियां (लगभग सैकड़ों बोतलें) अभी भी लापता हैं। स्थानीय लोगों और खुफिया इनपुट के अनुसार, यह गायब शराब भावनगर और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में छोटे बूटलेगरों तक पहुंच चुकी है। इस जानलेवा खतरे को देखते हुए, गुजरात पुलिस और जिला प्रशासन ने भावनगर रेंज के लगभग 1,000 गांवों में हाई-अलर्ट जारी कर दिया है। मुनादी कराकर और सोशल मीडिया के जरिए ग्रामीणों को सख्त चेतावनी दी जा रही है कि वे किसी भी अज्ञात या अवैध स्रोत से खरीदी गई शराब का सेवन बिल्कुल न करें।

भावनगर शराबकांड मामले में पुलिसिया कार्रवाई

गुजरात स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसके तहत अब तक 15 प्रमुख आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इस पूरे जानलेवा सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड और सरगना मध्य प्रदेश के उज्जैन का रहने वाला रईस है, जिसे पुलिस ने एक विशेष ऑपरेशन के तहत उज्जैन के पास से दबोचा। रईस ही गुजरात में अवैध रसायनों और नकली शराब की बड़ी खेप सप्लाई करने का मुख्य सूत्रधार था। उसका साथ देने वाले स्थानीय नेटवर्क में 24 वर्षीय गौतम सोलंकी शामिल है, जिसने भावनगर स्थित अपने निजी आवास को ही नकली शराब बनाने की फैक्ट्री में तब्दील कर दिया था। इसके अलावा, पुलिस ने 21 वर्षीय जतिन कंबड और 30 वर्षीय पारस उर्फ पप्पू चुडासमा को भी गिरफ्तार किया है, जो स्थानीय स्तर पर छोटे बूटलेगरों और ग्रामीणों तक इस जहरीले मिश्रण को ब्रांडेड बोतलों में भरकर पहुंचाने (सप्लाई करने) का काम संभाल रहे थे।

विदेशी शराब के नकली लेबल

इस काले कारोबार में लॉजिस्टिक्स, परिवहन और वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाले 27 वर्षीय जयदीप मकवाना को भी पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिया है। जांच में सामने आया है कि इन गिरफ्तार आरोपियों के पास से विभिन्न नामी विदेशी शराब ब्रांड्स के जाली स्टिकर, खाली बोतलें, ढक्कन और सीलिंग मशीनें बरामद हुई हैं। इन सभी आरोपियों के खिलाफ वरतेज पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) और गुजरात निषेध अधिनियम के तहत बेहद सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, और अदालत ने इन्हें 10 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजा है ताकि इनसे कड़ाई से पूछताछ कर फरार अन्य बूटलेगरों का पता लगाया जा सके।

भारी मात्र में रॉ मटीरीअल बरामद

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से भारी मात्रा में खाली बोतलें, केमिकल ड्रम, रंग, विभिन्न नामी ब्रांड्स के जाली स्टिकर रोल, ढक्कन और बोतल सील करने वाली मशीनें जब्त की हैं। यह सारा सामान देश के अलग-अलग राज्यों से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से मंगवाया गया था। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide not amounting to murder) जैसी गंभीर धाराओं और गुजरात निषेध अधिनियम (Liquor Prohibition Act) के तहत मामला दर्ज किया है। स्थानीय अदालत ने मुख्य आरोपियों को 10 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

शराबबंदी पर उठे राजनीतिक सवाल

गुजरात में 1 मई 1960 से ही पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में औद्योगिक मेथनॉल का अवैध परिवहन होना और ब्रांडेड बोतलों में नकली शराब बनाकर बेचा जाना राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद गुजरात में सियासी पारा भी चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट और पुलिस-प्रशासन की कथित मिलीभगत की जांच के लिए गुजरात उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। विपक्ष ने नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए गृह विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री/मंत्रियों के इस्तीफे की भी मांग की है। फिलहाल, प्रशासन का पूरा जोर अस्पतालों में भर्ती लोगों की जान बचाने और लापता 13 पेटियों को जल्द से जल्द ट्रैक करने पर है।

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