वैश्विक मंच पर गूंजा भारत का डंका: ऑस्ट्रेलियाई पीएम बोले-पीएम मोदी ने रचा इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा चमत्कार

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वैश्विक मंच पर गूंजा भारत का डंका: ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक तारीफ

अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की विकास यात्रा और बुनियादी ढांचे में हुए क्रांतिकारी बदलावों को एक बार फिर बड़ी वैश्विक सराहना मिली है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नीतिगत फैसलों की जमकर सराहना की है। उन्होंने एक वैश्विक मंच पर खुलकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को इस बात का पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए कि उनके कार्यकाल में भारत में जितने लोगों तक ऊर्जा (बिजली और स्वच्छ ईंधन) की पहुंच सुनिश्चित हुई है, उतनी मानव इतिहास के किसी भी दशक, किसी भी क्षेत्र या दुनिया के किसी भी देश में आज तक नहीं देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का यह बयान अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान आया। वैश्विक नेताओं और नीति विशेषज्ञों की उपस्थिति में दिए गए इस बयान ने दुनिया भर का ध्यान भारत के घरेलू विकास के पैमाने की ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय मंच से किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा भारत के विकास कार्यों को ‘मानव इतिहास में अभूतपूर्व’ बताना भारत की बढ़ती साख और नीतिगत सफलता का एक मजबूत प्रमाण माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में हुआ अभूतपूर्व परिवर्तन

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीज ने भारत में पिछले एक दशक के भीतर हुए ग्रामीण विद्युतीकरण और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को रेखांकित करते हुए यह बात कही। भारत सरकार द्वारा चलाई गई ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ और ‘सौभाग्य योजना’ जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं ने देश के करोड़ों गरीब परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। आंकड़ों के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत देश में एलपीजी कनेक्शनों की कुल संख्या 10.58 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जिसने ग्रामीण महिलाओं को चूल्हे के हानिकारक धुएं से मुक्ति दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया है। इसी तरह, देश के कोने-कोने तक बिजली ग्रिड पहुंचाकर करोड़ों घरों को रोशन किया गया है। अल्बनीज ने इसी ऐतिहासिक बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आबादी को रिकॉर्ड समय में ऊर्जा तंत्र से जोड़ना वैश्विक विकास के इतिहास में एक बेजोड़ मिसाल है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में गहराता भरोसा

अपने संबोधन में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने केवल भारत के विकास की ही तारीफ नहीं की, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे रणनीतिक व कूटनीतिक रिश्तों पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक बेहद करीबी और विश्वसनीय मित्र बताते हुए कहा कि भारत केवल एक ऐसा देश नहीं है जिसके साथ ऑस्ट्रेलिया व्यापार करता है, बल्कि यह एक ऐसा राष्ट्र है जिस पर ऑस्ट्रेलिया आंख मूंदकर भरोसा करता है। दोनों देशों के बीच हाल ही में शुरू हुई ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश अब मिलकर सौर ऊर्जा (सोलर पीवी), ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जब भू-राजनीतिक तनावों और युद्ध के चलते ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे समय में भारत द्वारा अपनी घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करते हुए स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ाना पूरी दुनिया के लिए एक सीख है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीतिक जीत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश के प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के काम को इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा विस्तार बताना बेहद मायने रखता है। घरेलू स्तर पर भले ही नीतियों और शासन को लेकर राजनीतिक बहसें और आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं, लेकिन जब वैश्विक मंचों पर भारत के जमीनी प्रदर्शन को खुले दिल से स्वीकारा जाता है, तो यह साबित करता है कि देश के बदलाव की रफ्तार को वैश्विक स्तर पर अनदेखा नहीं किया जा सकता। सिडनी और मेलबर्न में हुए पिछले कार्यक्रमों से लेकर न्यूयार्क के इस मंच तक, भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों की यह नई गहराई दोनों देशों के साझा भविष्य को और अधिक उज्ज्वल और सुरक्षित बनाती है।

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