5-डे वर्किंग और न्यायसंगत प्रोत्साहन नीति की मांग पर बैंक कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, 26 अक्टूबर से काम बंद का एलान

The CSR Journal Magazine

बैंककर्मियों ने 5-डे बैंकिंग की मांग पर किया प्रदर्शन, 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी

देश के वित्तीय क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग (5-Day Banking) की व्यवस्था लागू करने और भेदभावपूर्ण प्रोत्साहन नीति को वापस लेने की मांग को लेकर देश भर के बैंक कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन का पहला चरण शुक्रवार को व्यापक विरोध प्रदर्शन और एक दिवसीय हड़ताल के साथ शुरू हुआ। बैंक यूनियनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 26 अक्टूबर 2026 से बैंकों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इससे आगामी त्योहारों के सीजन में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका गहरा गई है।

द्विपक्षीय समझौते के दो साल बाद भी मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार

बैंक कर्मचारियों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह (5-Day Work Week) का प्रस्ताव कोई नई मांग नहीं है। यूनियन नेताओं के अनुसार, 8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट में इस पर पूरी सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत बैंक कर्मचारियों ने हर कामकाजी दिन (सोमवार से शुक्रवार) पर 40 मिनट अतिरिक्त काम करने की बात भी स्वीकार की थी ताकि उत्पादकता पर कोई असर न पड़े। IBA ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर अंतिम स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा था। लेकिन दो साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सरकार और वित्त मंत्रालय के स्तर पर इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाला गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।

भेदभावपूर्ण प्रोत्साहन नीति (PLI) का पुरजोर विरोध

पांच दिवसीय बैंकिंग के अलावा, यूनियनों ने सरकार की संशोधित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का भी कड़ा विरोध किया है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह नई प्रोत्साहन व्यवस्था पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। इसके तहत शीर्ष और वरिष्ठ अधिकारियों को तो उनके मूल वेतन के सैकड़ों दिनों के बराबर भारी-भरकम इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया है, जबकि निचले स्तर के क्लर्क और सब-स्टाफ कर्मचारियों के लिए इसे महज 15 दिनों के वेतन तक सीमित कर दिया गया है। यूनियनों की मांग है कि इस एकतरफा व्यवस्था को तुरंत वापस लिया जाए और द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सभी स्तर के कर्मियों के लिए एक न्यायसंगत नीति बनाई जाए। इसके अतिरिक्त पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और पेंशन अपडेशन जैसे मुद्दे भी इस आंदोलन का हिस्सा हैं।

चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा: त्योहारों के सीजन में ठप हो सकता है कामकाज

बैंक यूनियनों ने सरकार को चेताने के लिए एक सुनियोजित और चरणबद्ध आंदोलन का खाका तैयार किया है, जिसके तहत वित्तीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ना तय है-
पहला चरण (11 सितंबर): देशव्यापी सफल एक दिवसीय हड़ताल और क्षेत्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गए। चूंकि यह हड़ताल शुक्रवार को हुई और उसके बाद दूसरा शनिवार तथा रविवार की छुट्टी है, जिससे लगातार तीन दिन शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो रहा है।
दूसरा चरण (28 से 30 सितंबर): सितंबर महीने के अंत में, जब बैंकों में अर्धवार्षिक क्लोजिंग (Half-Yearly Closing) का महत्वपूर्ण समय होता है, तब बैंककर्मी लगातार तीन दिनों की देशव्यापी हड़ताल पर जाएंगे।
अंतिम चरण (26 अक्टूबर से): यदि इन चेतावनियों के बाद भी गतिरोध नहीं सुलझा, तो 26 अक्टूबर से देश के सभी सरकारी और पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों में ‘काम बंद’ यानी पूर्ण रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी।

आम जनता और व्यापार जगत की बढ़ेंगी मुश्किलें

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) जो लगभग 90 प्रतिशत बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है, के इस कदम से आने वाले दिनों में ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यूनियनों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे UPI, इंटरनेट बैंकिंग और ATM सुचारू रूप से कार्य करते रहेंगे, लेकिन शाखा स्तर के नकदी लेनदेन, चेक क्लीयरेंस, ऋण स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे। केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने भी बैंककर्मियों की इन मांगों को जायज ठहराते हुए आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया है। अब गेंद केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के पाले में है कि क्या वे समय रहते बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकालते हैं या देश को एक बड़ी वित्तीय तालाबंदी की ओर जाने देते हैं।

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