विघ्नहर्ता के पंडाल से नशा मुक्ति का संकल्प: अररिया में भक्ति के साथ सामाजिक जागरूकता की अनूठी मिसालदिया गया है।

The CSR Journal Magazine

गणेश पूजा के पंडाल में ‘नशा छोड़ो-जीवन जोड़ो’ का विशेष संदेश, अररिया शहर में गणेश चतुर्थी का उत्सव

बिहार के अररिया जिले में इस वर्ष गणेश उत्सव के पावन अवसर पर भक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर पूरा जिला बप्पा की भक्ति में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पूजा समितियों ने इस धार्मिक मंच का उपयोग समाज की एक सबसे बड़ी बुराई ‘नशाखोरी’ के खिलाफ अलख जगाने के लिए किया है। अररिया के मुख्य पूजा पंडालों में इस बार ‘नशा छोड़ो-जीवन जोड़ो’ अभियान के तहत व्यापक सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो न केवल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं बल्कि जिले भर में चर्चा का विषय हैं।

भव्यता के बीच सामाजिक संदेश

अररिया शहर सहित ग्रामीण इलाकों में स्थापित गणेश पूजा पंडालों को इस बार केवल पारंपरिक रूप से नहीं सजाया गया है, बल्कि उनमें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जीवंत कलाकृतियां और संदेश पट्टिकाएं लगाई गई हैं। पंडाल के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक, हर तरफ स्लोगन लिखे पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें ‘नशा मुक्ति से ही सुंदर भविष्य’, ‘शराब और ड्रग्स: जीवन का काल’ जैसे नारे प्रमुख हैं। पूजा समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘बुद्धि के देवता’ के रूप में पूजा जाता है। नशा इंसान की बुद्धि को नष्ट कर देता है और उसके जीवन में विघ्न पैदा करता है। इसलिए, बप्पा के दरबार से बेहतर कोई और जगह नहीं हो सकती थी जहां से युवाओं को सही राह दिखाने की शुरुआत की जाए।

श्रद्धालुओं को दिलाई जा रही है ‘नशा मुक्ति’ की शपथ

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि पंडाल में आने वाले हर श्रद्धालु को केवल प्रसाद ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि उन्हें नशे से दूर रहने का संकल्प भी दिलाया जा रहा है। महाआरती के ठीक बाद, पंडाल के मुख्य पुजारी और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित जनसैलाब को हाथ आगे बढ़ाकर नशा न करने और अपने परिवार व समाज को इससे मुक्त रखने की शपथ दिला रहे हैं।विशेष रूप से युवाओं और किशोरों को इस अभियान से सीधे जोड़ा जा रहा है। पंडाल परिसर में एक विशेष ‘जागरूकता सेल’ भी बनाया गया है, जहां नशामुक्ति से जुड़ी सरकारी योजनाओं, काउंसिलिंग सेंटरों और इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में पंपलेट बांटे जा रहे हैं।

कला और नुक्कड़ नाटकों के जरिए सीधा प्रहार

जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय कलाकारों के सहयोग से पंडाल के समीप नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इन नाटकों के माध्यम से यह दिखाया जा रहा है कि कैसे एक व्यक्ति की नशे की लत पूरे हंसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर देती है। नाटक को देख पंडाल में भावुक हुए कई ग्रामीणों ने मौके पर ही हमेशा के लिए गुटखा, खैनी और शराब जैसी नशीली चीजों को त्यागने की घोषणा की।

प्रबुद्ध नागरिकों और प्रशासन ने की सराहना

अररिया में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से शुरू की गई इस सामाजिक पहल की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। स्थानीय बुद्धिजीवियों, शिक्षकों और समाजसेवियों का कहना है कि त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य तब तक पूरा नहीं होता जब तक वे समाज को कोई सकारात्मक दिशा न दें। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी पूजा समितियों के इस कदम को सराहा है और कहा है कि पुलिस और प्रशासन के अभियानों के साथ-साथ जब ऐसे धार्मिक और सामाजिक संगठन आगे आते हैं, तभी नशामुक्त समाज का सपना सच हो सकता है। पंडाल में दर्शन करने आए बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि यह आयोजन केवल एक पूजा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को बचाने का महायज्ञ है। बप्पा के इस पंडाल से जो संदेश पूरे अररिया में जा रहा है, वह निश्चित रूप से आने वाले दिनों में कई परिवारों के आंगन में खुशहाली वापस लाएगा।

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