अमेरिका ने PL-15 का ‘बाप’ बनाया, AIM-424 मिसाइल से बढ़ी चीन की चिंताएं

The CSR Journal Magazine
वॉशिंगटन से बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी नौसेना ने एआईएम-424 लॉन्ग रेंज एयर टू एयर मिसाइल जिसे ‘मैलिस’ कहा जाता है, को लॉन्च किया है। यह मिसाइल खासतौर पर हवा से हवा में मार करने के लिए बनाई गई है। इसे लड़ाकू विमानों पर نصب किया जा सकता है और इसकी ताकत चीन की PL-15 मिसाइल से कहीं अधिक है। यह PL-15 वही मिसाइल है जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने भारतीय लड़ाकू विमानों पर हमले के दौरान किया था। अमेरिका का यह नया आयाम चीनी और रूसी लड़ाकू विमानों के खिलाफ डॉगफाइट के लिए खास रूप से तैयार किया गया है।

मैलिस का प्रदर्शन

एविएशन वीक की जानकारी के अनुसार, AIM-424 को नेवादा में हुए टेलहुक कन्वेंशन में दर्शाया गया। इसे अमेरिकी डिफेंस फर्म रेथियॉन ने विकसित किया है। इस मिसाइल की रेंज 250 समुद्री मील (लगभग 463 किलोमीटर) से अधिक है, जिससे यह दूर के लक्ष्यों को भी भेदने में सक्षम है। इसकी मोटाई 13.5 इंच है और यह खास तौर पर घात लगाने के लिए डिजाइन की गई है। ऐसे में यह चीनी एयर-टू-एयर मिसाइलों के लिए बड़ा खतरा बन जाती है।

चीन के लड़ाकू विमानों के लिए खतरा

अमेरिकी मीडिया में आई खबरों के अनुसार, AIM-424 मैलिस मिसाइल अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसकी वजह से यह अपनी रेंज में चीनी लड़ाकू विमानों के लिए घातक साबित हो सकती है। इससे अमेरिकी लड़ाकू विमान अपने दुश्मनों पर हमला करने में सक्षम होंगे, जबकि चीनी लड़ाकू विमानों को इस मिसाइल से बचना काफी मुश्किल होगा। जैसे-जैसे चीनी विमानों के पास बचने का समय कम होगा, उन्हें अमेरिकी लड़ाकू विमानों का निशाना बनने का खतरा अधिक होगा।

उच्चतम तकनीक और गतिशीलता

नेवल न्यूज का कहना है कि AIM-424 की मारक क्षमता और गति वर्तमान में उपयोग हो रही AIM-174B मिसाइल से कहीं बेहतर है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का मानना है कि इस मिसाइल में विशेष एरोडाइनामिक पंख और ट्रैक्स हैं, जो इसे बड़े आकार के बावजूद अधिक गतिशीलता प्रदान करते हैं। इसकी चपलता AIM-120 AMRAAM और लॉकहीड मॉर्टिन की AIM-260 JATM जैसी मिसाइलों से कहीं अधिक है। यही कारण है कि यह मिसाइल अपने आकार के बावजूद लड़ाकू विमानों के आकार के लक्ष्यों को भी भेदने की क्षमता रखती है।

क्या होने वाला है आगे?

अब अमेरिका ने इस क्षेत्र में एक नई शक्ति का इजाद किया है, जिससे न केवल चीन की PL-15 मिसाइल पर नकेल कसने में मदद मिलेगी, बल्कि अमेरिका की वायुसेना की सुरक्षा में भी सुधार होगा। इस नई टेक्नोलॉजी के साथ, अमेरिका अपने वायु सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। इस बदलाव के साथ, अंतर्राष्ट्रीय वायु शक्ति संतुलन में एक नया अध्याय जुड़ने की संभावना है।

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