गांव के मरीजों तक पहुंचेगा AI डॉक्टर! MediElaj का स्मार्ट हेल्थ कियोस्क मॉडल बदलेगा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक केवल डॉक्टरों या अस्पतालों की संख्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं का असमान वितरण भी है। महानगरों और बड़े शहरों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टर, डायग्नोस्टिक सेंटर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हैं, वहीं छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जांच और विशेषज्ञ सलाह के लिए भी मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसी समस्या को तकनीक के माध्यम से कम करने की कोशिश कर रहा है फरीदाबाद स्थित हेल्थटेक स्टार्टअप MediElaj। साल 2023 में शुरू हुई MediElaj आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल हेल्थ, नॉन-इनवेसिव हेल्थ स्क्रीनिंग और स्मार्ट हेल्थ कियोस्क को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ने पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य AI को डॉक्टर का विकल्प बनाना नहीं, बल्कि डॉक्टरों और मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था की पहुंच को ज्यादा लोगों तक बढ़ाना है। कंपनी के संस्थापकों के मुताबिक, खासकर Tier-2, Tier-3 शहरों और ग्रामीण तथा कम सेवा वाले इलाकों में यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है।
देबजीत पात्रा और उमेश खत्री ने शुरू किया सफर
MediElaj की शुरुआत देबजीत पात्रा और उमेश खत्री ने की। कंपनी की जानकारी के मुताबिक, देबजीत पात्रा ने फिजिक्स और फाइनेंस की पढ़ाई की है और उन्हें 35 वर्षों से अधिक का कारोबारी अनुभव है। वहीं उमेश खत्री इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक हैं और टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट तथा स्टार्टअप क्षेत्र में काम कर चुके हैं। संस्थापकों का मानना है कि भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्या सिर्फ संसाधनों की कमी नहीं है। कई बार संसाधन मौजूद होने के बावजूद मरीज और स्वास्थ्य सुविधा के बीच दूरी, जानकारी की कमी, डायग्नोस्टिक सुविधाओं का अभाव और विशेषज्ञ डॉक्टर तक समय पर पहुंच न होना इलाज में बाधा बनता है। यही वह अंतर है जिसे MediElaj अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और हेल्थ कियोस्क के जरिए कम करना चाहती है। देबजीत पात्रा ने स्पष्ट किया कि कंपनी AI को डॉक्टर की जगह खड़ा करने के बजाय ऐसी तकनीक विकसित करना चाहती है, जिससे डॉक्टर और मौजूदा हेल्थकेयर सिस्टम ज्यादा लोगों तक पहुंच सकें।
मोबाइल ऐप से आगे बढ़कर कियोस्क पर दांव
MediElaj का मॉडल केवल मोबाइल एप्लिकेशन तक सीमित नहीं है। कंपनी ने एक ऐसा हेल्थटेक इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम किया है जिसमें मोबाइल ऐप के साथ भौतिक हेल्थ कियोस्क भी शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक उसके स्मार्ट कियोस्क में AI आधारित फेस स्कैन, विभिन्न स्वास्थ्य मानकों की जांच, नॉन-इनवेसिव डायग्नोस्टिक डिवाइस, वाइटल मॉनिटरिंग और डिजिटल कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ा जा सकता है। कियोस्क के माध्यम से उपयोगकर्ता स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दर्ज कर सकता है, लक्षण बता सकता है और उपलब्ध उपकरणों के जरिए जरूरी स्वास्थ्य जांच करा सकता है। इसके बाद AI सिस्टम इन जानकारियों का विश्लेषण कर आगे की प्रक्रिया के लिए स्वास्थ्य संबंधी सुझाव दे सकता है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, कियोस्क में 50 से ज्यादा स्वास्थ्य जांचों के लिए मेडिकल-ग्रेड सेंसर और उपकरणों को एकीकृत करने की क्षमता है। इसमें ECG मॉड्यूल, SpO2 मॉनिटर, स्टेथोस्कोप, वजन मापने की सुविधा और अन्य स्वास्थ्य उपकरण शामिल किए जा सकते हैं।
कैसे काम करेगा AI हेल्थ कियोस्क?
MediElaj के प्रस्तावित कियोस्क मॉडल में मरीज के लिए प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल रखा गया है। पहले उपयोगकर्ता कियोस्क पर लॉगिन करता है। इसके बाद AI फेस स्कैन और उपलब्ध स्वास्थ्य उपकरणों के जरिए आवश्यक वाइटल पैरामीटर लिए जाते हैं। उपयोगकर्ता अपने लक्षण भी दर्ज कर सकता है। कंपनी के अनुसार, इसके बाद उसका AI डॉक्टर MediDOC उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करता है और जरूरत के अनुसार जांच या अगले कदम का सुझाव देता है। रिपोर्ट डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा सकती है और कंपनी की वेबसाइट के अनुसार रिपोर्ट WhatsApp या PDF के जरिए भी हासिल की जा सकती है। हालांकि, यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि AI आधारित स्क्रीनिंग या स्वास्थ्य-संबंधी सुझाव को हर स्थिति में वास्तविक चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं माना जा सकता। गंभीर बीमारी, आपात स्थिति या जटिल मामलों में प्रशिक्षित चिकित्सक की भूमिका आवश्यक बनी रहती है। MediElaj भी अपने मॉडल को डॉक्टरों और स्वास्थ्य व्यवस्था की पहुंच बढ़ाने के माध्यम के रूप में पेश कर रही है, न कि डॉक्टरों को पूरी तरह हटाने के तौर पर।
50 से ज्यादा हेल्थ टेस्ट और डिजिटल रिकॉर्ड
कंपनी का दावा है कि उसके हेल्थ कियोस्क में 50 से अधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांचों को नॉन-इनवेसिव तरीके से करने की क्षमता विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य शुरुआती स्तर पर स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान और नियमित स्वास्थ्य निगरानी को आसान बनाना है। इसके साथ MediElaj ऐप डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को भी जोड़ता है। कंपनी के अनुसार उपयोगकर्ता अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित कर सकता है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर के साथ साझा कर सकता है। इससे बार-बार अलग-अलग जगहों पर पुरानी रिपोर्टें ले जाने की जरूरत कम हो सकती है। ग्रामीण इलाकों के संदर्भ में यह सुविधा इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि किसी मरीज की पिछली जांच, रिपोर्ट और स्वास्थ्य इतिहास को डिजिटल रूप में उपलब्ध रखना डॉक्टर को बेहतर संदर्भ दे सकता है।
फंडिंग: दोस्तों और परिवार से करीब 1 लाख डॉलर
MediElaj ने अपनी शुरुआती यात्रा बड़े संस्थागत निवेश के बजाय संस्थापकों की निजी पूंजी से शुरू की। कंपनी के अनुसार संस्थापकों ने अब तक करीब 5 लाख डॉलर अपनी ओर से कारोबार और तकनीक विकसित करने में लगाए हैं। इसके बाद कंपनी ने Friends and Family राउंड में करीब 1 लाख डॉलर जुटाए। जून 2026 में इस फंडिंग की जानकारी सार्वजनिक हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार इस पूंजी का इस्तेमाल प्रोडक्ट डेवलपमेंट, कियोस्क प्रोटोटाइप, हेल्थ डिवाइस और सेंसर इंटीग्रेशन, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और पायलट डिप्लॉयमेंट की तैयारी में किया जाना है। इस तरह कंपनी के संस्थापकों के निवेश और बाहरी शुरुआती फंडिंग को मिलाकर करीब 6 लाख डॉलर की पूंजी तकनीक, कियोस्क और संचालन क्षमता विकसित करने में लगाई जा चुकी है। BioSpectrum ने भी करीब 6 लाख डॉलर के कुल पूंजी निवेश की जानकारी दी है।
कितने यूजर्स और कितने हेल्थ असेसमेंट?
YourStory की 25 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक MediElaj के प्लेटफॉर्म से 1 लाख से ज्यादा यूजर्स जुड़े हैं। कंपनी के अनुसार उसके कियोस्क के जरिए 1,000 से अधिक ऑफलाइन हेल्थ असेसमेंट और डायग्नोसिस किए जा चुके हैं, जबकि मोबाइल ऐप के जरिए 5,000 से अधिक डायग्नोसिस हुए हैं। इससे पहले अप्रैल 2026 में कंपनी ने बताया था कि उसके पायलट चरण में करीब 1 लाख ऐप डाउनलोड हो चुके थे और NCR में एक फिजिकल कियोस्क सेंटर पर हर महीने 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे थे। इन आंकड़ों में अलग-अलग रिपोर्टों में ‘यूजर्स’, ‘ऐप डाउनलोड’, ‘डायग्नोसिस’ और ‘असेसमेंट’ की अलग-अलग परिभाषाएं इस्तेमाल हो सकती हैं। इसलिए इन्हें कंपनी द्वारा बताए गए प्रगति संकेतक के रूप में देखना अधिक उचित है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित क्लिनिकल परिणाम के तौर पर।
बिजनेस मॉडल क्या है?
MediElaj का बिजनेस मॉडल फिलहाल कई संभावित राजस्व स्रोतों पर आधारित दिखाई देता है। कंपनी डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, हेल्थकेयर सेवाओं, B2B साझेदारियों और हेल्थ कियोस्क की तैनाती को कमाई के संभावित माध्यम के रूप में देख रही है। कियोस्क को अस्पतालों, क्लीनिकों, फार्मेसियों, डायग्नोस्टिक सेंटर, कॉरपोरेट वेलनेस कार्यक्रमों और सामुदायिक स्थानों में स्थापित करने की संभावना है। कंपनी का विचार यह है कि हर स्थान पर पूर्ण अस्पताल या बड़ा डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित करने की बजाय तकनीक आधारित छोटे स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया जाए। यह मॉडल कंपनियों और संस्थानों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए कोई अस्पताल अपने आसपास के क्षेत्र में कियोस्क स्थापित कर प्राथमिक स्क्रीनिंग कर सकता है और जरूरत पड़ने पर मरीज को विशेषज्ञ डॉक्टर या अस्पताल तक रेफर कर सकता है।
सरकार के डिजिटल हेल्थ मॉडल से भी जुड़ सकता है सिस्टम
भारत में डिजिटल हेल्थ का इकोसिस्टम पहले से तेजी से विकसित हो रहा है। 31 दिसंबर 2025 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए eSanjeevani पर 42.66 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके थे। MediElaj का मॉडल इसी व्यापक बदलाव के समानांतर विकसित हो रहा है, हालांकि यह सरकारी व्यवस्था का विकल्प नहीं है। कंपनी का फोकस AI, स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को एक भौतिक कियोस्क के जरिए समुदाय के नजदीक लाने पर है। कंपनी अस्पतालों, सरकारी संस्थानों, NGOs, कॉरपोरेट्स और डायग्नोस्टिक संगठनों के साथ साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही है।
छोटे शहरों और गांवों पर क्यों है फोकस?
भारत में डिजिटल हेल्थ के विस्तार के बावजूद एक बड़ी आबादी ऐसी है जिसे स्मार्टफोन, इंटरनेट, डिजिटल साक्षरता और भरोसेमंद स्वास्थ्य जानकारी तक समान पहुंच नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या केवल ऑनलाइन डॉक्टर से जुड़ने की नहीं होती। कई मामलों में मरीज को पहले यह जानना होता है कि उसकी स्थिति कितनी गंभीर है और किस तरह की जांच या विशेषज्ञ की जरूरत है। MediElaj का कियोस्क मॉडल इसी स्तर पर हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है। यदि किसी गांव या छोटे कस्बे में एक ऐसा केंद्र उपलब्ध हो जहां प्राथमिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, वाइटल जांच, डिजिटल रिकॉर्ड और दूरस्थ चिकित्सकीय कनेक्शन एक ही स्थान पर उपलब्ध हों, तो मरीज के लिए बड़े शहर की यात्रा की जरूरत कुछ मामलों में कम हो सकती है। लेकिन इसका सफल होना केवल कियोस्क लगाने पर निर्भर नहीं करेगा। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, इंटरनेट कनेक्टिविटी, उपकरणों का रखरखाव, मरीजों का भरोसा, जांच की गुणवत्ता और जरूरत पड़ने पर वास्तविक डॉक्टर तक पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती: भरोसा और क्लिनिकल वैलिडेशन
AI और स्वास्थ्य का मेल जितना आकर्षक है, उतना ही संवेदनशील भी। स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों में गलत जानकारी का सीधा असर मरीज पर पड़ सकता है। इसलिए AI मॉडल की सटीकता, मेडिकल डिवाइस की विश्वसनीयता, क्लिनिकल वैलिडेशन, डेटा सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। MediElaj ने अपनी वेबसाइट पर ISO 13485:2016 और ISO 14971:2019 से जुड़े अनुपालन का उल्लेख किया है। कंपनी ने मेडिकल सॉफ्टवेयर और डिवाइस इकोसिस्टम के लिए लागू SaMD और CDSCO आवश्यकताओं पर काम करने की भी जानकारी दी है। अप्रैल 2026 में कंपनी के CEO उमेश खत्री ने नियामकीय मंजूरियों, डेटा प्राइवेसी और AI डायग्नोसिस की सटीकता को प्रमुख चुनौतियों में गिनाया था। उन्होंने यह भी बताया था कि कंपनी SaMD लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुकी है और टेस्ट लाइसेंस मिल चुका है।
अगले 12 से 18 महीने बेहद महत्वपूर्ण
MediElaj के लिए अगला चरण तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले उसे मजबूत और प्रमाणित करने का है। कंपनी के संस्थापकों के मुताबिक अगले 12 से 18 महीनों में AI, डायग्नोस्टिक इंटीग्रेशन और हेल्थ कियोस्क को मजबूत करना प्राथमिकता होगी। अप्रैल में कंपनी ने अगले एक-दो वर्षों में कम से कम 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य बताया था। इसके लिए कंपनी करीब 40-50 लाख डॉलर की फंडिंग जुटाने की संभावना तलाश रही थी, ताकि कियोस्क नेटवर्क, AI क्षमता और बाजार विस्तार को गति दी जा सके। लंबी अवधि में कंपनी Tier-1, Tier-2 और Tier-3 शहरों के साथ-साथ कम सेवा वाले क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाना चाहती है। भविष्य में समान स्वास्थ्य चुनौतियों वाले दूसरे उभरते बाजारों में भी इस मॉडल को दोहराने की संभावना कंपनी तलाश रही है।
AI डॉक्टर से ज्यादा महत्वपूर्ण है पूरा हेल्थ सिस्टम
MediElaj की कहानी को केवल ‘AI डॉक्टर’ की कहानी के रूप में देखना शायद सही नहीं होगा। असल प्रयोग यह है कि AI, मेडिकल डिवाइस, डिजिटल रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं का एक नया डिलीवरी मॉडल बनाया जा सकता है या नहीं। अगर यह मॉडल सफल होता है तो गांव के मरीज को हर छोटी जांच के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। वहीं गंभीर मामलों की पहचान पहले होने पर मरीज को समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंचाना भी संभव हो सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, AI की क्षमता को लेकर अतिशयोक्ति से बचना भी जरूरी है। स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक तभी उपयोगी साबित होगी जब उसके पीछे मजबूत क्लिनिकल प्रमाण, प्रशिक्षित मानव विशेषज्ञ, सुरक्षित डेटा सिस्टम और स्पष्ट रेफरल व्यवस्था मौजूद हो। यही कारण है कि MediElaj के लिए असली परीक्षा कियोस्क की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यह साबित करना होगी कि ये कियोस्क ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को सस्ती, विश्वसनीय, सुरक्षित और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से वास्तव में जोड़ सकते हैं।
डिजिटल को फिज़िकल से जोड़ने की कवायद
भारत में हेल्थटेक का अगला बड़ा चरण केवल मोबाइल ऐप और वीडियो कंसल्टेशन तक सीमित नहीं रहने वाला है। अब चुनौती डिजिटल स्वास्थ्य को जमीन पर मौजूद मरीजों और स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की है। MediElaj इसी दिशा में AI, स्मार्ट कियोस्क और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को एक साथ लाने का प्रयास कर रही है। फरीदाबाद से शुरू हुई यह पहल अभी विस्तार के शुरुआती दौर में है। करीब 1 लाख डॉलर की बाहरी शुरुआती फंडिंग, संस्थापकों का लगभग 5 लाख डॉलर का निवेश, 1 लाख से अधिक यूजर्स का कंपनी द्वारा बताया गया आंकड़ा और कियोस्क नेटवर्क को Tier-2, Tier-3 तथा ग्रामीण इलाकों तक ले जाने की योजना इसके महत्वाकांक्षी रोडमैप को दिखाती है।
भविष्य पर नजर
आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि MediElaj का ‘AI + Kiosk + Doctor’ मॉडल भारत के उन इलाकों में कितनी मजबूत जगह बना पाता है, जहां आज भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती है। अगर तकनीक के साथ क्लिनिकल विश्वसनीयता, डेटा सुरक्षा और मानव डॉक्टरों की भूमिका का संतुलन कायम रहा, तो ऐसे हेल्थ कियोस्क ग्रामीण भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने वाली तकनीकों में शामिल हो सकते हैं।
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