पत्रकारों से मारपीट पर बोले अभिषेक रंजन, कहा- सवाल पूछना दुश्मनी नहीं

The CSR Journal Magazine

राजनीतिक प्रतिक्रिया से गूंजा बेतिया

बेतिया के चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने हाल ही में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट और धमकी की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं, और उनके साथ हिंसा को रोकना चाहिए। विधायक ने स्पष्ट किया कि सवाल पूछना किसी के लिए दुश्मनी का कारण नहीं बनता। यदि किसी को सवाल पसंद नहीं है, तो उसका जवाब देना चाहिए, लेकिन पत्रकारों के साथ मारपीट कभी भी ठीक नहीं है।

पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का मुद्दा

अभिषेक रंजन ने सहरसा और बेतिया में पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। उनकी शिकायतों में बेतिया जीएमसीएच में पत्रकारों के मोबाइल छीनने और मारपीट की घटनाओं का जिक्र भी शामिल है। ऐसी घटनाएं पत्रकारों में असंतोष पैदा कर रही हैं।

दबाव बनाना लोकतंत्र के खिलाफ

विधायक ने कहा कि पूरे देश में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और दबाव बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में हालिया महिला पत्रकार पर पुलिसकर्मियों की मारपीट का मामला उठाया। अभिषेक रंजन ने दो टूक कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को जवाब देना होगा। मीडिया को निशाना बनाना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।

एफआईआर के साथ त्वरित कार्रवाई की जरूरत

विधायक ने जोर देकर कहा कि घटना के बाद सिर्फ एफआईआर दर्ज करना नाकाफी है। निष्पक्ष जांच और दोषियों पर जल्‍द कार्रवाई जरूरी है, तभी पत्रकारों का कानून-व्यवस्था में विश्वास कायम रहेगा। यदि ऐसी घटनाएं रुकती नहीं हैं, तो पत्रकारों का हौंसला टूट सकता है। उन्होंने स्थानीय सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का भी अनुरोध किया।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाएंगे

अभिषेक रंजन ने आश्वासन दिया कि यदि चनपटिया, पश्चिम चंपारण या बिहार में कहीं पर भी पत्रकारों पर हमला होता है, तो उनकी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को उठाएगी। आगामी विधानसभा सत्र में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान की तरह हैं।

लोकतंत्र के सवालों का सम्मान जरूरी

विधायक ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना जरूरी है। जब नागरिक सरकार से सवाल करते हैं, तो यह उनकी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली विचारधाराओं का मुकाबला करना चाहिए। यदि आज पत्रकार सवाल पूछ रहे हैं, तो कल आम जनता भी सवाल उठाने का अधिकार रखती है। सवालों का सामना करना ही सही लोकतंत्र की पहचान है।

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