T1 के पुनर्विकास को लेकर बढ़ा विवाद, 25 अक्टूबर से 265 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर डालने की योजना
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के हवाई यातायात से जुड़ा बड़ा बदलाव अब विवाद में घिर गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 (T1) के चरणबद्ध पुनर्विकास के लिए यहां संचालित उड़ानों को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (NMIA) और टर्मिनल-2 (T2) की ओर स्थानांतरित करने की योजना पर एयरपोर्ट संचालक मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) और एयरलाइंस कंपनियों के बीच मतभेद गहरा गए हैं। विवाद को सुलझाने के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को एयरलाइंस और MIAL के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। बैठक की अध्यक्षता नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा करेंगे।
विवाद का सबसे अहम मुद्दा यह है कि T1 के पुनर्विकास के दौरान मुंबई एयरपोर्ट की क्षमता को कैसे संभाला जाए। MIAL ने एयरलाइंस से 25 अक्टूबर से करीब एक-तिहाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अस्थायी रूप से नवी मुंबई एयरपोर्ट स्थानांतरित करने या संबंधित उड़ानों में कटौती करने को कहा है। इसके तहत मुंबई एयरपोर्ट के T2 से संचालित होने वाली 770 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान उड़ानों में से करीब 265 उड़ानों को अस्थायी रूप से हटाने की योजना है। यह व्यवस्था T1 के पुनर्विकास के दौरान T2 पर बढ़ने वाले घरेलू यातायात के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।
25 अक्टूबर से बदल सकता है उड़ानों का संचालन
MIAL का कहना है कि T1 के पुनर्विकास के पहले चरण में उत्तर दिशा के T1B हिस्से को हटाया जाएगा। यह काम जनवरी 2027 से शुरू करने की योजना है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही यातायात का पुनर्गठन करना जरूरी माना जा रहा है। MIAL के अनुसार, मुंबई एयरपोर्ट पर सालाना करीब 5.5 करोड़ यात्री आते हैं और पुनर्विकास के पहले चरण में लगभग 50 लाख यात्रियों की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित होगी। कंपनी का दावा है कि कुल यात्री यातायात का करीब 91 प्रतिशत हिस्सा सामान्य रूप से चलता रहेगा। MIAL ने एयरलाइंस को नवी मुंबई एयरपोर्ट पर अस्थायी रूप से उड़ानें स्थानांतरित करने का विकल्प दिया है। लेकिन एयरलाइंस का कहना है कि वे T1 के सुरक्षित और समयबद्ध पुनर्विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन्हें उड़ानों और पहले से आवंटित स्लॉट में एकतरफा कटौती या बदलाव पर आपत्ति है। एयरलाइंस ने इस पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग की है।
एयरलाइंस ने पूछा- 33 फीसदी कटौती का आधार क्या?
एयरलाइंस की ओर से सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि आखिर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 33 फीसदी की कटौती का आधार क्या है। एयरलाइन ऑपरेटर्स कमेटी ने MIAL से पूछा है कि यह 33 फीसदी आंकड़ा टर्मिनल क्षमता, यात्री संख्या, उड़ानों या स्लॉट में से किस आधार पर निकाला गया है। इसके साथ ही एयरलाइंस ने 2026 के दौरान T1 और T2 की महीनेवार वास्तविक क्षमता और उपयोग के आंकड़े भी मांगे हैं। एयरलाइंस ने 2020 से T1 के भविष्य और उसके पुनर्विकास को लेकर हुई बैठकों के रिकॉर्ड भी मांगे हैं। MIAL का कहना है कि T1 के भविष्य को लेकर एयरलाइंस के साथ 2020 से व्यापक विचार-विमर्श होता रहा है और पुनर्विकास योजना को भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (AERA) के समक्ष भी रखा गया था। वहीं एयरलाइंस ने इन बैठकों के कार्यवृत्त और निर्णयों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
MIAL का तर्क- पुराना ढांचा, सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
MIAL और अडाणी एयरपोर्ट्स का कहना है कि T1 का मौजूदा ढांचा काफी पुराना हो चुका है और सुरक्षा कारणों से इसका पुनर्विकास अब टाला नहीं जा सकता। अडाणी एयरपोर्ट्स के मुताबिक T1B के पुराने हिस्से की उम्र करीब छह दशक है और लंबे समय से इसमें सुधार के अस्थायी उपाय किए जाते रहे हैं। कंपनी का कहना है कि नवी मुंबई एयरपोर्ट के उपलब्ध होने के बाद अब T1 का पुनर्विकास चरणबद्ध तरीके से करना संभव हुआ है। AERA के दस्तावेजों में भी T1 के अलग-अलग हिस्सों की उम्र और संरचनात्मक स्थिति को लेकर जानकारी दी गई है। नियामकीय दस्तावेज के मुताबिक T1 परिसर में T1A, T1B और T1C तीन हिस्से हैं। T1B का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 1960 के दशक का है, T1A का निर्माण 1992 में हुआ था, जबकि T1C को 2010 में बनाया गया था। संरचनात्मक अध्ययन में T1A और T1B में कुछ संरचनात्मक समस्याओं का उल्लेख किया गया है, जबकि T1C की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है। यही वजह है कि MIAL पूरे T1 परिसर को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पुनर्विकास के बाद T1 की यात्री संभालने की क्षमता मौजूदा करीब 1.5 करोड़ यात्रियों से बढ़कर लगभग 2 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष करने की योजना है।
अडाणी के नियंत्रण में दोनों एयरपोर्ट, इसलिए भी उठ रहे सवाल
इस विवाद का एक संवेदनशील पहलू यह भी है कि मुंबई एयरपोर्ट और नवी मुंबई एयरपोर्ट दोनों का संचालन अडाणी एयरपोर्ट्स समूह से जुड़ा है। ऐसे में कुछ एयरलाइंस को यह चिंता है कि एक एयरपोर्ट की क्षमता कम होने पर दूसरे एयरपोर्ट की ओर उड़ानों को स्थानांतरित करने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया जा रहा है। एयरलाइंस चाहती हैं कि उड़ानों और स्लॉट में बदलाव पारदर्शी आंकड़ों तथा अंतरराष्ट्रीय स्लॉट आवंटन नियमों के अनुरूप हो। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाली इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। एयरलाइंस का कहना है कि नवी मुंबई एयरपोर्ट के विकास का वे समर्थन करती हैं, लेकिन संचालन को अचानक स्थानांतरित करने से यात्रियों, एयरलाइंस, ग्राउंड हैंडलिंग और कनेक्टिविटी पर असर पड़ सकता है।
किन एयरलाइंस पर पड़ सकता है असर?
प्रस्तावित व्यवस्था का असर करीब 46 एयरलाइंस पर पड़ने की बात सामने आई है। इनमें घरेलू और विदेशी दोनों एयरलाइंस शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इंडिगो की करीब 74 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, एयर इंडिया की 33, अकासा एयर की 11, एयर इंडिया एक्सप्रेस की 7 और स्पाइसजेट की 5 उड़ानों पर कटौती का असर पड़ सकता है। कुछ विदेशी एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय स्लॉट पर भी असर पड़ने की संभावना है। MIAL का कहना है कि यह कटौती स्थायी नहीं होगी। T1 का पुनर्विकास पूरा होने के बाद पुराने स्लॉट बहाल करने के साथ अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध कराने की योजना है। कंपनी इसे मुंबई के हवाई ढांचे को लंबे समय के लिए मजबूत करने की अस्थायी व्यवस्था बता रही है।
नवी मुंबई एयरपोर्ट को मिलेगा बड़ा मौका
उड़ानों के प्रस्तावित स्थानांतरण से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को भी बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात संभालने का अवसर मिलेगा। MIAL और अडाणी एयरपोर्ट्स ने एयरलाइंस को नवी मुंबई में नई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रोत्साहन देने की पेशकश की है। इसके तहत नई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लैंडिंग शुल्क में 100 फीसदी छूट और यात्रियों के लिए दोनों एयरपोर्ट के उपयोगकर्ता विकास शुल्क में अंतर की भरपाई के लिए नकद वाउचर देने की योजना बताई गई है। हालांकि एयरलाइंस का कहना है कि केवल आर्थिक प्रोत्साहन इस विवाद का समाधान नहीं है। उनका मुख्य सवाल T1 के पुनर्विकास की विस्तृत योजना, निर्माण के चरण, उपलब्ध क्षमता, उड़ानों के स्थानांतरण का आधार और स्लॉट प्रबंधन की प्रक्रिया को लेकर है।
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है तो मुंबई से उड़ान भरने वाले यात्रियों को अपने टिकट और उड़ान की जानकारी पहले से जांचना बेहद जरूरी होगा। कुछ यात्रियों की उड़ान मुंबई एयरपोर्ट के T2 से जारी रह सकती है, जबकि कुछ उड़ानों को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे खासकर मुंबई शहर, पश्चिमी उपनगरों और दक्षिण मुंबई से आने वाले यात्रियों के यात्रा समय पर असर पड़ सकता है। एयरपोर्ट बदलने की स्थिति में यात्रियों को अतिरिक्त सड़क यात्रा के लिए समय रखना होगा। कनेक्टिंग उड़ानों वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव और महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट अलग-अलग स्थानों पर हैं। एयरलाइंस से अपेक्षा की जा रही है कि वे प्रभावित यात्रियों को संदेश, ई-मेल और अन्य माध्यमों से बदलाव की जानकारी दें।
अब मंगलवार की बैठक पर टिकी नजर
फिलहाल पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि T1 का पुनर्विकास भी समय पर शुरू हो और एयरलाइंस के मौजूदा संचालन को भी अचानक नुकसान न पहुंचे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की मंगलवार की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें MIAL, अडाणी एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस के बीच किसी व्यावहारिक समाधान पर सहमति बनाने की कोशिश होगी। बैठक ऐसे समय हो रही है जब MIAL की ओर से एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय स्लॉट में अस्थायी कटौती के लिए अपनी पसंद बताने की समयसीमा भी तय की गई है। दरअसल, मुंबई का हवाई ढांचा पहले ही क्षमता की सीमा पर काम कर रहा है। ऐसे में T1 को लंबे समय तक पुराने ढांचे के साथ चलाना सुरक्षा और यात्री सुविधा के लिहाज से चुनौती है, जबकि एक साथ बड़ी संख्या में उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट पर भेजना एयरलाइंस और यात्रियों दोनों के लिए संचालन संबंधी परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए मंगलवार की बैठक में सुरक्षा, क्षमता, स्लॉट, एयरलाइंस के परिचालन अधिकार और यात्रियों की सुविधा—इन सभी पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
अगर सरकार, MIAL और एयरलाइंस के बीच सहमति बनती है तो T1 का प्रस्तावित पुनर्विकास मुंबई के हवाई ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। लेकिन अगर गतिरोध जारी रहता है तो अक्टूबर के अंत से उड़ानों के संचालन, स्लॉट और यात्रियों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
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