दिल्ली हवाई अड्डे का मेगा विस्तार: सालाना 12.5 करोड़ यात्रियों को संभालने के लिए तैयार होगा IGI, टर्मिनल-3 पर बनेगा हाई-टेक ‘Pier E’
देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने जा रही है। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के नए 10-वर्षीय मास्टर प्लान के तहत हवाई अड्डे की सालाना पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता को मौजूदा करीब 10.4 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ से अधिक करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। इस मेगा विस्तार का सबसे मुख्य आकर्षण टर्मिनल-3 (T3) पर बनने वाला नया इंटरनेशनल पियर-ई (Pier E) होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को संभालने की क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। विस्तार योजना के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को 2030 की शुरुआत और अंतिम चरण को 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक एविएशन हब्स की कतार में मजबूती से खड़ा हो जाएगा।
टर्मिनल-3 पर नया ‘पियर-ई’: क्षमता और संरचना में बड़ा बदलाव
विस्तार योजना का मुख्य केंद्र बिंदु टर्मिनल-3 (T3) है। वर्तमान में T3 की कुल क्षमता 5 करोड़ यात्री प्रति वर्ष है, जिसमें 3 करोड़ अंतरराष्ट्रीय और 2 करोड़ घरेलू यात्री शामिल हैं। मास्टर प्लान के तहत यहाँ एक नया इंटरनेशनल पियर-ई (Pier E) जोड़ा जाएगा।
• क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि: अकेले इस नए पियर-ई की सालाना क्षमता लगभग 1.6 करोड़ (1.6 CPA) यात्रियों को संभालने की होगी।
• T3 की नई क्षमता: पियर-ई के चालू होने के बाद टर्मिनल-3 की कुल क्षमता 5 करोड़ से बढ़कर 6.6 करोड़ यात्री प्रति वर्ष हो जाएगी। इसमें सालाना 4.6 करोड़ अंतरराष्ट्रीय और 2 करोड़ डोमेस्टिक यात्री सफर कर सकेंगे।
• समय-सीमा: डायल का प्रस्ताव है कि इस पियर-ई को अप्रैल 2030 तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाए।
पियर क्या होता है? पियर दरअसल एयरपोर्ट टर्मिनल से जुड़ी एक ऐसी अत्याधुनिक लंबी संरचना होती है, जहाँ से यात्री इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच के बाद एयरोब्रिज के जरिए सीधे विमान तक पहुँचते हैं। पियर-ई के आने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए गेट्स और एयरोब्रिज की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे विमानों की बोर्डिंग प्रक्रिया बेहद तेज़ हो जाएगी।
ब्रिक्स समिट से पहले ‘पियर सी’ का अपग्रेडेशन
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और यात्रियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए डायल ने हाल ही में एक और बड़ा कदम उठाया है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के मद्देनजर विदेशी मेहमानों की सुगम आवाजाही के लिए टर्मिनल-3 के पियर-सी (Pier C) को घरेलू से इंटरनेशनल ऑपरेशन्स के लिए बदल दिया गया है। इसे सितंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है, जिसके बाद तात्कालिक तौर पर इंटरनेशनल पैसेंजर कैपेसिटी बढ़कर 3.1 करोड़ सालाना हो गई है। यहाँ फास्ट इमिग्रेशन काउंटर, हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था और बड़े वाइड-बॉडी (चौड़े आकार के) विमानों को पार्क करने व संभालने की विशेष सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं।
टर्मिनल-1 और टर्मिनल-2 के लिए क्या है योजना?
मास्टर प्लान में केवल T3 ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट के अन्य टर्मिनल्स के लिए भी स्पष्ट रणनीति बनाई गई है:
1. टर्मिनल-1 (T1) का आंतरिक विस्तार: घरेलू उड़ानों को संभालने वाले T1 की मौजूदा क्षमता करीब 4 करोड़ यात्री प्रति वर्ष है। डायल यहाँ बिना किसी बड़े ढांचे या स्ट्रक्चरल बदलाव के, आंतरिक रूप से चेक-इन काउंटर और सिक्योरिटी चेक लेन की संख्या बढ़ाने जा रहा है। इससे बिना निर्माण कार्य के ही टर्मिनल की घरेलू क्षमता (4.5 CPA) में मामूली और महत्वपूर्ण इजाफा हो जाएगा।
2. टर्मिनल-2 (T2) और भविष्य का T4: T2 टर्मिनल (क्षमता 1.4 करोड़) अगले कुछ वर्षों तक इसी तरह काम करता रहेगा। लेकिन अगले दशक में, हवाई यातायात की मांग के आधार पर T2 को पूरी तरह से तोड़कर उसकी जगह एक विशाल टर्मिनल-4 (T4) बनाने का प्रस्ताव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेटर नोएडा में जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) के आने के बाद भी दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव कम नहीं हुआ है, यही वजह है कि डायल समय से पहले अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है।
यात्रियों की अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा
12.5 करोड़ यात्रियों की विशाल संख्या को संभालने के लिए एयरपोर्ट के अंदर और बाहर कई अन्य सहायक बुनियादी ढांचों को भी अपग्रेड किया जा रहा है:
• ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर (APM): टर्मिनलों के बीच यात्रियों की आवाजाही को हवा की रफ्तार देने के लिए एक नया ट्रांजिट सिस्टम (एयरपोर्ट मेट्रो/पैसेंजर मूवर) तैयार किया जा रहा है, जिससे कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ना बेहद आसान हो जाएगा।
• रनवे अपग्रेडेशन: हाल ही में एयरपोर्ट का तीसरा मुख्य रनवे (11R/29L) सात महीने की मरम्मत और हाई-टेक अपग्रेडेशन के बाद फिर से खोल दिया गया है, जिससे रनवे की क्षमता और विमानों की लैंडिंग-टेकऑफ फ्रीक्वेंसी बेहतर हुई है।
• स्मार्ट इमिग्रेशन: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और क्रू मेंबर्स के लिए देश में पहली बार FTI-TTP (Fast Track Immigration-Trusted Traveller Program) गेट्स के जरिए त्वरित प्रोसेसिंग व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे बोर्डिंग का समय आधा रह गया है।
• ट्रैफिक में सुधार: हवाई अड्डे के आसपास के बाहरी इलाकों में जाम की स्थिति से निपटने के लिए नए फ्लाईओवर और सड़कों के चौड़ीकरण की योजना पर भी लोक निर्माण विभाग और डायल मिलकर काम कर रहे हैं।
एविएशन हब के रूप में भारत की नई उड़ान
डायल के सूत्रों के अनुसार, इस विस्तार योजना का असल मकसद दिल्ली को लंदन के हीथ्रो या दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तर्ज पर एक वैश्विक पारगमन केंद्र (Transit Hub) बनाना है। जब अप्रैल 2030 तक पियर-ई चालू हो जाएगा, तो यात्रियों को सिक्योरिटी और इमिग्रेशन की लंबी लाइनों से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। इसके अतिरिक्त, नए एयरोब्रिज अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टर्नअराउंड समय (विमान के उतरने और दोबारा उड़ान भरने के बीच का समय) को कम करेंगे, जिससे एयरलाइंस कंपनियों को भी भारी वित्तीय बचत होगी। कुल मिलाकर, आने वाले चार से पांच वर्षों में दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट बुनियादी ढांचे, यात्री क्षमता और अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाओं के मामले में विश्व के शीर्ष हवाई अड्डों को मात देने के लिए तैयार हो रहा है।
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