महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.07 करोड़ नाम बाहर, लेकिन क्या हमेशा के लिए खत्म हो गया मतदान का अधिकार? जानिए पूरा सच
महाराष्ट्र की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 ने राज्य की राजनीति और चुनावी व्यवस्था में बड़ी बहस छेड़ दी है। राज्य के करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं होने या अलग श्रेणी में रखे जाने की खबर के बाद आम नागरिकों के बीच चिंता बढ़ गई है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटाए जाने का फैसला नहीं हुआ है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन मतदाताओं को फिलहाल “Uncollectable Enumeration Form” श्रेणी में रखा गया है और ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद मतदाताओं को अपना नाम जांचने तथा आवश्यक प्रक्रिया के जरिए दावा या सुधार करने का अवसर उपलब्ध है। राज्य में कुल लगभग 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। SIR के घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान लगभग 7.71 करोड़ मतदाताओं, यानी करीब 78.85 प्रतिशत, के हस्ताक्षरित एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त हुए। जबकि लगभग 2.07 करोड़ मतदाता, जो कुल मतदाताओं का करीब 21.15 प्रतिशत हैं, विभिन्न कारणों से “अनकलेक्टेबल” श्रेणी में रखे गए।
क्या 2.07 करोड़ नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गए?
इस सवाल का सीधा जवाब है—नहीं, ऐसा मानना सही नहीं होगा। “अनकलेक्टेबल” श्रेणी में रखा जाना अपने-आप में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार समाप्त होने का अर्थ नहीं है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, यह SIR की गणना और सत्यापन प्रक्रिया का एक चरण है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे केवल राज्य स्तर के बड़े आंकड़े को देखकर निष्कर्ष न निकालें, बल्कि सबसे पहले यह जांचें कि उनका अपना नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं और उनके विवरण सही हैं या नहीं।
आखिर 2.07 करोड़ मतदाता किस श्रेणी में रखे गए?
SIR प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म एकत्र नहीं हो सके या जिनके बारे में सत्यापन के दौरान अलग-अलग स्थितियां सामने आईं, उन्हें विभिन्न श्रेणियों में रखा गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें मुख्य रूप से निम्न कारण शामिल हैं—
पते पर अनुपस्थित या नहीं मिले- लगभग 76.80 लाख
बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता दर्ज किए गए जिन्हें बूथ स्तर के अधिकारियों के सत्यापन के दौरान उनके दर्ज पते पर नहीं पाया जा सका। कई मामलों में मतदाता अस्थायी रूप से बाहर हो सकते हैं, काम के कारण दूसरे शहर में रह सकते हैं या सत्यापन के समय घर पर उपलब्ध नहीं रहे होंगे।
स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए- लगभग 75.52 लाख
ऐसे मतदाताओं को इस श्रेणी में रखा गया जिनके बारे में सत्यापन के दौरान पाया गया कि वे पुराने पते से स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं। मुंबई, ठाणे, पुणे और अन्य बड़े शहरों में नौकरी, मकान बदलने और पलायन के कारण मतदाता पते बदलना आम बात है।
मृतक मतदाता- लगभग 34.81 लाख
सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम पुराने मतदाता रिकॉर्ड में बने हुए थे। मतदाता सूची को अद्यतन रखने के लिए ऐसे रिकॉर्ड का सत्यापन आवश्यक माना जाता है।
डुप्लीकेट या पहले से दूसरी जगह पंजीकृत- लगभग 17.63 लाख
कुछ मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने या पहले से किसी अन्य जगह पंजीकृत होने की स्थिति सामने आई।
अन्य मामले- लगभग 2.23 लाख
इनमें वे मामले शामिल हो सकते हैं जहां फॉर्म मिलने या अन्य प्रशासनिक कारणों के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इस प्रकार 2.07 करोड़ का आंकड़ा कई अलग-अलग श्रेणियों का संयुक्त आंकड़ा है और इसे केवल “2.07 करोड़ लोगों का वोटिंग अधिकार खत्म” के रूप में समझना सही नहीं है।
30 जून से 17 अगस्त तक चला घर-घर सत्यापन अभियान
महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया के तहत 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक व्यापक घर-घर सत्यापन अभियान चलाया गया। इस अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO मतदाताओं के पंजीकृत पते पर पहुंचे और एन्यूमरेशन फॉर्म के माध्यम से मतदाता विवरण का सत्यापन किया गया। राज्य की विशाल आबादी और बड़े भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए यह एक व्यापक प्रशासनिक अभ्यास था।चुनावी अधिकारियों के सामने कई चुनौतियां भी रहीं—
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महानगरों में लगातार मकान बदलने वाले लोग,
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नौकरी के लिए दूसरे शहरों में रहने वाले नागरिक,
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बंद या खाली मकान,
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पुराने पते पर बने मतदाता रिकॉर्ड,
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मृतक मतदाताओं के नाम,
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एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम और
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फॉर्म जमा न होने के मामले।
इन्हीं कारणों से बड़ी संख्या में मतदाता “अनकलेक्टेबल” श्रेणी में पहुंचे।
महाराष्ट्र के बड़े शहरों में आंकड़े ने बढ़ाई चिंता
2.07 करोड़ मतदाताओं का आंकड़ा केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। राज्य के कई बड़े शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाता इस श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। बड़े शहरों में मकान बदलने और आबादी के लगातार स्थानांतरण को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ठाणे, पुणे, मुंबई उपनगर, नागपुर, नाशिक और मुंबई शहर जैसे प्रमुख जिलों में बड़ी संख्या में मतदाता इस श्रेणी में सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरीय क्षेत्रों में मतदाता सूची को अपडेट रखना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि लोग अक्सर किराए का घर बदलते हैं, नौकरी के लिए दूसरे शहर जाते हैं, परिवार के साथ स्थानांतरित होते हैं या पुराने पते पर उनका नाम बना रहता है।
राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल
इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के “अनकलेक्टेबल” श्रेणी में आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं और कुछ कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई कि कहीं वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम गलती से ड्राफ्ट सूची से बाहर तो नहीं हो गए। कुछ स्थानों पर यह सवाल भी उठाया गया कि—
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क्या सभी मतदाताओं तक पर्याप्त जानकारी पहुंची?
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क्या BLO वास्तव में हर पते तक पहुंचे?
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क्या सत्यापन के लिए पर्याप्त समय मिला?
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क्या ऑनलाइन प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सकता था?
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क्या बूथ स्तर पर अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है?
कुछ विधानसभा क्षेत्रों में “अनकलेक्टेबल” फॉर्म का प्रतिशत काफी अधिक रहने के बाद राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने बूथ-वार जानकारी और अधिक पारदर्शिता की मांग भी की है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, अब हर मतदाता को क्या करना चाहिए?
यह पूरा मामला अब नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। हर मतदाता को सबसे पहले अपनी ड्राफ्ट मतदाता सूची जांचनी चाहिए। विशेष रूप से यह देखना जरूरी है कि-
आपका नाम सूची में है या नहीं?
आपका नाम सही लिखा गया है या नहीं?
आपका पता सही है या नहीं?
विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र की जानकारी सही है या नहीं?
परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी सूची में मौजूद हैं या नहीं?
यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं दिखाई देता है, तो उसे तुरंत संबंधित चुनाव कार्यालय और उपलब्ध आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से दावा या आवेदन करना चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की SIR व्यवस्था में मतदाता अपने EPIC नंबर के माध्यम से जानकारी खोज सकते हैं और संबंधित सूचियां भी देख सकते हैं।
नाम नहीं है तो घबराएं नहीं, लेकिन इंतजार भी न करें
मतदाता सूची से नाम गायब होने की स्थिति में सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि नागरिक चुनाव के दिन तक इंतजार करें। ड्राफ्ट सूची का उद्देश्य ही यह है कि नागरिक उसे जांच सकें और यदि कोई गलती हो तो समय रहते सुधार या दावा कर सकें। चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया में सामान्यतः—
फॉर्म-6- नए मतदाता के पंजीकरण या पात्र व्यक्ति का नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
फॉर्म-7- गलत या अपात्र नाम हटाने के संबंध में उपयोग किया जाता है।
फॉर्म-8- मतदाता के नाम, पते या अन्य विवरण में सुधार या संशोधन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मतदाताओं को अपनी स्थिति के अनुसार सही प्रक्रिया अपनानी चाहिए और आधिकारिक चुनावी सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए।
SIR क्यों किया जा रहा है?
मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। यदि मतदाता सूची में मृत लोगों के नाम बने रहें, एक व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज हो, पुराने पते पर मतदाता बने रहें या पात्र नए मतदाताओं का नाम शामिल न हो, तो चुनावी प्रक्रिया की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक अद्यतन और सटीक बनाना है।लेकिन इतनी बड़ी प्रक्रिया में यह भी जरूरी है कि कोई वास्तविक और पात्र मतदाता गलती से बाहर न रह जाए। इसीलिए ड्राफ्ट सूची, दावे, आपत्तियां और सत्यापन की आगे की प्रक्रिया लोकतांत्रिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मुंबई और महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
महाराष्ट्र देश के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्यों में शामिल है। यहां मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर जैसे बड़े शहरी केंद्र हैं, वहीं बड़ी ग्रामीण आबादी भी है। राज्य में मतदाता संख्या लगभग 9.78 करोड़ होने के कारण मतदाता सूची का कोई भी बड़ा बदलाव सीधे चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है। 2.07 करोड़ का आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य के कुल मतदाताओं का करीब पांचवां हिस्सा है। यही कारण है कि चुनाव अधिकारी लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि नागरिक केवल इस बड़े आंकड़े को देखकर यह न मान लें कि सभी नाम स्थायी रूप से हटा दिए गए हैं। अंतिम स्थिति व्यक्तिगत सत्यापन और निर्धारित दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद तय होगी।
नागरिकों के लिए सबसे बड़ी अपील—अपना नाम जरूर जांचें
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण संदेश बेहद सीधा है- “अगर आप महाराष्ट्र के मतदाता हैं, तो अपनी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जरूर जांचें।” सिर्फ यह मान लेना कि पिछले चुनाव में आपका नाम था, इसलिए इस बार भी अपने-आप मौजूद होगा—सही तरीका नहीं है। विशेष रूप से उन लोगों को अपना नाम जांचना चाहिए जिन्होंने हाल के वर्षों में घर बदला है, दूसरे शहर से महाराष्ट्र आए हैं, महाराष्ट्र के भीतर नया पता लिया है, शादी के बाद पता बदला है, लंबे समय से पुराने पते पर नहीं रह रहे हैं, परिवार में किसी सदस्य का नाम स्थानांतरित कराया है या पहले मतदाता सूची से संबंधित कोई सुधार आवेदन किया है।
2.07 करोड़ का आंकड़ा बड़ा है, लेकिन स्थायी डिलीशन मानना जल्दबाजी
महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया में लगभग 2.07 करोड़ मतदाता “Uncollectable Enumeration Form” श्रेणी में आए हैं और उनके नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल न होने की स्थिति बनी है। यह निश्चित रूप से एक बेहद बड़ा आंकड़ा है और इसने राजनीतिक तथा प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसे 2.07 करोड़ मतदाताओं का स्थायी रूप से मतदान अधिकार समाप्त होना नहीं माना जा सकता। अब अगला महत्वपूर्ण कदम नागरिकों का है—
अपना नाम जांचें,
गलती होने पर तुरंत दावा करें,
सही दस्तावेज प्रस्तुत करें और
मतदाता सूची की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें।
लोकतंत्र में वोट केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि नागरिक की भागीदारी की सबसे महत्वपूर्ण ताकत है। इसलिए महाराष्ट्र के हर मतदाता के लिए इस समय अपनी वोटर लिस्ट जांचना बेहद जरूरी हो गया है।
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