दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.5 लाख नाम गायब: तुगलकाबाद में सबसे बड़ा झटका, 30 सितंबर तक मौका

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में हाल ही में जारी हुई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47,56,722 वोटर्स का नाम नहीं है। जम्मू-कश्मीर में दलित और मुस्लिम समुदायों की आबादी ज्यादा होने के कारण कई सीटों पर ज्यादा नाम कटे हैं। कुल 1,45,10,299 रजिस्टर्ड वोटर्स में से लगभग हर तीसरे वोटर का नाम इस लिस्ट में नहीं है। यह स्थिति बहुत गंभीर है और इससे चुनावों पर बड़ा असर पड़ेगा।

तुगलकाबाद में सबसे ज्यादा नाम कटने की संभावना

आंकड़ों के अनुसार, तुगलकाबाद विधानसभा सीट पर 1,00,386 वोटर्स में से 92,033 के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हैं। यह आंकड़ा 47.8% है, जो दिल्ली के लिए सबसे अधिक है। इसके बाद ओखला में 45.2% और बदरपुर में 42.6% वोटर्स का नाम नहीं है। ऐसे में इन जगहों पर चुनावी प्रतिस्पर्धा का रंग बदलता दिखाई देगा।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी स्थिति नाज़ुक

ओखला और चांदनी चौक, जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी वोटर्स की कमी देखने को मिली है। ओखला में 45.3% और चांदनी चौक में 38.9% वोटर्स ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं। यह आंकड़ा दिल्ली के औसत से अधिक है, which raises concerns regarding representation.

दलित आबादी वाली सीटें भी प्रभावित

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। इनमें मंगोलपुरी और मादीपुर जैसी सीटों पर भी नामों की कटौती देखने को मिली है। मंगोलपुरी में 21.2% और मादीपुर में 23.6% वोटर्स के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं। ऐसे में SC समुदाय के लिए ये आंकड़े चिंताजनक हैं।

दावों की प्रक्रिया अभी बाकी है

जो नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उनके लिए 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका है। इससे यह उम्मीद कायम है कि सही नामों को फाइनल लिस्ट में शुमार किया जा सकेगा। फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी होनी है, जो अंतिम स्थिति को स्पष्ट करेगी।

वेरिफिकेशन प्रक्रिया का शानदार नतीजा

SIR के तहत करीब डेढ़ महीने तक वोटर्स का वेरिफिकेशन किया गया, जिसमें 67.2% वोटर्स का एन्यूमरेशन फॉर्म जमा हुआ। यह आंकड़ा 97.5 लाख वोटर्स के रिकॉर्ड को दर्शाता है, लेकिन अभी भी 32.8% यानी 47.5 लाख वोटर्स को ASDDO कैटेगरी में रखा गया है। इसके तहत कई लोगों का घर पर ना मिल पाना एक प्रमुख कारण हो सकता है।

चुनाव की तैयारी में सुधार की उम्मीद

दिल्ली में जहां दलित और मुस्लिम वोटर्स की संख्या ज्यादा है, वहां ड्राफ्ट लिस्ट में नाम कटने का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि, final verification के बाद सही नामों को जोड़ने के लिए उपयुक्त प्रक्रियाएं चल रही हैं। इस बार चुनावों के लिए सभी पक्षों की तैयारियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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