UPI के चार्ज ने UPA को दिया ‘संविधान खतरे’ जैसा मौका; क्या BJP का मिशन प्रभावित होगा?

The CSR Journal Magazine
2024 के लोकसभा चुनावों में UPA द्वारा ‘संविधान बचाओ’ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। अब, केंद्र सरकार ने 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की घोषणा की है, जो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के लिए BJP के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका बन गया है।

कांग्रेस ने शुरू की बगावत

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले पर सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालेगा। सरकार पर आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि Modi सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के प्रभाव में ऐसा कर रही है। राहुल के मुताबिक, UPI के कुल ट्रांजैक्शन में 2000 रुपये से अधिक की चाल की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है।

खरगे का भी जुड़ा बयान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि अब मोदी सरकार की लूट UPI तक पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी की जेब पहले से ही खाली है और अब सरकार डिजिटल पेमेंट टैक्स लगाकर उनकी बचत को तबाह करने की योजना बना चुकी है।

संविधान खतरे का नया अंदाज

राहुल गांधी ने UPI के मुद्दे को सिर्फ तकनीकी शुल्क तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आर्थिक बोझ और सरकार की नीतियों से जोड़कर बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की है। इस तरह, राजनीतिक नैरेटिव में बदलाव दिखता है जबकि सरकार के फैसले को आम लोगों से जोड़ा गया है।

ट्रेड डील पर उठते सवाल

कांग्रेस के सहयोगी दल भी संभावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सवाल उठाने लगे हैं। UPA पहले से ही PM मोदी पर आरोप लगा रहा है कि वह अमेरिका के सामने कंप्रोमाइस कर रहे हैं। ऐसे में UPI ट्रांजैक्शन पर लगे चार्ज को भी चुनावी मोर्चाबंदी के लिए एक मुद्दा बनाया जा सकता है।

UP और पंजाब के चुनावी दृष्टिकोण

अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के लिए UPI का महत्व बहुत अधिक है। अगर MDR का मुद्दा चुनावी भाषणों में ‘आम आदमी की जेब’ से जोड़ा जाता है, तो यह विपक्ष के लिए मजबूत आधार बन सकता है।

BJP की चुनौती

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और बीजेपी को 2024 में यहाँ करारा झटका लगा था। समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी और बीजेपी 33 सीटों पर सीमित रह गई थी। जबकि पंजाब में बीजेपी पहले ही सत्ता से बाहर है। ऐसे समय में UPA का नया नैरेटिव समस्याएँ पैदा कर सकता है।

UPI पर चार्ज की स्थिति

केंद्र सरकार ने 14 सितंबर को स्पष्ट किया था कि 2000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं किया जाएगा। 15 सितंबर को 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह चार्ज ग्राहक पर नहीं लगेगा और अधिकांश मर्चेंट इससे प्रभावित नहीं होंगे।

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