UP में ग्राम सभा की जमीनों की अदला-बदली अब होगी मुश्किल, इलाहाबाद HC ने दी मंजूरी

The CSR Journal Magazine
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम सभा की जमीनों के एक्सचेंज को लेकर यूपी रेवेन्यू कोड की धारा 101 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही, अंतरिम आदेश में कहा गया है कि इस दौरान होने वाले एक्सचेंज याचिका पर आने वाले फैसले के अधीन रहेंगे। यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो ग्राम सभा की जमीनों के संरक्षण की मांग कर रहे हैं।

ग्राम सभा की सुरक्षित जमीनें प्रभावित

याचिका में अधिवक्ता चंद्रशेखर अग्निहोत्री ने कहा है कि संशोधित प्रावधान के कारण ग्राम सभा की सुरक्षित जमीनें प्रभावित हो रही हैं। भू माफिया कम कीमत वाली अपनी जमीन देकर कीमती सरकारी जमीन हासिल कर रहे हैं। यह स्थिति ग्राम सभा के अधिकारों को कमजोर कर रही है। ऐसे में सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

गैंगस्टर एक्ट का मामला

वहीं, एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत पीलीभीत के आठ मजदूरों की सजा निलंबित कर दी है। पीलीभीत के हजारा थाना पुलिस ने इन मजदूरों पर गैंगस्टर का आरोप लगाया था। सेशन जज ने इन सभी को तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी। यह मामला तब सामने आया जब मजदूरों ने अपनी मांगों के लिए धरना प्रदर्शन किया था।

धरना-प्रदर्शन का कारण

याचिका में कहा गया है कि मजदूर केवल अपनी मांगों के लिए कभी-कभी धरना प्रदर्शन करते थे। एक बार तो उन्होंने हत्या के एक मामले में पुलिस के खिलाफ सड़क जाम कर दिया था। इस घटना के बाद तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ था। इससे खफा पुलिस ने मजदूरों पर गैंगस्टर का आरोप लगा दिया। यह मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच गया है, जहां न्याय की उम्मीद की जा रही है।

बच्चों की उम्र के रिकॉर्ड के लिए नई गाइडलाइंस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा कि प्रदेश के स्कूलों में छात्रों की सही उम्र दर्ज करने के लिए जल्द नई गाइडलाइंस जारी की जाएंगी। मैनपुरी के डन्नाहर थाने में पॉक्सो एक्ट में दर्ज केस के आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इसका ड्राफ्ट पेश किया। यह कदम बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

फर्जी आयु प्रमाण पत्र का मामला

कोर्ट ने कहा कि फर्जी आयु प्रमाण पत्र के आधार पर 19-20 साल के लड़कों को पॉक्सो एक्ट में झूठा फंसाया जा रहा है। इसे रोकने के लिए स्कूल प्रवेश के समय आयु का सही रिकॉर्ड जरूरी है। कोर्ट ने आरोपित की सशर्त जमानत भी मंजूर कर ली है। यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

सरकार की जिम्मेदारी

इन सभी मामलों में सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ग्राम सभा की जमीनों के संरक्षण से लेकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा तक, सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। हाईकोर्ट के निर्णयों से यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका भी इन मुद्दों पर गंभीर है और सरकार को उचित दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।

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