4 अक्टूबर को ठाकरे बंधुओं का शक्ति प्रदर्शन, चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ मेट्रो सिनेमा से BMC तक निकलेगा ‘गर्जना मोर्चा’
महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार के दो प्रमुख नेताओं राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के संयुक्त कार्यक्रम को लेकर मुंबई में तैयारियां तेज हो गई हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में 4 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘गर्जना मोर्चे’ का मार्ग अब बदल दिया गया है। पहले यह मोर्चा भायखला के रिचर्डसन एंड क्रूडास गेट से निकलकर मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय तक जाने वाला था। अब मुंबई पुलिस के अनुरोध के बाद मोर्चा मेट्रो सिनेमा से BMC मुख्यालय तक निकाला जाएगा। यह संयुक्त मोर्चा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, खास तौर पर महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित किया जा रहा है। दोनों ठाकरे नेताओं ने 29 सितंबर को संयुक्त रूप से मोर्चे की घोषणा की थी। उस समय तय कार्यक्रम के मुताबिक भायखला से BMC मुख्यालय तक मार्च निकाला जाना था। बाद में मुंबई पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ के आवागमन को लेकर मार्ग में बदलाव का अनुरोध किया।
पुलिस की अपील के बाद बदला गया मार्ग
शिवसेना (UBT) के नेता अनिल परब और मनसे नेता बाला नांदगांवकर ने पत्रकारों को बताया कि दोनों दलों के प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती से मुलाकात की थी। पुलिस की ओर से भायखला के पुराने मार्ग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गईं। इसके बाद दोनों दलों ने अपने प्रमुखों से चर्चा कर मार्ग बदलने का फैसला किया। रिपोर्टों के अनुसार, पुराने मार्ग में भायखला का फ्लाईओवर भी शामिल था। नेताओं के मुताबिक वहां डिवाइडर की ऊंचाई और सीमित निकास स्थान के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में किसी अप्रिय स्थिति से निपटना मुश्किल हो सकता था। पुलिस ने इसी तरह की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन संबंधी चिंताओं के आधार पर मार्ग बदलने का अनुरोध किया था। दोनों दलों ने पुलिस के अनुरोध को स्वीकार कर नया मार्ग तय किया है। अब प्रदर्शनकारी मेट्रो सिनेमा से BMC मुख्यालय की ओर जाएंगे। मार्ग छोटा किए जाने के बावजूद कार्यक्रम के समय में बदलाव नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मोर्चा 4 अक्टूबर को सुबह 10 बजेशुरू होगा और करीब 11.30 बजे BMC मुख्यालय परिसर के पास पहुंचने के बाद सभा आयोजित की जाएगी।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने जिस मुद्दे को लेकर यह संयुक्त मोर्चा घोषित किया है, उसका केंद्र चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर विपक्षी दलों और अन्य संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र, मृत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना है। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। ठाकरे बंधुओं के मोर्चे की घोषणा ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र में मतदाता सूची और आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। 29 सितंबर को दोनों नेताओं ने संयुक्त पत्रकार वार्ता कर 4 अक्टूबर के कार्यक्रम की जानकारी दी थी। राज ठाकरे ने उस समय कहा था कि मोर्चे में राजनीतिक दलों के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर चलने की अपील की जाएगी। उन्होंने इसे किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ कार्यक्रम के बजाय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध बताया था।
सभी दलों को शामिल होने का आह्वान
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के विभिन्न राजनीतिक दलों को मोर्चे में शामिल होने का आह्वान किया है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल दलों को भी इसमें भाग लेने का निमंत्रण देने की बात कही थी। उद्धव ठाकरे ने भी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के आंदोलनों के समर्थन की बात कही है। इससे पहले दोनों नेताओं के संयुक्त रूप से सामने आने को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था। हालांकि, मोर्चे में कौन-कौन से दल औपचारिक रूप से शामिल होंगे और कितनी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचेंगे, यह कार्यक्रम के दौरान ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक दलों के अलग-अलग कार्यक्रम और रणनीतियां भी इस दौरान सामने आ सकती हैं।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
ठाकरे बंधुओं का मोर्चा ऐसे समय हो रहा है जब मुंबई में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर एक अन्य प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े कार्यकर्ताओं ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन किया था। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई। इस प्रदर्शन को लेकर मुंबई पुलिस की तैनाती और अनुमति का मुद्दा भी सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। प्रदर्शनकारियों ने इसके बावजूद अपनी मांगें उठाईं। ठाकरे बंधुओं ने भी इस आंदोलन को लेकर अपना समर्थन जताया था। इसके बाद 4 अक्टूबर के प्रस्तावित मोर्चे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हुईं। हालांकि दोनों कार्यक्रमों का आयोजन अलग-अलग संगठनों और नेतृत्व के तहत हुआ है।
ठाकरे बंधुओं की संयुक्त मौजूदगी पर नजर
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे लंबे समय बाद कई सार्वजनिक मुद्दों पर एक साथ दिखाई दे रहे हैं। मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पर दोनों नेताओं की संयुक्त घोषणा ने इस सहयोग को सार्वजनिक रूप दिया है। आगामी मुंबई महानगरपालिका समेत स्थानीय निकाय चुनावों की राजनीतिक पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं की संयुक्त गतिविधियों पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर है। हालांकि, 4 अक्टूबर के मोर्चे का घोषित मुद्दा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से संबंधित है। इसलिए कार्यक्रम में भाषणों और आगे की रणनीति के जरिए दोनों नेता इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी चुनौती
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में बड़े राजनीतिक मोर्चे के दौरान सुरक्षा और यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती रहता है। इसी वजह से पुलिस ने भायखला से शुरू होने वाले पुराने मार्ग को बदलने का अनुरोध किया था। नया मार्ग मेट्रो सिनेमा से BMC मुख्यालय तक रखा गया है, जिससे पुलिस को भीड़ के आवागमन और आपात स्थिति में निकासी का प्रबंधन करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। मुंबई पुलिस और आयोजक दलों के बीच कार्यक्रम के दौरान भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। मोर्चे में बड़ी संख्या में समर्थकों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आसपास के मार्गों पर यातायात में बदलाव या पुलिस बंदोबस्त की जानकारी प्रशासन की ओर से अलग से जारी की जा सकती है।
अब मेट्रो सिनेमा से BMC तक होगा मार्च
इस तरह 4 अक्टूबर का बहुप्रतीक्षित ‘गर्जना मोर्चा’ अब भायखला से नहीं, बल्कि मेट्रो सिनेमा से शुरू होगा। इसका समापन BMC मुख्यालय के पास होगा और इसके बाद सभा आयोजित की जाएगी। मोर्चे का समय सुबह 10 बजे ही निर्धारित है। ठाकरे बंधुओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर यह आंदोलन घोषित किया है। वहीं चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनावी सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया बताया गया है। ऐसे में 4 अक्टूबर का प्रदर्शन महाराष्ट्र में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का एक प्रमुख घटनाक्रम होगा।
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