पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर सबूतों को रिकॉर्ड करेगी SC की कमेटी

The CSR Journal Magazine
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और हिंसा के आरोपों की जांच अब एक नई दिशा में बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय जांच समिति 29 अक्टूबर को प्रभावित लोगों की शिकायतें सुनने के लिए तैयार है। इस दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के मामलों पर सबूत रिकॉर्ड किए जाएंगे। इसके लिए प्रभावित लोगों को वैध पहचान पत्र लाना अनिवार्य होगा।

पैलेट गन के इस्तेमाल की गंभीरता

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) इस बात की जांच कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया या नहीं। इसके अलावा, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाली बदसलूकी और हिंसक घटनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। यह समिति यह भी देखेगी कि क्या पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया और क्या संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। जिन लोगों को इस प्रदर्शन के दौरान नुकसान हुआ है, वे अपनी बात कमेटी के सामने रख सकते हैं।

कमेटी की संरचना और कार्यप्रणाली

इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। इसके अलावा, इसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक एल. आर. बिश्नोई शामिल हैं। कमेटी ने प्रभावित लोगों, गवाहों और अन्य संबंधित लोगों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। इसके जरिए वे अपना बयान, शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेज जमा कर सकते हैं।

गवाहों की सुरक्षा पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनकी पहचान को गोपनीय रखने के साथ ही जमा किए गए बयानों और सबूतों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी। यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि गवाहों को कोई खतरा न हो और वे स्वतंत्र रूप से अपनी बात रख सकें।

20 जुलाई की झड़प की पृष्ठभूमि

20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। कुछ छात्रों को चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय पैलेट गन के संभावित इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई थी। यह आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और बाद में कई शहरों तक फैल गया।

आंदोलन का प्रभाव और आगे की कार्रवाई

25 जुलाई को पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन वापस ले लिया गया था। अब, कमेटी प्रभावित लोगों की शिकायतें और सबूत दर्ज कर इन घटनाओं से जुड़े आरोपों की जांच आगे बढ़ाएगी। यह जांच न केवल न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में सुधार के लिए भी एक आधार तैयार करेगी।

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