धार भोजशाला में जुमे की नमाज़ के विरोध में गूंजी हनुमान चालीसा, छावनी में बदला पूरा इलाका

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धार में भोजशाला: जुमे की नमाज के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ, भोजशाला में बढ़ता तनाव

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार में स्थित सदियों पुरानी भोजशाला में जुमे की नमाज के विरोध में हिंदू संगठनों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किए जाने से सांप्रदायिक तनाव गहरा गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के बाद उपजे इस नए विवाद को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं।

विवाद की वर्तमान पृष्ठभूमि: क्या है पूरा मामला?

विवाद की ताजा कड़ी शुक्रवार को तब शुरू हुई जब मुस्लिम समाज सर्वोच्च न्यायालय की अंतरिम व्यवस्था के तहत भोजशाला से सटे खसरा नंबर 612 (सर्वे नंबर 612) पर जुमे की नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुआ। दूसरी ओर, हिंदू संगठनों और ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने इस नमाज स्थल पर कड़ी आपत्ति जताई। हिंदू पक्ष का तर्क है कि भोजशाला परिसर के बेहद नजदीक नमाज पढ़ने से इसकी पवित्रता प्रभावित होती है, इसलिए भोजशाला की 100 मीटर की संरक्षित सीमा के भीतर किसी भी प्रकार की नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। इसी आपत्ति और विरोध के स्वरूप, शुक्रवार को बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग भोजशाला परिसर के भीतर और नजदीक अखंड ज्योति मंदिर के पास जमा हो गए। वहां उन्होंने शंखनाद, जयघोष और महाआरती के साथ विशाल हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया, जिससे परिसर में धार्मिक और राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला (15 मई 2026)

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में भोजशाला को मूल रूप से हिंदू मंदिर (मां वाग्देवी का मंदिर) घोषित किया था। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा और मुसलमानों को शुक्रवार को जुमे की नमाज की अनुमति थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद हिंदू पक्ष को परिसर में नियमित अखंड पूजा का अधिकार मिल गया और मुख्य परिसर में नमाज पर रोक लग गई।

सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष (कमाल मौला मस्जिद समिति) ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अंतरिम राहत देते हुए जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया कि वे भोजशाला के मुख्य भवन के बाहर, लेकिन उसके समीप (खसरा नंबर 612 पर) नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अंतरिम व्यवस्था है, न कि कोई अंतिम फैसला। इसी अंतरिम आदेश के क्रियान्वयन के तहत पिछले कुछ हफ्तों से खसरा नंबर 612 की जमीन पर जुमे की नमाज अदा की जा रही है, जिसका अब हिंदू संगठनों द्वारा जमीन पर उतरकर कड़ा विरोध किया जा रहा है।

मैदान पर स्थिति: शंखनाद बनाम अजान

शुक्रवार दोपहर को जब नमाजी खसरा नंबर 612 पर पहुंचने लगे, तो उसी समय भोजशाला के भीतर और आसपास का माहौल ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारों से गूंज उठा। हिंदू उत्सव समिति और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पदाधिकारियों के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। शंख बजाकर हिंदू समाज ने अपना शांतिपूर्ण लेकिन मुखर विरोध दर्ज कराया। हिंदू पक्ष के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का कण-कण चिल्लाकर कह रहा है कि यह महाराजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का पवित्र मंदिर है। कोर्ट ने भी हमारे अधिकार को माना है। हम मंदिर की परिधि के ठीक पास नमाज पढ़ने की जिद का विरोध करते रहेंगे और इसके लिए कानूनी व सामाजिक लड़ाई जारी रहेगी”। दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे केवल देश की सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और प्रशासन द्वारा आवंटित स्थान पर ही शांतिपूर्ण तरीके से अपनी इबादत कर रहे हैं।

प्रशासनिक चुनौतियां और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस धार्मिक रस्साकशी के बीच सबसे बड़ी परीक्षा स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की है। धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है। दोनों समुदायों के बीच किसी भी संभावित टकराव या आमने-सामने की स्थिति को टालने के लिए नमाजियों के आने-जाने का मार्ग और हिंदू श्रद्धालुओं के प्रवेश का मार्ग पूरी तरह अलग कर दिया गया है।

भारी पुलिस बल की तैनाती

धार जिले के अलावा आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष सशस्त्र बल (SAF) की टुकड़ियों को तैनात किया गया है। संवेदनशील खसरा नंबर 612 और भोजशाला के गुंबदों व दीवारों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जा रही है, साथ ही ड्रोन कैमरों से पूरे इलाके की मैपिंग की जा रही है।

सोशल मीडिया पर नजर

पुलिस का साइबर सेल अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए भड़काऊ पोस्ट और सोशल मीडिया ग्रुप्स पर कड़ी निगरानी रख रहा है। धार के एसपी सचिन शर्मा ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा, “धार शहर की फिजा और आपसी भाईचारा हमेशा से मिसाल रहा है। माननीय न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन कराया जा रहा है। किसी को भी कानून-व्यवस्था अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। दोनों पक्षों के आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना हमारी प्राथमिकता है”।

हिंदू संगठनों की नई मांगें और भविष्य की राह

तनावपूर्ण माहौल के बीच राजपूत समाज और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने जिला कलेक्टर को एक नया ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी गई हैं-
भोजशाला परिसर के चारों तरफ 100 मीटर के संरक्षित क्षेत्र की आधिकारिक मार्किंग (सीमांकन) तुरंत की जाए।
इस संरक्षित क्षेत्र के भीतर मौजूद सभी प्रकार के कथित अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए।
खसरा नंबर 612 की जमीन भोजशाला से बिल्कुल सटी होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, अतः मुस्लिम समाज के लिए नमाज की व्यवस्था धार शहर से दूर किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित की जाए।

 विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

धार की भोजशाला का यह विवाद कोई नया नहीं है, लेकिन हालिया न्यायिक मोड़ों ने इसे एक नया रूप दे दिया है। जहां हिंदू समाज हाई कोर्ट के फैसले के बाद इसे पूरी तरह ‘अखंड सनातन संस्कृति’ का केंद्र मानकर गर्व महसूस कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के सहारे अपने इबादत के हक को बचाए रखने की कोशिश में है। वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और प्रशासन की मुस्तैदी के कारण दोनों धार्मिक गतिविधियां समानांतर और शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुई हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई और मांगों का बढ़ता दायरा यह संकेत देता है कि जब तक सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर कोई अंतिम और सर्वमान्य फैसला नहीं सुना देता, तब तक धार की इस ऐतिहासिक धरा पर हर शुक्रवार को प्रशासनिक अमले को इसी तरह अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ेगा।

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