शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े सवाल, अवैध शराब और मौतों पर जताई चिंता

The CSR Journal Magazine
शराबबंदी का मुद्दा हमेशा से चर्चा में रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर कुछ सवाल उठाए हैं जो यह जानने में मदद करेंगे कि क्या शराबबंदी का प्रभाव वास्तव में होता है। कोर्ट ने अवैध शराब, भ्रष्टाचार और जहरीली शराब के खतरों पर चिंता जताई है।

क्या शराबबंदी से कम होती है शराब की बिक्री?

सुप्रीम कोर्ट के सवालों में से एक यह है कि क्या शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने से उसका उपयोग खत्म हो जाता है। उदाहरण के लिए, बिहार में जून 2026 में 7.30 लाख लीटर अवैध शराब जब्त की गई। क्या इसका मतलब है कि शराबबंदी असफल रही है? यह बात कई राज्यों की स्थिति को देख कर स्पष्ट हो जाती है।

गुजरात का उदाहरण: सख्त शराबबंदी के बावजूद मौतें

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात का उदाहरण दिया, जहां 1960 से सख्त शराबबंदी नीति लागू है। फिर भी, वहां जहरीली शराब की 600 से ज्यादा मौतें हुई हैं। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। यदि शराबबंदी सफल होती तो क्या स्थिति यह होती?

राजस्व का नुकसान: एक बड़ा मुद्दा

शराब पर टैक्स राज्य सरकारों की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शराबबंदी के कारण कई राज्यों में राजस्व की कमी हो गई है। PRS Legislative Research के अनुसार, बिहार, गुजरात, मिजोरम और नागालैंड में शराबबंदी के कारण आबकारी शुल्क से राजस्व लगभग शून्य हो गया है।

बिहार में अवैध शराब का बढ़ता कारोबार

बिहार ने अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इसके बाद भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई जारी है। जून 2026 में राज्य सरकार ने 1,22,275 छापे मारे और 7,30,472 लीटर अवैध शराब जब्त की। यह दर्शाता है कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध व्यापार जारी है।

जहरीली शराब से हुई मौतों का आंकड़ा

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में 1,365 लोग जहरीली शराब से मरे थे। 2019 और 2020 में भी बड़ी संख्या में मौतें हुईं। इसका मतलब है कि शराबबंदी के नतीजों को समझने के लिए ज़्यादा गहराई से अध्ययन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ शराबबंदी पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि जहरीली शराब रोकने के लिए बेहतर निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया है। अदालत ने मेथनॉल जैसे खतरनाक रसायनों की बिक्री और परिवहन की निगरानी पर जोर दिया है।

निष्कर्ष: गंभीर मुद्दे पर बहस जारी

शराबबंदी और अवैध शराब, दोनों पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है। यह बहस केवल शराबबंदी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याओं के मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।

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