Delhi-NCR में रेप के मामलों पर SC का बड़ा कदम, हर जिले में बनेगी स्पेशल टीम; पार्क से मेट्रो तक सुरक्षा ऑडिट

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संवेदनशील इलाकों का तत्काल सर्वे और सुरक्षा ऑडिट करने के निर्देश दिए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि हर पुलिस जिले के लिए विशेष टीम बनने चाहिए, जिनकी अगुवाई DSP रैंक से नीचे के अधिकारी नहीं करेंगे। यह व्यवस्था चार सप्ताह के अंदर तैयार करनी होगी, ताकि सुरक्षा में सुधार किया जा सके।

संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा पर ध्यान

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी चिन्हित सार्वजनिक पार्कों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर उचित पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। खास तौर पर शाम, देर रात और सुबह के शुरुआती घंटों में सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है। प्रत्येक संवेदनशील स्थान के लिए एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था बनाने का भी निर्देश दिया गया है।

लाइटिंग और CCTV का ऑडिट

कोर्ट ने सभी पार्कों और संवेदनशील क्षेत्रों में लाइटिंग और CCTV ऑडिट का निर्देश दिया। यह सुनिश्चित करना होगा कि खराब कैमरे और लाइटिंग की स्थिति को जल्दी ठीक किया जाए। इसके अलावा, मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप, और रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख सार्वजनिक परिवहन केंद्रों पर भी इसी प्रकार का ऑडिट होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री जन सुनवाई पोर्टल समेत मौजूदा शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग करने का भी निर्देश दिया है। इसमें सरकारी अधिकारियों को सुनसान रास्तों, खराब लाइटिंग और अन्य समस्याओं की शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा की कमियों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

फास्ट ट्रैक और POCSO कोर्ट की रिपोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को चार सप्ताह में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और विशेष POCSO अदालतों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया गया है। इस रिपोर्ट में इन अदालतों की कार्यप्रणाली, निष्पादन और मामलों की स्थिति का जिक्र होगा।

यौन अपराधियों के डेटाबेस की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से नेशनल डेटाबेस ऑन सेक्सुअल ऑफेंडर्स (NDSO) के इस्तेमाल पर जानकारी मांगी है। पुलिस को यह बताना होगा कि डेटाबेस का उपयोग नियमित रूप से पूर्व रिकॉर्ड की जांच और आदतन यौन अपराधियों की पहचान के लिए किया जा रहा है या नहीं।

इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की स्थिति

इसके अलावा, कोर्ट ने दिल्ली में 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, मिशन शक्ति, और 181 महिला हेल्पलाइन की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी मांगी है। इन सेवाओं के कामकाज में सुधार करने के लिए उचित कदम उठाने होंगे।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 28 सितंबर को स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

सुरक्षा में व्यवस्थित कमियों की पहचान

अदालत ने कहा कि साउथ दिल्ली के कॉलेज की छात्राओं की बार-बार की गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने कोई उचित कदम नहीं उठाए। यह स्थिति एक दशक पहले हुए निर्भया कांड की दर्दनाक याद दिलाती है, जब पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा में मौजूद कमियों को नजरअंदाज किया।

संविधान के अनुच्छेद 21 का महत्व

सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है कि क्या प्रशासनिक कमियों को दूर करके नागरिकों को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दिया जा सकता है। अत्यधिक जोखिम भरे क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाए बिना वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।

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