SIR में हर 3 में से 1 वोटर का नाम कटा, राजधानी दिल्ली में क्यों डिलीट होने जा रहे 47 लाख वोट?

The CSR Journal Magazine
दिल्ली की चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47,56,722 मतदाताओं के नाम गायब हैं। इसका मतलब है कि दिल्ली के 1.45 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स में से लगभग हर तीन में से एक वोटर का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं है। ऐसी स्थिति ने मतदाताओं के बीच चिंताओं को जन्म दिया है। हालाँकि, यह अंतिम लिस्ट नहीं है और लोग अपनी आपत्ति और दावा दर्ज कर सकते हैं।

क्या हैं नाम कटने की वजहें?

हाल ही में, SIR के तहत कैंडिडेट्स का सत्यापन घर-घर जाकर किया गया। दिल्ली में 67.2% वोटर्स के नाम सत्यापित हुए, जबकि 32.8% नाम ASDDO श्रेणी में डाल दिए गए। इसमें ‘Absent’, ‘Shifted’, ‘Dead’, ‘Duplicate’, और ‘Others’ श्रेणी शामिल हैं। यानि कि इतने सारे मतदाताओं को मृत या फर्जी घोषित नहीं किया गया है।

नई लिस्ट में क्या किया जा सकता है?

अगर किसी वोटर का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो उन्हें 31 अगस्त से 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका मिलेगा। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया के तहत उन मतदाताओं के नाम सही पाए जाने पर फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल करेगा। अंतिम SIR लिस्ट 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

अपने नाम की स्थिति जानें

हालांकि 47 लाख वोटर्स का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब है, यह हमेशा के लिए नहीं है। वोटर अपने नाम की स्थिति और अन्य जानकारी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ECI) के आधिकारिक पोर्टल पर देख सकते हैं। यदि आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो जल्दी से अपना दावा दर्ज करें।

सत्यापन प्रक्रिया में क्या महत्वपूर्ण है?, कितने मतदाता हैं असली?

SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को समसामयिक बनाना और डुप्लीकेट या अवैध प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि, 20% से ज्यादा मतदाता ऐसे थे जो अपने पंजीकृत पते पर उपलब्ध नहीं थे। शायद घर बदल चुके थे या दिल्ली से बाहर चले गए थे। यह जानना जरूरी है कि 47.56 लाख नामों में से वास्तव में कितने वोटर मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट हैं। यह इस प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा जब लोग अपने दावे प्रस्तुत करेंगे और उनकी जांच की जाएगी।

निष्कर्ष की जगह आशंका

इस ड्राफ्ट लिस्ट में इतनी बड़ी संख्या में नामों का काटा जाना इस बात का संकेत है कि दावे और आपत्तियों का चरण बेहद महत्वपूर्ण है। अगर कोई योग्य मतदाता अपना नाम नहीं पाता है, तो उसे तय समय के भीतर दावा करना होगा। बीते वर्षों में ऐसी प्रक्रियाओं ने कई मतदाताओं को उनके अधिकारों से वंचित किया है, इसलिए यह समय बेहद संवेदनशील है।

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