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March 15, 2026

RSS का बयान: “मरने पर विरोध नहीं होता, भारत की परंपरा

The CSR Journal Magazine
हरियाणा में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के समापन पर, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने ईरान के नेता खामेनेई की मृत्यु पर हो रहे विरोध पर कहा कि मरने के बाद किसी का विरोध नहीं होना चाहिए। यह भारत की परंपरा है कि जीवित रहते विरोध हो सकता है, लेकिन मौत के बाद इस तरह के प्रदर्शन अव्यवस्थित हैं। उन्होंने कहा कि विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।

देशभर में संघ का विस्तार

दत्तात्रेय होसबोले ने इस अवसर पर आरएसएस के संगठनात्मक विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि अंडमान से अरुणाचल तक संघ की शाखाएं कार्यरत हैं और दुर्गम स्थानों पर भी शाखाएं खोलने का लक्ष्य है। यह संगठन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा में शामिल लोग राष्ट्र के लिए सोचते हैं, न कि केवल जाति या क्षेत्र के संदर्भ में।

औपनिवेशिक मानसिकता पर प्रहार

दत्तात्रेय ने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता को हटाना संघ की प्राथमिकता है। उन्होंने समाज में सज्जन शक्तियों को एकजुट करने पर जोर दिया। इस शताब्दी वर्ष में विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं के लिए जागरूकता बढ़ाने की योजना बनाई गई है, जिससे वे देश की समग्रता को समझ सकें।

विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला

हरियाणा का यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है, जहां देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। अरुणाचल प्रदेश में अब तक 37 हजार लोग इन कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। विशेष रूप से गुरु तेग बहादुर की जयंती पर 2134 कार्यक्रम किए गए, जिसमें लगभग 7 लाख लोगों ने भाग लिया। यह सब संघ की पहुंच को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए किया गया।

प्राकृतिक खेती का अनूठा तरीका

दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि संघ ने अपने छतों पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल कर हरित घरों का कॉन्सेप्ट शुरू किया है। इस बदलाव का उद्देश्य समाज के हर स्तर पर लाभ पहुंचाना है।

संघ की आगे की योजनाएं

दत्तात्रेय ने कहा कि संघ के कार्य के विस्तार को जारी रखने के लिए विकेंद्रीकरण की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कार्य की व्यवस्था 45 प्रांतों में है, जिसे आगे बढ़ाकर 80 से अधिक संभागों में बदला जाएगा। यह बदलाव शताब्दी वर्ष के बाद प्रस्तावित किया गया है, जिससे संगठन की प्रवृत्तियों में अधिक प्रभावी बदलाव लाना संभव हो सके।
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