झांसी में आरपीएफ की प्रतियोगिता में कुत्तों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब, आग के बीच दिखाया गजब का हुनर

The CSR Journal Magazine

कुत्तों की फुर्ती ने जीता दिल

उत्तर प्रदेश के झांसी में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के प्रशिक्षित कुत्तों ने अपनी फुर्ती और सूंघने की क्षमता से दर्शकों का ध्यान खींचा। आग की लपटों के बीच से कूदने वाले कुत्तों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया, जबकि एक श्वान बाइक पर सवार होकर संतुलन दिखाता नजर आया। ये सभी करतब दर्शकों के लिए रोमांचक अनुभव बने।

प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

झांसी के आरपीएफ ग्राउंड में 19वीं अखिल भारतीय रेलवे सुरक्षा बल के कुत्तों की प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 22 से 27 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें देश के 17 रेलवे जोन से 73 प्रशिक्षित कुत्ते अपने हैंडलरों के साथ हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन में 150 से अधिक पुलिसकर्मी और आरपीएफ जवान भी शामिल हैं।

कुत्तों के अद्भुत करतब

प्रतियोगिता की शुरुआत आकर्षक प्रस्तुतियों के साथ हुई। प्रशिक्षित कुत्तों ने मार्च पास्ट कर अतिथियों को सलामी दी। इसके बाद, कठिन चुनौतियों को पूरा करते हुए श्वानों ने अपनी ट्रेनिंग का प्रदर्शन किया। बोल्ट नाम के कुत्ते ने आग की लपटों के बीच से कूदकर सभी को चौंका दिया।

कार्य क्षमता का मूल्यांकन

प्रतियोगिता में केवल करतब दिखाना ही मकसद नहीं है, बल्कि कुत्तों की कार्यक्षमता, अनुशासन और निर्देशों को समझने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। इन सबके आधार पर उनकी दक्षता को परखा जा रहा है। ट्रैकर सुल्तान ने वेलकम रिंग के जरिए अतिथियों का स्वागत किया, जबकि अन्य कुत्तों ने गुब्बारे फोड़कर कार्यक्रम को यादगार बनाया।

विशेषज्ञता के आधार पर प्रदर्शन

प्रतियोगिता में कुत्तों को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में परखा जा रहा है। इनमें ट्रैकर, एक्सप्लोसिव डिटेक्शन और नारकोटिक्स डिटेक्शन कुत्ते शामिल हैं। हर श्रेणी का काम अलग है और सुरक्षा व्यवस्था में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

रेमो का शानदार प्रदर्शन

इस प्रतियोगिता में आठ वर्षीय लैब्राडोर रेमो भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रेमो को विस्फोटक पदार्थों और बम की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उसके हैंडलर बी. विजयराजू ने बताया कि रेमो ने पहले भी अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी क्षमता साबित की है।

प्रशिक्षण की प्रक्रिया

कुत्तों को सुरक्षा संबंधी कामों के लिए तैयार करना आसान नहीं होता। इसके लिए लगातार अभ्यास और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। रेलवे के डॉग ट्रेनिंग सेंटरों में कुत्तों को लगभग नौ महीने तक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उन्हें रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा ड्यूटी में लगाया जाता है।

सुरक्षा में कुत्तों की भूमिका

कुत्तों की सूंघने की क्षमता उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में खास बनाती है। वे गंध के आधार पर ऐसी वस्तुओं का पता लगाने में मदद कर सकते हैं, जिन्हें सामान्य जांच में पहचानना मुश्किल होता है। प्रतियोगिता में बेल्जियन मेलिनोइस, जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और डाबरमैन जैसी नस्लों के कुत्ते हिस्सा ले रहे हैं।

आरपीएफ का लक्ष्य

आरपीएफ कमांडेंट जितेंद्र शर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 17 रेलवे जोन की टीमें शामिल हैं। कुल 73 प्रशिक्षित कुत्तों और 150 से अधिक आरपीएफ व पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में अलग-अलग श्रेणियों में मुकाबले कराए जा रहे हैं।

प्रतियोगिता का महत्व

झांसी में चल रही यह प्रतियोगिता श्वानों की ट्रेनिंग और उनकी कार्यक्षमता को परखने का बड़ा अवसर है। आग के बीच छलांग, बाइक की सवारी और छिपी वस्तुओं की तलाश जैसे करतब दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

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