PhonePe CEO ने Ashneer Grover की आलोचना पर दिया तगड़ा जवाब

The CSR Journal Magazine
PhonePe के CEO समीर निगम ने हाल ही में UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह नया नियम कार्ड से किए गए भुगतानों की तुलना में काफी सस्ता है। निगम के अनुसार, इसमें कई अधिक लेनदेन वाली कैटेगरी के लिए लिमिट भी शामिल है, जिससे UPI अभी भी सभी प्रकार के ट्रांजेक्शन के लिए एक बेहतर विकल्प है।

महत्वपूर्ण आंकड़ों पर दिया जोर

निगम ने बताया कि प्रस्तावित ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन का मात्र करीब 4% हिस्सा है, जबकि ये लेनदेन कुल प्राइस का लगभग 66% का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन आंकड़ों को एमडीआर संरचना में शामिल छूटों और सीमाओं के संदर्भ में देखना आवश्यक है।

क्या UPI हमेशा फ्री था?

समीर निगम ने कहा कि UPI हमेशा से शून्य एमडीआर की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने बताया कि जब UPI की शुरुआत हुई थी, तब MDR 0.65% था। इसके बाद, 2020 में सरकार ने UPI को MDR फ्री कर दिया। निगम के अनुसार, इस बदलाव से पहले UPI की तेज वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि फ्री ट्रांजेक्शन इसके स्वीकार्य होने के लिए आवश्यक नहीं था।

भारत में व्यापारी और UPI का उपयोग

निगम ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में लगभग 60 लाख व्यापारी हैं, जिनके पास पीओएस हैं। ये व्यापारी क्रेडिट कार्ड, रुपे कार्ड और मोबाइल वॉलेट स्वीकार करते हैं, जिनका चार्ज डेढ़ से ढाई प्रतिशत है। ऐसे में UPI का प्रस्तावित एमडीआर 0.4% है, जो कि विश्व स्तर पर सबसे कम है।

दैनिक लेनदेन में एमडीआर का प्रभाव

निगम ने बताया कि UPI के 95-96% व्यापारी लेनदेन ₹2,000 से कम के होते हैं और इसलिए उन पर प्रस्तावित एमडीआर लागू नहीं होगा। उन्होंने किराने का सामान, रिक्शा और पब्लिक ट्रांजपोर्ट जैसे रोजमर्रा के भुगतानों के उदाहरण दिए।

अशनीर ग्रोवर की आलोचना पर प्रतिक्रिया

एक टीवी इंटरव्यू में, PhonePe CEO ने Ashneer Grover की UPI पर चार्ज की आलोचना का जवाब देते हुए कहा, “I don’t take critics like Ashneer Grover seriously.” उन्होंने ग्रोवर द्वारा एमडीआर को टैक्स सिस्टम बताने वाली बात को सिरे से नकारा। निगम ने कहा कि उद्योग को एक टिकाऊ कमर्शियल मॉडल की आवश्यकता होती है और ‘0’ एमडीआर एक असामान्य व्यवस्था है।

क्या ग्रोवर सही हैं?

ग्रोवर ने पूछा कि भारत में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में सहायक इस प्रणाली पर शुल्क लगाने पर विचार क्यों किया जा रहा है। समीर निगम ने इसे एक गलत धारणा बताया और कहा कि यह प्रणाली अधिक सस्टेनेबल होनी चाहिए।

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