पाकिस्तान की घटिया हरकत, 104 सिख तीर्थयात्रियों को फ्लाइट में नहीं चढ़ने दिया

The CSR Journal Magazine

सिख श्रद्धालुओं का दर्द, पाकिस्तान का नया जुल्म

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने घटियापन का प्रदर्शन किया है। इस बार अपने ही देश के अल्पसंख्यक सिखों पर पाकिस्तान की सरकारी नीतियों का कहर टूटा है। 104 पाकिस्तानी सिख तीर्थयात्रियों को भारत आने से रोक दिया गया है। ये श्रद्धालु श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए भारतीय धरती पर आने का इरादा रखते थे, और उनके पास भारतीय वीजा भी था। लेकिन आखिरी पल में पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें हवाई यात्रा करने से रोक दिया।

प्रशासनिक खेलने, टिकट में होता है खेल

सिख तीर्थयात्री, जो दुबई के रास्ते नई दिल्ली जाने वाले थे, एयरपोर्ट पर पहुंचकर भारी निराशा का सामना कर रहे थे। पाकिस्तान के इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की मांग करके पूरी प्रक्रिया को जटिल बना दिया। एक तीर्थयात्री ने अपने वीडियो में स्पष्ट कहा, “हमारे पास वीजा है, तो इमिग्रेशन वाले हमसे NOC क्यों मांग रहे हैं?” उन्होंने इसे पाकिस्तान का जुल्म बताया, जिसकी वजह से उनकी तीर्थयात्रा बाधित हो गई।

महंगे विकल्प का सामना, दुबई फ्लाइट छूटी

104 सिख श्रद्धालुओं को जिनका वीजा भारत द्वारा जारी किया गया था, वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने के कारण दुबई होकर यात्रा का महंगा विकल्प चुनना पड़ा। एयरपोर्ट पर रोके जाने के कारण उनकी दुबई फ्लाइट भी छूट गई। यह न केवल उनके लिए एक आर्थिक बोझ बना, बल्कि उनकी धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई। ऐसे हालात में श्रद्धालुओं ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर जानबूझकर रुकावट डालने का आरोप लगाया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सवाल

सिख श्रद्धालुओं ने स्पष्ट रूप से आवाज उठाई कि यह सिर्फ एक यात्रा में रुकावट नहीं है, बल्कि एक लंबे समय से प्रतीक्षित धार्मिक तीर्थयात्रा में एक बाधा है। उन्होंने अपील की कि उन्हें वाघा-अटारी के जमीनी बॉर्डर से भारत में प्रवेश करने दिया जाए ताकि उनकी तीर्थयात्रा का सपना पूरा हो सके। “हम कोई अपराधी नहीं हैं, और हमारा धार्मिक कर्तव्य निभाने का हक है,” एक तीर्थयात्री ने कहा।

अन्य तीर्थयात्रियों की भी चिंता

ये घटनाएं केवल सिख श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंधों पर भी सवाल उठाती हैं। श्रद्धालुओं की इच्छा है कि उन्हें अनुमति दी जाए ताकि वे आसानी से अपनी तीर्थयात्रा कर सकें और अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभा सकें। पाकिस्तान की ओर से उठाए गए इस कदम ने जहां एक तरह से धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाया है, वहीं इसे स्थायी समस्या बताने वालों की संख्या बढ़ गई है।

सिख समाज की आवाज ऊंची, आगे का रास्ता

समाज के लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज को बुलंद करते हुए कहा है कि पाकिस्तान को अपने प्रशासनिक निर्णयों पर पुनर्विचार करना चाहिए। इस कठिनाई के बावजूद सिख समुदाय की एकता और दर्शाए गए धैर्य ने उन्हें एक नई ताकत दी है। सिख तीर्थयात्रियों का कहना है कि वे अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करने में किसी भी तरह की रुकावट को सहन नहीं करेंगे।

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