ओल्ड मंक रम प्रतिबंध से महाराष्ट्र सरकार को 350 करोड़ का नुकसान

The CSR Journal Magazine
ओल्ड मंक रम की बिक्री पर लगी रोक के कारण महाराष्ट्र सरकार को अब तक करीब 350 करोड़ रुपये का एक्साइज रेवेन्यू नुकसान हो चुका है। यह दावा लोकप्रिय रम बनाने वाली कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाईकोर्ट में किया। कंपनी ने कोर्ट में बताया कि मई 2026 से उसके प्रभावित यूनिट से ओल्ड मंक की बिक्री पर पाबंदी के चलते राज्य को 350 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ है।

कंपनी को भी हुआ बड़ा नुकसान

कंपनी के अनुसार, इस प्रतिबंध के कारण खुद कंपनी को 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, इस स्थिति से करीब 300 मजदूर भी प्रभावित हुए हैं। एक्साइज विभाग के सूत्रों ने भी पुष्टि की है कि मई से कंपनी के सभी रम वेरिएंट्स बाजार से गायब होने के कारण रेवेन्यू में कमी आई है।

फूड सेफ्टी ऑर्डर का मामला

हालांकि, 350 करोड़ का आंकड़ा कंपनी का अपना दावा है और इसे आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। यह विवाद खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें कंपनी के खोपोली प्लांट में बने उत्पाद के फॉर्मूलेशन और लेबलिंग पर आपत्ति जताई गई थी। FSSAI का कहना है कि अतिरिक्त रम फ्लेवरिंग वाले स्पिरिट को सीधे रम के नाम से नहीं बेचा जा सकता।

कंपनी का तर्क और कोर्ट की सुनवाई

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट में कहा कि अगर कंपनी उत्पाद का नाम बदलकर रम-लाइक कर दे तो बिक्री की अनुमति दी जा सकती है। कंपनी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने तर्क दिया कि नियमों के तहत स्वीकृत एडिटिव्स का इस्तेमाल जायज है। कंपनी ने पहले लेबल में बदलाव का प्रस्ताव भी दिया था, जिसमें 7 ईयर्स ओल्ड ब्लेंडेड जैसे उम्र संबंधी दावे हटाकर एडेड फ्लेवर का उल्लेख किया गया था, लेकिन FSSAI ने इसे मंजूरी नहीं दी।

कोर्ट की अगली सुनवाई

चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को तय की। कोर्ट ने पहले अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, इसलिए प्रतिबंध फिलहाल जारी है। इस मामले में आगे क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।

राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर, उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया

इस प्रतिबंध का असर केवल कंपनी पर ही नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। 350 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुका है। इससे न केवल सरकार की योजनाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी कम होंगे। उपभोक्ताओं में भी इस प्रतिबंध को लेकर निराशा है। ओल्ड मंक रम की लोकप्रियता को देखते हुए, लोग इसकी बिक्री पर रोक से असंतुष्ट हैं। कई लोग इसे एक बेहतरीन उत्पाद मानते हैं और इसकी उपलब्धता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

बाजार में अन्य विकल्प

हालांकि, ओल्ड मंक की बिक्री पर रोक के बाद बाजार में अन्य रम ब्रांड्स की बिक्री बढ़ गई है। उपभोक्ता अब अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। यह स्थिति कंपनी के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कंपनी अब अपनी रणनीति पर विचार कर रही है। अगर कोर्ट में फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तो उन्हें अपने उत्पाद को नए नाम से बाजार में लाने की योजना बनानी होगी। यह एक कठिन प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन कंपनी के लिए आवश्यक है।

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