गन्ना किसानों के लिए सरकार का बड़ा कदम, एक सप्ताह में बनेगी उच्चस्तरीय समिति

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक उच्चस्तरीय संयुक्त समिति बनाने का निर्णय लिया है। यह समिति एक सप्ताह के भीतर गठित की जाएगी। केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

किसानों की समस्याओं पर चर्चा

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने पूसा परिसर में किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन घंटे तक विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में करीब 80-90 किसान शामिल हुए, जिन्होंने अपनी समस्याओं को सामने रखा। किसानों ने उत्पादन लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है।

चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में वृद्धि की मांग

किसानों ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की है। बैठक के बाद कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि अन्नदाता किसानों का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था बनाना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के अधिकारों का उल्लंघन न कर सके।

समिति का गठन और कार्य

मंत्रियों ने एक सप्ताह के भीतर विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा की। इस समिति में केंद्र और कर्नाटक तथा महाराष्ट्र सरकारों, किसान संगठनों और चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित विषयों के विशेषज्ञ और विज्ञानी शामिल होंगे। समिति गन्ने की कटाई के समय, चीनी रिकवरी की जांच, आधुनिक लैब टेस्टिंग और वजन मापने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। तय समय में सरकार को सुझाव सौंपे जाएंगे।

किसानों की तत्काल राहत की आवश्यकता

खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि केंद्र राज्यों और किसानों के साथ तालमेल कर हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रहा है। कर्नाटक गन्ना उत्पादक संघ के हावेरी जिला अध्यक्ष भुवनेश सिधापुर ने कहा कि किसानों को तत्काल राहत चाहिए। संगठन ने गन्ने का भाव कम से कम 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।

एफआरपी और एसएपी की मांग

किसानों का कहना है कि एफआरपी तय करते समय चीनी के साथ एथेनाल, खोई और बिजली से होने वाली कमाई को भी ध्यान में रखा जाए। सिधापुर ने बताया कि चीनी का MSP फरवरी 2019 से नहीं बदला है। किसानों ने कर्नाटक में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार की तर्ज पर एफआरपी से ऊपर राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) देने की मांग भी की है।

तौल में गड़बड़ी का मुद्दा

कुछ किसानों ने कटाई के बाद तौल में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया और सभी कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) में डिजिटल तौल मशीनें लगाने की मांग की। कर्नाटक के किसानों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने और चीनी का MSP 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग को लेकर 29 सितंबर को हुब्बली में आंदोलन शुरू किया था।

आंदोलन की चेतावनी

किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन राजमार्ग जाम करने की चेतावनी दी थी। केंद्र ने उनसे प्रदर्शन वापस लेने और बातचीत के लिए दिल्ली आने को कहा था। इस प्रकार, गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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