महाराष्ट्र के नासिक में श्मशान जाने के लिए सड़क तक नहीं, नदी पार कर शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण

The CSR Journal Magazine
किसी व्यक्ति की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता उसके अंतिम संस्कार की होती है, लेकिन नासिक के सुरगाणा तहसील के चिंचला गांव में लोगों के सामने अंतिम यात्रा भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। श्मशानभूमि तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव लेकर नदी पार करनी पड़ती है। हाल ही में 61 वर्षीय झिनू सुकर पालवा के अंतिम संस्कार के दौरान भी परिजनों और ग्रामीणों को इसी मुश्किल का सामना करना पड़ा।

अंतिम यात्रा में भी नदी पार करने की मजबूरी

चिंचला गांव, गोंदुणे ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। गांव में श्मशानभूमि तो है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सुविधाजनक और पक्की सड़क नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को नदी पार कर श्मशानभूमि तक पहुंचना पड़ता है। हाल ही में झिनू सुकर पालवा के निधन के बाद जब उनका शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, तो परिजनों और ग्रामीणों को नदी पार करनी पड़ी। अंतिम यात्रा के दौरान सामने आई यह स्थिति ग्रामीणों के लिए वर्षों से चली आ रही समस्या की गंभीरता को उजागर करती है।

बारिश में हालात और खतरनाक

ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दिनों में समस्या कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और तेज बहाव के बीच शव को नदी पार कराना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे समय ग्रामीणों के सामने दोहरी परेशानी होती है। एक ओर परिवार किसी अपने को खोने के दुख में होता है और दूसरी ओर अंतिम संस्कार के लिए भी उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

वर्षों से समस्या, अब तक नहीं हुआ स्थायी समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशानभूमि तक सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से प्रशासन और ग्राम पंचायत के सामने यह मुद्दा उठाया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और श्मशानभूमि तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। इसके साथ ही नदी पर ऐसी आवश्यक व्यवस्था करने की भी मांग की गई है, जिससे बारिश के दौरान लोगों को नदी पार करने में खतरा न उठाना पड़े।

सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, सम्मानजनक अंतिम संस्कार का है

चिंचला की यह तस्वीर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में जहां रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, वहीं किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा भी मुश्किल और जोखिम भरी हो जाती है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को सिर्फ एक शिकायत के तौर पर नहीं, बल्कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखेगा और जल्द स्थायी समाधान करेगा।
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