गणेश विसर्जन पर बढ़ा विवाद, DC ने SP से मांगा जवाब

The CSR Journal Magazine

जिला प्रशासन और पुलिस के बीच टकराव

कर्नाटक के हासन जिले में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के बीच एक गंभीर विवाद का मामला सामने आया है। हासन की जिला कलेक्टर के. एस. लथाकुमारी ने पुलिस अधीक्षक शुभनित्वा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि प्रशासन द्वारा विसर्जन पर रोक लगाने के बावजूद देविगेरे परिसर में प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे किया गया। यह आदेश 3 अक्टूबर को जारी किया गया था, और उसके अगले दिन ही पुलिस अधीक्षक को नोटिस भेज दिया गया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा

जिला प्रशासन का कहना है कि देविगेरे में गणेश और गौरी प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगाना जरूरी था। इसका कारण पानी के प्रदूषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण सुरक्षा और जलीय जीवों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को ध्यान में रखना बताया गया। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस रोक के बावजूद यदि कोई उल्लंघन होता है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी होगी। लेकिन, कलेक्टर के नोटिस में यह सवाल उठाया गया है कि फिर भी विसर्जन क्यों हुआ और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

पुलिस की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

कलेक्टर के नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब प्रशासन ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया था तो पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की। विसर्जन की घटना के बावजूद भी कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। जिला प्रशासन ने पुलिस विभाग की इस लापरवाही को ड्यूटी में चूक माना है। नोटिस में कहा गया है कि इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।

कानूनी प्रावधानों का मामला

जिला प्रशासन का आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS, 2023 की धारा 163 और जल प्रदूषण से जुड़ी कानून की धारा 24 के तहत जारी किया गया था। ये कानूनी प्रावधान इस बात की पुष्टि करते हैं कि सार्वजनिक विसर्जन पर रोक लगाने का निर्णय पूरी तरह सही था। प्रशासन ने पुलिस को आदेश दिया था कि उल्लंघन की स्थिति में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। लेकिन नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पुलिस विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है।

पुलिस अधीक्षक की पेशी

नोटिस के बाद, पुलिस अधीक्षक शुभनित्वा को जिला कलेक्टर के सामने पेश होना होगा। उन्हें पूरे मामले पर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि उन्हें यह बताना होगा कि कैसे प्रशासन के आदेश के बावजूद विसर्जन हुआ और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है, तो मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है।

प्रशासन के आदेश का पालन

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। एक तरफ जहां प्रशासन ने पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा, वहीं दूसरी तरफ रोक लगाने के बावजूद विसर्जन किया गया। अब यह देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक क्या स्पष्टीकरण देते हैं और प्रशासन अपने आदेश पर कैसे अमल करता है। इस नोटिस के माध्यम से जिला प्रशासन ने जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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